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Rewari News: सहकारी समितियों को हाल.... खाद-बीज के नाम पर गोदाम बने क्लिनिक, किराये पर चढ़ाए भवन
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टपूकड़ा में सहकारी समिति में खुला क्लिनिक। संवाद
भिवाड़ी। सस्ती दरों पर खाद-बीज उपलब्ध कराने और सरकारी योजनाओं का लाभ सीधे पहुंचाने के लिए गठित सहकारी समितियां अब खुद किसानों के लिए परेशानी का सबब बन गई हैं। खैरतल-तिजारा क्षेत्र में अधिकांश सहकारी समितियां वर्षों से बंद पड़ी हैं।
एक चौंकाने वाला मामला टपूकड़ा कस्बे की सहकारी समिति का सामने आया है जहां समिति का गोदाम ही निजी क्लिनिक में तब्दील कर दिया गया है। शिकायत मिलने पर अलवर सेंट्रल कोऑपरेटिव बैंक के डिप्टी मैनेजर (डीएम) टपूकड़ा सहकारी समिति पहुंचे। वहां का नजारा देखकर वे हैरान रह गए।
समिति के प्रबंधक हारून खान ने गोदाम को टपूकड़ा सरकारी अस्पताल में कार्यरत जनरल फिजिशियन डॉ. मनीष कुमार को किराये पर दे दिया था। डॉक्टर पिछले एक महीने से इसी गोदाम में अपना निजी क्लिनिक चला रहे थे।
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जांच में पता चला कि हारून खान ने डॉ. मनीष से 20 हजार प्रतिमाह किराया तय किया था लेकिन गोदाम की मरम्मत के नाम पर 50 हजार एडवांस भी ले लिए। यह राशि समिति के रिकॉर्ड में कहीं दर्ज नहीं है और न ही उच्चाधिकारियों को इसकी जानकारी दी गई। समिति के गोदाम में टाइल्स बिछाकर उसे क्लिनिक का रूप दे दिया गया था।
डीएम ने तुरंत कार्रवाई करते हुए डॉ. मनीष कुमार को गोदाम खाली करने के निर्देश दिए हैं। प्रबंधक हारून खान के खिलाफ सस्पेंशन से लेकर अन्य अनुशासनात्मक कार्रवाई प्रस्तावित है। साथ ही 4-5 दिनों में गोदाम में खाद-बीज मंगवाकर किसानों को उपलब्ध कराने के आदेश दिए गए हैं।
टपूकड़ा ब्रांच मैनेजर अशोक कुमार ने बताया कि जांच में भवन को गलत तरीके से किराए पर देना पाया गया है। डीएम रिपोर्ट लेकर गए हैं, जल्द कार्रवाई होगी।
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2021 के बाद नहीं आई खाद, 600 बोतलें नैनो लिक्विड यूरिया अब भी पड़ी सड़ रही
प्रबंधक हारून खान का कहना है कि 2021 में दानेदार यूरिया के साथ लिक्विड नैनो यूरिया अनिवार्य रूप से दी जा रही थी जिसे किसान नहीं लेते। उनके पास अभी भी 600 से अधिक बोतलें पड़ी हैं इसलिए उसके बाद खाद नहीं मंगवाई और खाली भवन किराए पर दे दिया।
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बूढ़ी बावल सहकारी समिति भी बंद, लटका रहता है ताला
इसी क्षेत्र की बूढ़ी बावल सहकारी समिति का भी यही हाल है। वहां पहुंचने पर गेट पर ताला लटका मिला और प्रबंधक नदारद थे। अप्रैल में आए 420 कट्टे तीन दिन पहले ही खत्म हुए है। दानेदार यूरिया के साथ 96 बोतल नैनो लिक्विड यूरिया भी आई थीं जिन्हें किसानों ने नहीं लिया। प्रबंधक ने कहा कि इफ्को कंपनी से जल्द खाद मंगवाई जाएगी।
यह बोले किसान व ग्रामीण
ग्रामीण वीर सिंह ने बताया कि समिति का गेट साल में दो बार ही खुलता है- रबी और खरीफ फसल के समय। दो-तीन दिन अंगूठे लगवाकर बंद कर देते हैं। न खाद है, न बीज, न कोई सुविधा। मजबूरी में निजी दुकानों से महंगा माल लेना पड़ता है। किसान सुमेर सिंह ने कहा कि गांव की समिति के बुरे हाल हैं। सरकार की कोई योजना यहां नहीं पहुंचती। न खाद, न ऋण, न बीज।
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नो-प्रॉफिट आधार पर काम करता हूं
डॉ. मनीष कुमार ने कहा कि सरकारी अस्पताल में नो-प्रॉफिट आधार पर काम करता हूं, इसलिए ड्यूटी के बाद प्राइवेट प्रैक्टिस करता हूं। हारून खान ने समिति के अध्यक्ष व सदस्यों की सहमति का हवाला देकर 11 महीने का एग्रीमेंट करवाया। अगर बीच में खाली करवाया जाता है तो इसकी जिम्मेदारी प्रबंधक की होगी।
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एक चौंकाने वाला मामला टपूकड़ा कस्बे की सहकारी समिति का सामने आया है जहां समिति का गोदाम ही निजी क्लिनिक में तब्दील कर दिया गया है। शिकायत मिलने पर अलवर सेंट्रल कोऑपरेटिव बैंक के डिप्टी मैनेजर (डीएम) टपूकड़ा सहकारी समिति पहुंचे। वहां का नजारा देखकर वे हैरान रह गए।
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समिति के प्रबंधक हारून खान ने गोदाम को टपूकड़ा सरकारी अस्पताल में कार्यरत जनरल फिजिशियन डॉ. मनीष कुमार को किराये पर दे दिया था। डॉक्टर पिछले एक महीने से इसी गोदाम में अपना निजी क्लिनिक चला रहे थे।
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जांच में पता चला कि हारून खान ने डॉ. मनीष से 20 हजार प्रतिमाह किराया तय किया था लेकिन गोदाम की मरम्मत के नाम पर 50 हजार एडवांस भी ले लिए। यह राशि समिति के रिकॉर्ड में कहीं दर्ज नहीं है और न ही उच्चाधिकारियों को इसकी जानकारी दी गई। समिति के गोदाम में टाइल्स बिछाकर उसे क्लिनिक का रूप दे दिया गया था।
डीएम ने तुरंत कार्रवाई करते हुए डॉ. मनीष कुमार को गोदाम खाली करने के निर्देश दिए हैं। प्रबंधक हारून खान के खिलाफ सस्पेंशन से लेकर अन्य अनुशासनात्मक कार्रवाई प्रस्तावित है। साथ ही 4-5 दिनों में गोदाम में खाद-बीज मंगवाकर किसानों को उपलब्ध कराने के आदेश दिए गए हैं।
टपूकड़ा ब्रांच मैनेजर अशोक कुमार ने बताया कि जांच में भवन को गलत तरीके से किराए पर देना पाया गया है। डीएम रिपोर्ट लेकर गए हैं, जल्द कार्रवाई होगी।
2021 के बाद नहीं आई खाद, 600 बोतलें नैनो लिक्विड यूरिया अब भी पड़ी सड़ रही
प्रबंधक हारून खान का कहना है कि 2021 में दानेदार यूरिया के साथ लिक्विड नैनो यूरिया अनिवार्य रूप से दी जा रही थी जिसे किसान नहीं लेते। उनके पास अभी भी 600 से अधिक बोतलें पड़ी हैं इसलिए उसके बाद खाद नहीं मंगवाई और खाली भवन किराए पर दे दिया।
बूढ़ी बावल सहकारी समिति भी बंद, लटका रहता है ताला
इसी क्षेत्र की बूढ़ी बावल सहकारी समिति का भी यही हाल है। वहां पहुंचने पर गेट पर ताला लटका मिला और प्रबंधक नदारद थे। अप्रैल में आए 420 कट्टे तीन दिन पहले ही खत्म हुए है। दानेदार यूरिया के साथ 96 बोतल नैनो लिक्विड यूरिया भी आई थीं जिन्हें किसानों ने नहीं लिया। प्रबंधक ने कहा कि इफ्को कंपनी से जल्द खाद मंगवाई जाएगी।
यह बोले किसान व ग्रामीण
ग्रामीण वीर सिंह ने बताया कि समिति का गेट साल में दो बार ही खुलता है- रबी और खरीफ फसल के समय। दो-तीन दिन अंगूठे लगवाकर बंद कर देते हैं। न खाद है, न बीज, न कोई सुविधा। मजबूरी में निजी दुकानों से महंगा माल लेना पड़ता है। किसान सुमेर सिंह ने कहा कि गांव की समिति के बुरे हाल हैं। सरकार की कोई योजना यहां नहीं पहुंचती। न खाद, न ऋण, न बीज।
नो-प्रॉफिट आधार पर काम करता हूं
डॉ. मनीष कुमार ने कहा कि सरकारी अस्पताल में नो-प्रॉफिट आधार पर काम करता हूं, इसलिए ड्यूटी के बाद प्राइवेट प्रैक्टिस करता हूं। हारून खान ने समिति के अध्यक्ष व सदस्यों की सहमति का हवाला देकर 11 महीने का एग्रीमेंट करवाया। अगर बीच में खाली करवाया जाता है तो इसकी जिम्मेदारी प्रबंधक की होगी।