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हर साल तपिश बढ़ने पर बढ़ती है बिजली खपत
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रेवाड़ी। गर्मी बढ़ने के साथ जहां बिजली की खपत में इजाफा हुआ है वहीं औद्योगिक क्षेत्र में नौ घंटे (रात आठ बजे से सुबह 4 बजे तक) बिजली कटौती हो रही है। इससे उत्पादन में तीस फीसदी की गिरावट आई है। इसको लेकर कंपनियों के प्रबंधतंत्र के लोग परेशान हैं।
औद्योगिक क्षेत्रों में बिजली कटौती की वजह से कर्मचारियों को अनिवार्य अवकाश दिया जाने लगा है। रात की पारी में कर्मचारियों की संख्या कम कर दी गई है। औद्योगिक अधिकारियों की मानें तो धारूहेड़ा और बावल में औद्योगिक इकाईयों में बिजली आपूर्ति कम होने से 30 फीसदी तक उत्पादन कम हुआ है। ऐसे में कंपनियों का उत्पादन घटने के साथ ही लाभांश बहुत कम हो गया है। फिलहाल इन औद्योगिक क्षेत्रों में रोजाना रात 8 से सुबह 4 बजे तक बिजली कटौती होती है।
बिजली निगम ने 30 अप्रैल को बिजली कटौती का शेडयूल जारी किया था। इसके अनुसार घरेलू, व्यापारिक, कृषि और औद्योगिक फीडरों में बिजली कट का समय निर्धारित किया गया है। पहली मई को बारिश होने की वजह से इस शेडयूल पर अमल रोका गया था। तब कृषि फीडर के उपभोक्ताओं को आठ घंटे बिजली देना भी मुश्किल हो गया था। कुछ गांवों से बिजली आपूर्ति की वजह से पेयजल व्यवस्था भी प्रभावित हुई थी। फिलहाल ग्रामीण क्षेत्रों में दिन और रात के वक्त बिजली कट लगाने की स्थिति नहीं आई है लेकिन तपिश बढ़ने के साथ जैसे - जैसे बिजली की खपत बढ़ रही है, उससे बिजली आपूर्ति वाले बड़े ट्रांसफार्मरों को गर्म होने या खराब होने से बचाने के लिए इनको थोड़ी-थोड़ी देर बंद करना बिजली निगम की मजबूरी हो जाती है।
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63 लाख यूनिट हुई बिजली की खपत
अप्रैल के अंत तक जिले में बिजली खपत 70 लाख यूनिट के पार पहुंच गई। पहली मई के बाद मौसम खराब होने के बाद मंगलवार की शाम 63 लाख यूनिट तक पहुंच गई। बीते रविवार से अब मौसम वैज्ञानिकों ने अगले चार दिन तक प्रदेश में गर्मी बढ़ने के संकेत दिए हैं लेकिन जिले में इसकी शुरूआत 4 मई के बाद हो चुकी है। लगातार गर्मी बढ़ रही है और आम जनजीवन लगातार प्रभावित हो रहा है। बता दें कि जिस दिन मौसम खराब हुआ था उस दिन बिजली खपत का आंकड़ा 61 लाख यूनिट था।
24 घंटे में 30 मिनट या तकनीकी खराबी दूर करने के लिए बिजली कटौती होती है। अब किसी भी क्षेत्र में बिजली कटौती नहीं हो रही है। हर साल गर्मी बढ़ने पर बिजली खपत बढ़ती है। फिलहाल जिले में प्रतिदिन 70 लाख यूनिट बिजली की आपूर्ति हो रही है।- एमएल रोहिल्ला, अधीक्षण अभियंता, बिजली निगम
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औद्योगिक क्षेत्रों में बिजली कटौती की वजह से कर्मचारियों को अनिवार्य अवकाश दिया जाने लगा है। रात की पारी में कर्मचारियों की संख्या कम कर दी गई है। औद्योगिक अधिकारियों की मानें तो धारूहेड़ा और बावल में औद्योगिक इकाईयों में बिजली आपूर्ति कम होने से 30 फीसदी तक उत्पादन कम हुआ है। ऐसे में कंपनियों का उत्पादन घटने के साथ ही लाभांश बहुत कम हो गया है। फिलहाल इन औद्योगिक क्षेत्रों में रोजाना रात 8 से सुबह 4 बजे तक बिजली कटौती होती है।
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बिजली निगम ने 30 अप्रैल को बिजली कटौती का शेडयूल जारी किया था। इसके अनुसार घरेलू, व्यापारिक, कृषि और औद्योगिक फीडरों में बिजली कट का समय निर्धारित किया गया है। पहली मई को बारिश होने की वजह से इस शेडयूल पर अमल रोका गया था। तब कृषि फीडर के उपभोक्ताओं को आठ घंटे बिजली देना भी मुश्किल हो गया था। कुछ गांवों से बिजली आपूर्ति की वजह से पेयजल व्यवस्था भी प्रभावित हुई थी। फिलहाल ग्रामीण क्षेत्रों में दिन और रात के वक्त बिजली कट लगाने की स्थिति नहीं आई है लेकिन तपिश बढ़ने के साथ जैसे - जैसे बिजली की खपत बढ़ रही है, उससे बिजली आपूर्ति वाले बड़े ट्रांसफार्मरों को गर्म होने या खराब होने से बचाने के लिए इनको थोड़ी-थोड़ी देर बंद करना बिजली निगम की मजबूरी हो जाती है।
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63 लाख यूनिट हुई बिजली की खपत
अप्रैल के अंत तक जिले में बिजली खपत 70 लाख यूनिट के पार पहुंच गई। पहली मई के बाद मौसम खराब होने के बाद मंगलवार की शाम 63 लाख यूनिट तक पहुंच गई। बीते रविवार से अब मौसम वैज्ञानिकों ने अगले चार दिन तक प्रदेश में गर्मी बढ़ने के संकेत दिए हैं लेकिन जिले में इसकी शुरूआत 4 मई के बाद हो चुकी है। लगातार गर्मी बढ़ रही है और आम जनजीवन लगातार प्रभावित हो रहा है। बता दें कि जिस दिन मौसम खराब हुआ था उस दिन बिजली खपत का आंकड़ा 61 लाख यूनिट था।
24 घंटे में 30 मिनट या तकनीकी खराबी दूर करने के लिए बिजली कटौती होती है। अब किसी भी क्षेत्र में बिजली कटौती नहीं हो रही है। हर साल गर्मी बढ़ने पर बिजली खपत बढ़ती है। फिलहाल जिले में प्रतिदिन 70 लाख यूनिट बिजली की आपूर्ति हो रही है।- एमएल रोहिल्ला, अधीक्षण अभियंता, बिजली निगम