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सावन में भगवान शिव का गन्ने के रस से अभिषेेक करने से होती है लक्ष्मी की प्राप्ति

Thu, 07 Jul 2022 11:15 PM IST
Rohtak Bureau रोहतक ब्यूरो
Updated Thu, 07 Jul 2022 11:15 PM IST
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Lakshmi is attained by worshiping Lord Shiva with sugarcane juice in Sawan.
रेवाड़ी। आषाढ़ शुक्लपक्ष एकादशी से कार्तिक शुक्लपक्ष एकादशी तक चातुर्मास रहेगा, इस समय शास्त्र अनुसार शादियां बंद रहेगी। शहर के ‘महाविद्याक्षरा ज्योतिष संस्थान’ के संचालक व ज्योतिषाचार्य अजय शास्त्री के अनुसार 8 जुलाई को गुप्त नवरात्रि पूर्ण, भड़ली नवमी अबूझमुहूर्त रहेगा। 13 जुलाई को गुरु पूर्णिमा (व्यास पूर्णिमा) का पर्व मनाया जाएगा।
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उन्होंने बताया कि पहला सोमवार 18 जुलाई, दूसरा सोमवार 25 जुलाई, तीसरा सोमवार 1 अगस्त, चौथा सोमवार 8 अगस्त, मासशिवरात्रि 27 जुलाई, हरियाली तीज 31 जुलाई, 11 अगस्त को रक्षाबंधन है। सावन में रुद्राभिषेक का महत्व शिव पुराण के रूद्रसंहिता में बताया गया है। सावन के महीने में रुद्राभिषेक करना विशेष फलदायी है। सर्वदेवात्मको रुद्र: सर्वे देवा शिवात्मका अर्थात सभी देवताओं की आत्मा में रुद्र उपस्थित है और सभी देवता रुद्र की आत्मा में हैं। रुद्राभिषेक में भगवान शिव के रुद्र अवतार की पूजा होती है। यह भगवान शिव का प्रचंड रूप है। समस्त ग्रह बाधाओं और समस्याओं का नाश करता है। सावन के महीने में रुद्र ही सृष्टि का कार्य संभालते हैं। इसलिए इस समय रुद्राभिषेक अधिक और तुरंत फलदायी होता है। इससे अशुभ ग्रहों के प्रभाव से जीवन में चल रही परेशानी भी दूर होती है।
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शनि की साढ़ेसाती, ढैया व महादशा में मिलेगी राहत
ज्योतिषाचार्य अजय शास्त्री के अनुसार 25 जुलाई को सोमप्रदोष है। सावन माह व्रत करने से व भगवान भोलेनाथ का अभिषेक पूजन करने से शनि ग्रह के दोषों से मुक्ति मिलती है। कालसर्प दोष से मुक्ति मिलेगी। 02 अगस्त को नागपंचमी है जिन लोगों की कुंडली में कालसर्प दोष है, उनको नाग नागिन सहित भगवान भोलेनाथ का अभिषेक पूजन करना चाहिए। शास्त्री के अनुसार सावन में भोलेनाथ का गन्ने के रस से अभिषेक करने पर लक्ष्मी प्राप्ति, दूध से मनोकामनाएं पूर्ण, घी से आरोग्यता व वंश वृद्धि, इत्र युक्त जल से बीमारी नष्ट होती है। सरसों के तेल से शत्रु नाश, दही से भवन वाहन प्राप्ति, तथा शहद युक्त जल से अभिषेक करने पर समस्त पापों का नाश होता है।
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