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Rewari News: बिजली चोरी के मामले में साक्ष्य नहीं होने पर कोर्ट ने वादी के हक में सुनाया फैसला

Fri, 18 Jul 2025 12:05 AM IST
रोहतक ब्यूरो संवाद न्यूज एजेंसी, रेवाड़ी
संवाद न्यूज एजेंसी, रेवाड़ी Updated Fri, 18 Jul 2025 12:05 AM IST
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In the case of electricity theft, the court ruled in favor of the plaintiff as there was no evidence
संवाद न्यूज एजेंसी
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रेवाड़ी। कोसली कोर्ट में एडिशनल सिविल जज (सीनियर डिवीजन) अशोक कुमार ने बिजली चोरी के मामले में उचित साक्ष्य नहीं प्रस्तुत करने पर वादी नांगल पठानी निवासी अमरजीत के हक में फैसला सुनाया है।
बचाव पक्ष के वकील ने तर्क दिया कि सिविल न्यायालय को इस मामले की सुनवाई और निर्णय करने का कोई अधिकार नहीं है, क्योंकि ये उनके अधिकार क्षेत्र में नहीं है।
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कोर्ट ने कहा कि पंजाब एवं हरियाणा उच्च न्यायालय की ओर से दक्षिण हरियाणा बिजली वितरण निगम लिमिटेड बनाम जसवंत उर्फ जयबीर 2017 (4) लॉ हेराल्ड 3312 (पी एंड एच) मामले में निर्धारित कानून के मद्देनजर यह तर्क सही नहीं बैठता।
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कहा कि प्रतिवादियों ने प्राकृतिक न्याय के सिद्धांत का पालन नहीं किया और सुनवाई का अवसर भी नहीं दिया। कोर्ट ने सुनवाई के दौरान कहा कि प्रतिवादियों (बिजली निगम कोसली) की ओर से मामले को साबित करने के लिए कोई साक्ष्य प्रस्तुत नहीं किया गया। इसलिए प्रतिवादियों के विरुद्ध निर्णय दिया जाता है।
वादी अमर जीत का वाद सफल होता है और उस पर लागत सहित निर्णय दिया जाता है। वादी के पक्ष में और प्रतिवादियों के विरुद्ध यह घोषणा करने हेतु आदेश पारित किया जाता है कि वे कथित रुपए की मांग करने और उसे वसूलने के हकदार नहीं हैं। वसूल की गई राशि, यदि कोई हो, इस निर्णय की प्रमाणित प्रति प्राप्त होने के एक महीने के भीतर वादी को 24 प्रतिशत ब्याज सहित वापस करने का निर्देश दिया जाता है।

नांगल पठानी निवासी अमरजीत के अधिवक्ता ने कोर्ट में बताया कि वादी एक आरटीआई कार्यकर्ता हैं। प्रतिवादियों के कार्यालय में भ्रष्टाचार को उजागर किया था। इसलिए प्रतिवादियों ने वादी के खिलाफ द्वेष रखा। प्रतिवादियों ने पहले 29 अप्रैल 2022 को पट्टे पर दिए गए परिसर का निरीक्षण किया था। जांच रिपोर्ट के अनुसार वादी को ऊर्जा चोरी करते नहीं पाया गया।

बाद में प्रतिवादियों ने 22 जुलाई 2022 को कथित रूप से पकड़ी गई ऊर्जा चोरी के आधार पर मनमाने ढंग से उन्होंने 93,520 का जुर्माना और 12 हजार का मूल्यांकन मांगा। कोर्ट में बताया कि प्रतिवादियों ने वादी को पूर्व सूचना नहीं दी। उन्होंने उसकी अनुपस्थिति में ही पट्टे पर दिए गए परिसर का निरीक्षण किया था। बचाव पक्ष की तरफ से कोर्ट में बताया गया कि उन्होंने मौके पर फोटोग्राफी और वीडियोग्राफी भी कराई थी, जिसमें बिजली चोरी करते हुए पाई गई थी। मगर वह इसे प्रूफ नहीं कर पाया।
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