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सफाई और कूड़ा उठाने पर हर माह लाखों रुपये खर्च, परेशानी बरकरार
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नई आबादी की एक गली में गंदगी के कारण बदहाल सड़क।
- फोटो : Rewari
रेवाड़ी। शहर के 31 वार्डों में सफाई और डोर-टू-डोर कचरा उठाने के नाम पर प्रत्येक माह 35 लाख रुपये से अधिक खर्च होते हैं। बावजूद इसके शहर के लोग गंदगी से परेशान हैं। जहां गलियों में सफाई कर्मचारी नहीं पहुंचते, वहीं कचरा लेने वाली गाड़ी का कोई समय निर्धारित नहीं है। इसके चलते कचरा लोगों के घरों में और आसपास सड़ रहा है।
सात माह पहले जनवरी में नगर परिषद हाउस की पहली बैठक में सफाई कर्मचारी बढ़ाने का प्रस्ताव पास किया गया था। लेकिन वह आगे नहीं बढ़ पाया है। वहीं नगर परिषद की ओर से नया टेंडर देकर सुबह 11 बजे से पहले शहर के सभी घरों से कचरा उठाने का दावा किया गया था। लेकिन आज तक इसकी व्यवस्था नहीं बन पाई है। गंदगी के कारण बारिश के दिनों में शहर की गलियों में निकलना तक मुश्किल है।
400 की आबादी के लिए एक सफाई कर्मचारी जरूरी
शहर में सफाई के लिए करीब 370 सफाई कर्मचारी नियुक्त हैं, जबकि आबादी के हिसाब से 500 से अधिक की जरूरत है। नप अधिकारी मानते हैं कि इन दिनों एक-एक कर्मचारी पांच के बराबर काम कर रहा है। लेकिन कहां पर कार्य होता है नहीं दिखाई देता। नियमानुसार 400 लोगों की आबादी के लिए एक सफाई कर्मचारी की जरूरत होती है। पार्षदों के घरों के आसपास की सफाई व अन्य गलियों में सफाई में अंतर देखा जा सकता है। जो भी पार्षद बनता है सफाई कर्मचारी उसकी गली में शिफ्ट हो जाते हैं। बता दें कि शहर की कई ऐसी गलियां हैं, जहां पर महीनों तक सफाई कर्मचारी नहीं पहुंचते हैं।
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कचरा वैन सुबह 8 तो कभी 12 बजे पहुंच रही
नगर परिषद की ओर से करीब करीब 28 कचरा वैन अलग-अलग 31 वार्डों में लगाई गई हैं। कुछ माह पहले तक कचरा वैन समय पर पहुंच रही थी, लेकिन अब इनका कोई समय निर्धारित नहीं रह गया है। ये कचरा वैन कभी सुबह 8 बजे तो कभी दिन में 12 बजे पहुंचती है। इसके चलते शहरवासियों के घरों में कचरा सड़ता रहा है। ऐसे में सवाल है कि आखिर पटरी से उतरी सफाई व्यवस्था की निगरानी ठीक से क्यों नहीं की जा रही है। हालांकि कुछ माह पहले डीसी यशेंद्र सिंह की ओर से शहर के सभी वार्ड में निगरानी के लिए अलग-अलग विभाग के अधिकारियों को नोडल अधिकारी नियुक्त किया गया था। बावजूद इसके कोई समाधान होता नहीं दिख रहा है।
गाड़ियों में जीपीएस होने का दावा, फायदा कुछ नहीं
नगर परिषद अधिकारियों के अनुसार सुबह पांच बजे डोर-टू-डोर कचरा कलेक्शन के लिए गाड़ियों को रवाना किया जाता है। सभी गाड़ियों में जीपीएस लगाया हुआ है। सूखा व गीला कचरा लोगों को भी अलग-अलग डालना चाहिए। बारिश के चलते एक-एक कर्मचारी 7 के बराबर काम कर रहे हैं। बारिश के चलते कुछ परेशानी हुई है, इसको दुरुस्त किया जाएगा। कर्मचारियों की संख्या भी बहुत कम है।
नप रेवाड़ी के मुख्य सफाई निरीक्षक संदीप कुमार ने बताया कि डोर-टू-डोर कचरा कलेक्शन के लिए गाड़ियों की संख्या बढ़ाने के लिए टेंडर तैयार कर टेक्निकल ब्रांच को दिया हुआ है। टेंडर करने का कार्य उनका है। वहीं सफाई कर्मचारियों की संख्या बढ़ाने पर काम चल रहा है। एक गाड़ी के पास क्षेत्र ज्यादा होने के चलते देरी हो रही है। नया टेंडर होते ही इन सब समस्याओं का समाधान हो जाएगा।
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सात माह पहले जनवरी में नगर परिषद हाउस की पहली बैठक में सफाई कर्मचारी बढ़ाने का प्रस्ताव पास किया गया था। लेकिन वह आगे नहीं बढ़ पाया है। वहीं नगर परिषद की ओर से नया टेंडर देकर सुबह 11 बजे से पहले शहर के सभी घरों से कचरा उठाने का दावा किया गया था। लेकिन आज तक इसकी व्यवस्था नहीं बन पाई है। गंदगी के कारण बारिश के दिनों में शहर की गलियों में निकलना तक मुश्किल है।
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400 की आबादी के लिए एक सफाई कर्मचारी जरूरी
शहर में सफाई के लिए करीब 370 सफाई कर्मचारी नियुक्त हैं, जबकि आबादी के हिसाब से 500 से अधिक की जरूरत है। नप अधिकारी मानते हैं कि इन दिनों एक-एक कर्मचारी पांच के बराबर काम कर रहा है। लेकिन कहां पर कार्य होता है नहीं दिखाई देता। नियमानुसार 400 लोगों की आबादी के लिए एक सफाई कर्मचारी की जरूरत होती है। पार्षदों के घरों के आसपास की सफाई व अन्य गलियों में सफाई में अंतर देखा जा सकता है। जो भी पार्षद बनता है सफाई कर्मचारी उसकी गली में शिफ्ट हो जाते हैं। बता दें कि शहर की कई ऐसी गलियां हैं, जहां पर महीनों तक सफाई कर्मचारी नहीं पहुंचते हैं।
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कचरा वैन सुबह 8 तो कभी 12 बजे पहुंच रही
नगर परिषद की ओर से करीब करीब 28 कचरा वैन अलग-अलग 31 वार्डों में लगाई गई हैं। कुछ माह पहले तक कचरा वैन समय पर पहुंच रही थी, लेकिन अब इनका कोई समय निर्धारित नहीं रह गया है। ये कचरा वैन कभी सुबह 8 बजे तो कभी दिन में 12 बजे पहुंचती है। इसके चलते शहरवासियों के घरों में कचरा सड़ता रहा है। ऐसे में सवाल है कि आखिर पटरी से उतरी सफाई व्यवस्था की निगरानी ठीक से क्यों नहीं की जा रही है। हालांकि कुछ माह पहले डीसी यशेंद्र सिंह की ओर से शहर के सभी वार्ड में निगरानी के लिए अलग-अलग विभाग के अधिकारियों को नोडल अधिकारी नियुक्त किया गया था। बावजूद इसके कोई समाधान होता नहीं दिख रहा है।
गाड़ियों में जीपीएस होने का दावा, फायदा कुछ नहीं
नगर परिषद अधिकारियों के अनुसार सुबह पांच बजे डोर-टू-डोर कचरा कलेक्शन के लिए गाड़ियों को रवाना किया जाता है। सभी गाड़ियों में जीपीएस लगाया हुआ है। सूखा व गीला कचरा लोगों को भी अलग-अलग डालना चाहिए। बारिश के चलते एक-एक कर्मचारी 7 के बराबर काम कर रहे हैं। बारिश के चलते कुछ परेशानी हुई है, इसको दुरुस्त किया जाएगा। कर्मचारियों की संख्या भी बहुत कम है।
नप रेवाड़ी के मुख्य सफाई निरीक्षक संदीप कुमार ने बताया कि डोर-टू-डोर कचरा कलेक्शन के लिए गाड़ियों की संख्या बढ़ाने के लिए टेंडर तैयार कर टेक्निकल ब्रांच को दिया हुआ है। टेंडर करने का कार्य उनका है। वहीं सफाई कर्मचारियों की संख्या बढ़ाने पर काम चल रहा है। एक गाड़ी के पास क्षेत्र ज्यादा होने के चलते देरी हो रही है। नया टेंडर होते ही इन सब समस्याओं का समाधान हो जाएगा।