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निजी अस्पतालों के मेडिकल स्टोरों के संबंध में आरटीआई
ब्यूरो /अमर उजाला
Updated Sat, 16 Apr 2016 11:40 PM IST
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निजी अस्पतालों में खुले मेडिकल स्टोर्स में ग्राहकों को दवाइयों के नाम पर लूटने का हवाला देते हुए शहर के वरिष्ठ अधिवक्ता और सामाजिक कार्यकर्ता सुनील भार्गव व अधिवक्ता प्रेमसागर ने हेल्थ एंड सर्विसेज के डायरेक्टर के पास आरटीआई लगाई है। आरटीआई में निजी अस्पताल में मेडिकल स्टोर्स की वैधता के अलावा विभिन्न मुद्दों पर सूचना मांगी गई है।
इसके अलावा प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी से मामले में हस्तक्षेप करने के लिए बार एसोसिएशन के 100 से ज्यादा वकीलों ने हस्ताक्षर कर मेडिकल स्टोरों के प्रति रोष व्यक्त कर पत्र पीएम कार्यालय भेजा है।
आरटीआई में क्या मांगी हैं जानकारी
-निजी अस्पतालों में खुले मेडिकल स्टोर्स के नियम और क्या हिदायतें हैं।
-मेडिकल स्टोर्स की दवाइयों के रेट नोटिस बोर्ड पर लगाने के बारे में क्या हिदायतें हैं।
-मेडिकल स्टोर्स किन-किन नामी कंपनियों की दवाई रख सकते हैं।
-दवाइयों के नाम के साथ दवाइयों का सॉल्ट लिखना जरूरी है या नहीं।
-टेस्टिंग लैब व अल्ट्रासाउंड के रेट निर्धारण संबंधी क्या नियमावली है।
-दवाइयां लेते समय बिल देना अनिवार्य है या नहीं।
- मेडिकल स्टोर्स पर कौन-कौन सी कंपनियों की दवाइयां खरीदने की परमीशन है।
-ड्रग इंस्पेक्टर को मेडिकल स्टोर्स पर कम से कम कितनी बार चेकिंग करने की हिदायत है।
मनमाने दाम प्रिंट कर ठगा जा रहा आम आदमी
बार एसोसिएशन के 106 वकीलों ने निजी अस्पतालों में खुले मेडिकल स्टोर्स में आम आदमी के ठगे जाने की बात पर रोष जताया है। हस्ताक्षर अभियान के दौरान वकीलों ने कहा कि निजी अस्पतालों में चल रहे मेडिकल स्टोर्स मनमाने दामों से मरीजों और उनके परिजनों का आर्थिक नुकसान कर रहे हैं। कंपनियों इनसे सांठगांठ कर मनमाने दाम प्रिंट करा आम आदमी से कई गुना रुपये ज्यादा वसूल कर रही हैं। वहीं लैब टेस्टिंग और अल्ट्रासाउंड वाले संचालक भी मनमानी रकम वसूल कर टेस्ट करते हैं।
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सोशल मीडिया पर भी मांगा सहयोग
अधिवक्ता सुनील भार्गव ने आम आदमियों से भी अपील की है कि वह जिला न्यायालय में आकर या फिर फेसबुक, व्हाट्स एप के जरिये निजी हॉस्पिटलों में खुले मेडिकल स्टोर्स के खिलाफ आवाज उठाएं और मुहिम में उनका सहयोग करें। जिससे आम आदमी ज्यादा से ज्यादा अवेयर हो और जेनिरक दवाइयों की तरफ उसका ध्यान आकर्षित हो।
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इसके अलावा प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी से मामले में हस्तक्षेप करने के लिए बार एसोसिएशन के 100 से ज्यादा वकीलों ने हस्ताक्षर कर मेडिकल स्टोरों के प्रति रोष व्यक्त कर पत्र पीएम कार्यालय भेजा है।
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आरटीआई में क्या मांगी हैं जानकारी
-निजी अस्पतालों में खुले मेडिकल स्टोर्स के नियम और क्या हिदायतें हैं।
-मेडिकल स्टोर्स की दवाइयों के रेट नोटिस बोर्ड पर लगाने के बारे में क्या हिदायतें हैं।
-मेडिकल स्टोर्स किन-किन नामी कंपनियों की दवाई रख सकते हैं।
-दवाइयों के नाम के साथ दवाइयों का सॉल्ट लिखना जरूरी है या नहीं।
-टेस्टिंग लैब व अल्ट्रासाउंड के रेट निर्धारण संबंधी क्या नियमावली है।
-दवाइयां लेते समय बिल देना अनिवार्य है या नहीं।
- मेडिकल स्टोर्स पर कौन-कौन सी कंपनियों की दवाइयां खरीदने की परमीशन है।
-ड्रग इंस्पेक्टर को मेडिकल स्टोर्स पर कम से कम कितनी बार चेकिंग करने की हिदायत है।
मनमाने दाम प्रिंट कर ठगा जा रहा आम आदमी
बार एसोसिएशन के 106 वकीलों ने निजी अस्पतालों में खुले मेडिकल स्टोर्स में आम आदमी के ठगे जाने की बात पर रोष जताया है। हस्ताक्षर अभियान के दौरान वकीलों ने कहा कि निजी अस्पतालों में चल रहे मेडिकल स्टोर्स मनमाने दामों से मरीजों और उनके परिजनों का आर्थिक नुकसान कर रहे हैं। कंपनियों इनसे सांठगांठ कर मनमाने दाम प्रिंट करा आम आदमी से कई गुना रुपये ज्यादा वसूल कर रही हैं। वहीं लैब टेस्टिंग और अल्ट्रासाउंड वाले संचालक भी मनमानी रकम वसूल कर टेस्ट करते हैं।
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सोशल मीडिया पर भी मांगा सहयोग
अधिवक्ता सुनील भार्गव ने आम आदमियों से भी अपील की है कि वह जिला न्यायालय में आकर या फिर फेसबुक, व्हाट्स एप के जरिये निजी हॉस्पिटलों में खुले मेडिकल स्टोर्स के खिलाफ आवाज उठाएं और मुहिम में उनका सहयोग करें। जिससे आम आदमी ज्यादा से ज्यादा अवेयर हो और जेनिरक दवाइयों की तरफ उसका ध्यान आकर्षित हो।