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आईजीयू बनेगा दक्षिण हरियाणा की शिक्षा का प्रवेश द्वार
ब्यूरो /अमर उजाला
Updated Wed, 13 Apr 2016 12:57 AM IST
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इंदिरा गांधी विश्वविद्यालय मीरपुर में पढ़ने वाले लगभग दो हजार से विद्यार्थियों के साथ ही दक्षिण हरियाणा के 59 डिग्री कॉलेजों में पढ़ने वाले विद्यार्थियों को अब रोहतक, कुरुक्षेत्र, चंडीगढ़ में मंहगी फीस देकर पढ़ाई नहीं करनी पड़ेगी।
मंगलवार को कुलपति डी सुरेश की अध्यक्षता में हुई बैठक में विश्वविद्यालय कार्यकारिणी परिषद ने आने वाले सत्र में एमए राजनीतिक विज्ञान, संस्कृत, समाजशास्त्र, मनोविज्ञान, जनसंचार एवं पत्रकारिता, बी फार्मेसी, एम फार्मेसी, एमएससी बॉटनी, जंतु विज्ञान, माइक्रोबायोलोजी, फूड टेक्नालॉजी, कंप्यूटर विज्ञान और इंजीनियरिंग, इलेक्ट्रानिक्स, मेकेनिकल, सिविल, इलेक्ट्रिकल एवं प्रिंटिंग में बीटेक, एमटेक कोर्स, रेडियोलॉजी और योग में डिप्लोमा शुरू करने का प्रस्ताव पारित कर सरकार के पास भेज दिया है।
दक्षिण हरियाणा में शिक्षा का द्वार साबित होगा मीरपुर
दक्षिण हरियाणा खासकर रेवाड़ी में विश्वविद्यालय खोलने की मांग दशकों पुरानी रही है। बंसी लाल सरकार हो या फिर अन्य सरकार तब से लेकर यहां पर विश्वविद्यालय की मांग की जाती रही। उधार की बिल्डिंग में रीजनल सेंटर भी वर्षों तक चलता रहा, कांग्रेस की तत्कालीन सरकार में विश्वविद्यालय की बनाने की घोषणा हुई और विश्वविद्यालय शुरू हो गया। लेकिन यह काम कछुआ गति से चलता रहा। आलम यह है कि आज न तो विश्वविद्यालय की आय बढ़ाने के लिए कॉलेजों को जोड़ा जा सका और न ही कोर्स बढ़ाए जा सके। लेकिन पिछले कुछ दिनों से विश्वविद्यालय के विस्तार ने थोड़ी गति जरूर पकड़ी है। मंगलवार को जिस तरह से विश्वविद्यालय की कार्यकारिणी में कोर्स बढ़ाने का प्रस्ताव पास कर सरकार के पास भेजा गया है, वह किसी मील के पत्थर से कम साबित नहीं होगा। महेंद्रगढ़ में एक केंद्रीय विश्वविद्यालय को छोड़ दिया जाए तो पलवल तक कोई भी विश्वविद्यालय नहीं है।
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दस हजार विद्यार्थियों को अब नहीं चुकानी पड़ेगी भारी-भरकम फीस
आईजीयू में इंजीनियरिंग, फार्मेसी एवं बॉटनी सहित महत्वपूर्ण विषयों में स्नातक एवं स्नातकोत्तर शुरू होने से आईजीयू में पढ़ने वाले लगभग दो हजार विद्यार्थियों के साथ रेवाड़ी के 14, फरीदाबाद के 10, पलवल के 3, मेवात के 6, गुड़गांव के 6 एवं महेंद्रगढ़ के 20 डिग्री कॉलेजों में पढ़ने वाले लगभग आठ हजार विद्यार्थियों को इसका सीधा-सीधा फायदा मिलेगा।
गौरतलब है कि अभी उक्त कॉलेज एमडीयू रोहतक से जुड़े हुए हैं। यहां पढ़ने वाले अधिकतर विद्यार्थियों को पीजी करने के लिए दिल्ली, रोहतक, कुरुक्षेत्र एवं चंडीगढ़ जाना पड़ता है। यहां पर उन्हें अधिक फीस जमा करनी पड़ती है। इसी के साथ इस क्षेत्र में सरकारी इंजीनियरिंग कॉलेज भी नहीं है, इंजीनियरिंग कोर्स शुरू होने का सबसे बड़ा फायदा ग्रामीण पृष्ठ भूमि में रहने वाले आर्थिक रूप से कमजोर मेधावी छात्रों को मिलेगा।
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वर्जन-
-कार्यकारिणी परिषद की बैठक में नए कोर्स को लेकर प्रस्ताव पास कर दिया गया है। इसे सरकार के पास भेजा जाएगा। वहां से स्वीकृति मिलते ही विश्वविद्यालय में यह कोर्स शुरू हो जाएंगे, जिनका इलाके के विद्यार्थियों को फायदा मिलेगा।
विकास बत्रा, पीआरओ, आईजीयू
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मंगलवार को कुलपति डी सुरेश की अध्यक्षता में हुई बैठक में विश्वविद्यालय कार्यकारिणी परिषद ने आने वाले सत्र में एमए राजनीतिक विज्ञान, संस्कृत, समाजशास्त्र, मनोविज्ञान, जनसंचार एवं पत्रकारिता, बी फार्मेसी, एम फार्मेसी, एमएससी बॉटनी, जंतु विज्ञान, माइक्रोबायोलोजी, फूड टेक्नालॉजी, कंप्यूटर विज्ञान और इंजीनियरिंग, इलेक्ट्रानिक्स, मेकेनिकल, सिविल, इलेक्ट्रिकल एवं प्रिंटिंग में बीटेक, एमटेक कोर्स, रेडियोलॉजी और योग में डिप्लोमा शुरू करने का प्रस्ताव पारित कर सरकार के पास भेज दिया है।
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दक्षिण हरियाणा में शिक्षा का द्वार साबित होगा मीरपुर
दक्षिण हरियाणा खासकर रेवाड़ी में विश्वविद्यालय खोलने की मांग दशकों पुरानी रही है। बंसी लाल सरकार हो या फिर अन्य सरकार तब से लेकर यहां पर विश्वविद्यालय की मांग की जाती रही। उधार की बिल्डिंग में रीजनल सेंटर भी वर्षों तक चलता रहा, कांग्रेस की तत्कालीन सरकार में विश्वविद्यालय की बनाने की घोषणा हुई और विश्वविद्यालय शुरू हो गया। लेकिन यह काम कछुआ गति से चलता रहा। आलम यह है कि आज न तो विश्वविद्यालय की आय बढ़ाने के लिए कॉलेजों को जोड़ा जा सका और न ही कोर्स बढ़ाए जा सके। लेकिन पिछले कुछ दिनों से विश्वविद्यालय के विस्तार ने थोड़ी गति जरूर पकड़ी है। मंगलवार को जिस तरह से विश्वविद्यालय की कार्यकारिणी में कोर्स बढ़ाने का प्रस्ताव पास कर सरकार के पास भेजा गया है, वह किसी मील के पत्थर से कम साबित नहीं होगा। महेंद्रगढ़ में एक केंद्रीय विश्वविद्यालय को छोड़ दिया जाए तो पलवल तक कोई भी विश्वविद्यालय नहीं है।
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दस हजार विद्यार्थियों को अब नहीं चुकानी पड़ेगी भारी-भरकम फीस
आईजीयू में इंजीनियरिंग, फार्मेसी एवं बॉटनी सहित महत्वपूर्ण विषयों में स्नातक एवं स्नातकोत्तर शुरू होने से आईजीयू में पढ़ने वाले लगभग दो हजार विद्यार्थियों के साथ रेवाड़ी के 14, फरीदाबाद के 10, पलवल के 3, मेवात के 6, गुड़गांव के 6 एवं महेंद्रगढ़ के 20 डिग्री कॉलेजों में पढ़ने वाले लगभग आठ हजार विद्यार्थियों को इसका सीधा-सीधा फायदा मिलेगा।
गौरतलब है कि अभी उक्त कॉलेज एमडीयू रोहतक से जुड़े हुए हैं। यहां पढ़ने वाले अधिकतर विद्यार्थियों को पीजी करने के लिए दिल्ली, रोहतक, कुरुक्षेत्र एवं चंडीगढ़ जाना पड़ता है। यहां पर उन्हें अधिक फीस जमा करनी पड़ती है। इसी के साथ इस क्षेत्र में सरकारी इंजीनियरिंग कॉलेज भी नहीं है, इंजीनियरिंग कोर्स शुरू होने का सबसे बड़ा फायदा ग्रामीण पृष्ठ भूमि में रहने वाले आर्थिक रूप से कमजोर मेधावी छात्रों को मिलेगा।
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वर्जन-
-कार्यकारिणी परिषद की बैठक में नए कोर्स को लेकर प्रस्ताव पास कर दिया गया है। इसे सरकार के पास भेजा जाएगा। वहां से स्वीकृति मिलते ही विश्वविद्यालय में यह कोर्स शुरू हो जाएंगे, जिनका इलाके के विद्यार्थियों को फायदा मिलेगा।
विकास बत्रा, पीआरओ, आईजीयू