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Rewari News: नियमों को ताक पर रख चर्च और मंदिर की जारी एनडीसी होगी रद्द
Sun, 26 Feb 2023 11:02 PM IST
रोहतक ब्यूरो
संवाद न्यूज एजेंसी, रेवाड़ी
संवाद न्यूज एजेंसी, रेवाड़ी
Updated Sun, 26 Feb 2023 11:02 PM IST
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रेवाड़ी। शहर की सार्वजनिक संपत्तियों की जमीन का अदेय प्रमाणपत्र (एनडीसी) जारी कर बेचने की तैयारी भूमाफिया की धरी रह गई। नगर परिषद की ओर से दोनों संपत्तियों की एनडीसी रद्द करने की तैयारी है। जिला नगरायुक्त (डीएमसी) की इस कार्रवाई के बाद नगर परिषद के अधिकारियों से लेकर कुछ पार्षदों व सीएससी सेंटर संचालकों में हड़कंप मच गया है। नप कार्यालय में तीन माह का रिकॉर्ड खंगाला जा रहा है। वहीं जल्द ही नगर परिषद के बड़े अधिकारियों पर भी गाज गिर सकती है।
सर्कुलर रोड स्थित चर्च की 196 गज जमीन और कालका रोड स्थित मंदिर की करीब 500 गज जमीन का अदेय प्रमाणपत्र (एनडीसी) जारी कर दिया गया था। चर्च की जमीन की अनुमानित कीमत चार करोड़ और मंदिर की जमीन की कीमत करीब डेढ़ करोड़ रुपये आंकी जा रही है। मामले में डीएमसी ने जांच के आदेश दिए थे। अब जांच अधिकारी ने रिपोर्ट डीएमसी को सौंप दी है। इसमें सामने आया कि दिसंबर 2022 में एनडीसी जारी हो चुकी है। इसमें मेकर के तौर पर क्लर्क रामरतन व चेकर के तौर पर एमई नरेश यादव जिम्मेदार माने गए, इसलिए दोनों के खिलाफ कार्रवाई की गई है। रामरतन को चार दिन पहले सस्पेंड किया जा चुका है।
प्रॉपर्टी आईडी के सिस्टम में सेंधमारी
रेवाड़ी नगर परिषद में संपत्ति पहचानपत्र (प्रॉपर्टी आईडी) के सिस्टम में भूमाफिया की सेंधमारी जारी है। नियमों को ताक पर रखकर अधिकारियों ने चर्च व मंदिर तक की अदेय प्रमाणपत्र (एनडीसी) जारी किया और इनमें जिला नगरायुक्त (डीएमसी) की स्वीकृति तक नहीं ली गई। नियम के मुताबिक चर्च को संरक्षक कभी बेच नहीं सकता, लेकिन यहां पर व्यक्तिगत रूप से रजिस्ट्री भी कर दी गई है। इसके बाद उसका संपत्ति पहचानपत्र भी जारी कर दिया गया। रेवाड़ी नगर परिषद पर पिछले कई दिनों से एनडीसी के नाम पर भ्रष्टाचार के तमाम आरोप लगे हैं। लंबे समय से एनडीसी को लेकर नगर परिषद सुर्खियों में रहा है।
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यह था मामला
रेवाड़ी शहर के सर्कुलर रोड पर पुराने समय का चर्च है। यहां पर 2015 के आसपास मिलीभगत कर पांच महिलाओं के नाम पर ऑफलाइन माध्यम से रजिस्ट्री कराई गई थी। इसके बाद नगर परिषद में प्रॉपर्टी आईडी के लिए आवेदन किया गया। तत्कालीन कार्यकारी अधिकारी ने नियमों का हवाला देते हुए इसे रिजेक्ट कर दिया था। अब फरवरी में दोबारा एनडीसी के लिए ऑनलाइन आवेदन किया गया तो संबंधित अधिकारी ने इसकी एनडीसी जारी कर दी जबकि यह मामला 2016 से कोर्ट में विचाराधीन है। इसमें नगर परिषद को पार्टी बनाया गया था। वहीं रेवाड़ी शहर के कालका रोड पर एक मंदिर है। यहां भी 2015 में एक व्यक्ति ने रजिस्ट्री अपने नाम कराकर दूसरे व्यक्ति को बेचने के लिए मिलीभगत कर एनडीसी भी जारी करा ली। यह मामला भी 2015 कोर्ट में चल रहा है।
रजिस्ट्री के लिए एनडीसी जरूरी
राजस्व विभाग के नए नियमों के मुताबिक रजिस्ट्री कराने के लिए नगर परिषद की एनडीसी अर्थात नो ड्यूज सर्टिफिकेट लेना जरूरी है। नो ड्यूज सर्टिफिकेट से पहले प्रॉपर्टी की आईडी बनवाई जाती है। नो ड्यूज सर्टिफिकेट से मतलब होता है कि संपत्ति मालिक ने डेवलपमेंट चार्ज व प्रॉपर्टी टैक्स सभी नगर परिषद में जमा करा दिया है। उसका नप में कोई भी शुल्क बकाया नहीं है। एनडीसी जारी होने के बाद आसानी से प्रॉपर्टी को बेचा जा सकता है। मंदिर व चर्च में भी ऐसा ही खेल खेला गया।
जांच में दोषी पाए कर्मचारी पर कार्रवाई की गई है। किसी भी दोषी अधिकारी या कर्मचारी को बक्शा नहीं जाएगा। अभी जांच जारी है।
-सुभिता ढाबा, डीएमसी
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सर्कुलर रोड स्थित चर्च की 196 गज जमीन और कालका रोड स्थित मंदिर की करीब 500 गज जमीन का अदेय प्रमाणपत्र (एनडीसी) जारी कर दिया गया था। चर्च की जमीन की अनुमानित कीमत चार करोड़ और मंदिर की जमीन की कीमत करीब डेढ़ करोड़ रुपये आंकी जा रही है। मामले में डीएमसी ने जांच के आदेश दिए थे। अब जांच अधिकारी ने रिपोर्ट डीएमसी को सौंप दी है। इसमें सामने आया कि दिसंबर 2022 में एनडीसी जारी हो चुकी है। इसमें मेकर के तौर पर क्लर्क रामरतन व चेकर के तौर पर एमई नरेश यादव जिम्मेदार माने गए, इसलिए दोनों के खिलाफ कार्रवाई की गई है। रामरतन को चार दिन पहले सस्पेंड किया जा चुका है।
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प्रॉपर्टी आईडी के सिस्टम में सेंधमारी
रेवाड़ी नगर परिषद में संपत्ति पहचानपत्र (प्रॉपर्टी आईडी) के सिस्टम में भूमाफिया की सेंधमारी जारी है। नियमों को ताक पर रखकर अधिकारियों ने चर्च व मंदिर तक की अदेय प्रमाणपत्र (एनडीसी) जारी किया और इनमें जिला नगरायुक्त (डीएमसी) की स्वीकृति तक नहीं ली गई। नियम के मुताबिक चर्च को संरक्षक कभी बेच नहीं सकता, लेकिन यहां पर व्यक्तिगत रूप से रजिस्ट्री भी कर दी गई है। इसके बाद उसका संपत्ति पहचानपत्र भी जारी कर दिया गया। रेवाड़ी नगर परिषद पर पिछले कई दिनों से एनडीसी के नाम पर भ्रष्टाचार के तमाम आरोप लगे हैं। लंबे समय से एनडीसी को लेकर नगर परिषद सुर्खियों में रहा है।
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यह था मामला
रेवाड़ी शहर के सर्कुलर रोड पर पुराने समय का चर्च है। यहां पर 2015 के आसपास मिलीभगत कर पांच महिलाओं के नाम पर ऑफलाइन माध्यम से रजिस्ट्री कराई गई थी। इसके बाद नगर परिषद में प्रॉपर्टी आईडी के लिए आवेदन किया गया। तत्कालीन कार्यकारी अधिकारी ने नियमों का हवाला देते हुए इसे रिजेक्ट कर दिया था। अब फरवरी में दोबारा एनडीसी के लिए ऑनलाइन आवेदन किया गया तो संबंधित अधिकारी ने इसकी एनडीसी जारी कर दी जबकि यह मामला 2016 से कोर्ट में विचाराधीन है। इसमें नगर परिषद को पार्टी बनाया गया था। वहीं रेवाड़ी शहर के कालका रोड पर एक मंदिर है। यहां भी 2015 में एक व्यक्ति ने रजिस्ट्री अपने नाम कराकर दूसरे व्यक्ति को बेचने के लिए मिलीभगत कर एनडीसी भी जारी करा ली। यह मामला भी 2015 कोर्ट में चल रहा है।
रजिस्ट्री के लिए एनडीसी जरूरी
राजस्व विभाग के नए नियमों के मुताबिक रजिस्ट्री कराने के लिए नगर परिषद की एनडीसी अर्थात नो ड्यूज सर्टिफिकेट लेना जरूरी है। नो ड्यूज सर्टिफिकेट से पहले प्रॉपर्टी की आईडी बनवाई जाती है। नो ड्यूज सर्टिफिकेट से मतलब होता है कि संपत्ति मालिक ने डेवलपमेंट चार्ज व प्रॉपर्टी टैक्स सभी नगर परिषद में जमा करा दिया है। उसका नप में कोई भी शुल्क बकाया नहीं है। एनडीसी जारी होने के बाद आसानी से प्रॉपर्टी को बेचा जा सकता है। मंदिर व चर्च में भी ऐसा ही खेल खेला गया।
जांच में दोषी पाए कर्मचारी पर कार्रवाई की गई है। किसी भी दोषी अधिकारी या कर्मचारी को बक्शा नहीं जाएगा। अभी जांच जारी है।
-सुभिता ढाबा, डीएमसी