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सांस्कृतिक विरासत की रक्षा करे हिंदू समाज : महावीर दास
Mon, 09 Feb 2026 12:11 AM IST
रोहतक ब्यूरो
संवाद न्यूज एजेंसी, रेवाड़ी
संवाद न्यूज एजेंसी, रेवाड़ी
Updated Mon, 09 Feb 2026 12:11 AM IST
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आंबेडकर बस्ती में आयोजित कार्यक्रम में पहुंचे गणमान्य। स्रोत : समिति
रेवाड़ी। हिंदू समाज को अपनी सांस्कृतिक विरासत की रक्षा करते हुए आधुनिक समय की चुनौतियों का सामना करना चाहिए। ये बातें रेवाड़ी में आयोजित हिंदू सम्मेलन में महंत महावीर दास ने कहीं।
शिवा बस्ती समेत 8 स्थानों पर रविवार को हिंदू सम्मेलन आयोजित किए गए। शिव मंदिर देवलावास मंदिर परिसर, अनाज मंडी रेवाड़ी और धारूहेड़ा क्षेत्र में विभिन्न समितियों की ओर से सम्मेलन आयोजित किए गए।
श्री राम हिंदू सम्मेलन आयोजन समिति के तत्वावधान में आयोजित इन कार्यक्रमों में हजारों की संख्या में हिंदू समाज के लोगों ने भाग लिया। इसका उद्देश्य हिंदू समाज की एकता को सुदृढ़ करना तथा राष्ट्रीय स्वयंसेवक संघ (आरएसएस) की 100 वर्षों की गौरवपूर्ण यात्रा और उसके योगदान पर चर्चा करना रहा।
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मुख्य सम्मेलन की अध्यक्षता संत रामानंद महाराज ने की जबकि मुख्य अतिथि संत राम रहे। मुख्य वक्ता जिला प्रचारक प्रदीप ने आरएसएस की 100 वर्ष की यात्रा पर प्रकाश डाला।
उन्होंने बताया कि आरएसएस की स्थापना वर्ष 1925 में डॉ. केशव बलिराम हेडगेवार द्वारा की गई थी और आज यह विश्व का सबसे बड़ा स्वयंसेवी संगठन बन चुका है। उन्होंने कहा कि संघ ने समाज के हर वर्ग को जोड़कर राष्ट्र निर्माण में अहम भूमिका निभाई है।
डॉ. सुमन यादव ने आरएसएस की ओर से प्रतिपादित पांच प्रमुख परिवर्तनों सामाजिक समरसता, कुटुंब प्रबोधन, पर्यावरण संरक्षण, स्वदेशी जीवन शैली और नागरिक कर्तव्यों के प्रति जागरूकता पर विशेष जोर दिया।
उन्होंने कहा कि इन पांच परिवर्तनों को व्यवहार में उतारकर समाज को आत्मनिर्भर और सशक्त बनाया जा सकता है। उन्होंने कहा कि आरएसएस की शताब्दी यात्रा केवल एक संगठन की नहीं, बल्कि पूरे हिंदू समाज की प्रगति की कहानी है।
सम्मेलनों में अन्य वक्ताओं ने समाज के समक्ष मौजूद चुनौतियों जैसे धर्मांतरण, सांस्कृतिक आक्रमण और सामाजिक एकता के विषयों पर भी विचार रखे।
इस अवसर पर कार्यक्रम को सफल बनाने में डॉ. आत्मप्रकाश यादव, अजय मित्तल, संजय डाटा सहित सभी संयोजकों और कार्यकर्ताओं ने महत्वपूर्ण भूमिका निभाई।
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शिवा बस्ती समेत 8 स्थानों पर रविवार को हिंदू सम्मेलन आयोजित किए गए। शिव मंदिर देवलावास मंदिर परिसर, अनाज मंडी रेवाड़ी और धारूहेड़ा क्षेत्र में विभिन्न समितियों की ओर से सम्मेलन आयोजित किए गए।
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श्री राम हिंदू सम्मेलन आयोजन समिति के तत्वावधान में आयोजित इन कार्यक्रमों में हजारों की संख्या में हिंदू समाज के लोगों ने भाग लिया। इसका उद्देश्य हिंदू समाज की एकता को सुदृढ़ करना तथा राष्ट्रीय स्वयंसेवक संघ (आरएसएस) की 100 वर्षों की गौरवपूर्ण यात्रा और उसके योगदान पर चर्चा करना रहा।
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मुख्य सम्मेलन की अध्यक्षता संत रामानंद महाराज ने की जबकि मुख्य अतिथि संत राम रहे। मुख्य वक्ता जिला प्रचारक प्रदीप ने आरएसएस की 100 वर्ष की यात्रा पर प्रकाश डाला।
उन्होंने बताया कि आरएसएस की स्थापना वर्ष 1925 में डॉ. केशव बलिराम हेडगेवार द्वारा की गई थी और आज यह विश्व का सबसे बड़ा स्वयंसेवी संगठन बन चुका है। उन्होंने कहा कि संघ ने समाज के हर वर्ग को जोड़कर राष्ट्र निर्माण में अहम भूमिका निभाई है।
डॉ. सुमन यादव ने आरएसएस की ओर से प्रतिपादित पांच प्रमुख परिवर्तनों सामाजिक समरसता, कुटुंब प्रबोधन, पर्यावरण संरक्षण, स्वदेशी जीवन शैली और नागरिक कर्तव्यों के प्रति जागरूकता पर विशेष जोर दिया।
उन्होंने कहा कि इन पांच परिवर्तनों को व्यवहार में उतारकर समाज को आत्मनिर्भर और सशक्त बनाया जा सकता है। उन्होंने कहा कि आरएसएस की शताब्दी यात्रा केवल एक संगठन की नहीं, बल्कि पूरे हिंदू समाज की प्रगति की कहानी है।
सम्मेलनों में अन्य वक्ताओं ने समाज के समक्ष मौजूद चुनौतियों जैसे धर्मांतरण, सांस्कृतिक आक्रमण और सामाजिक एकता के विषयों पर भी विचार रखे।
इस अवसर पर कार्यक्रम को सफल बनाने में डॉ. आत्मप्रकाश यादव, अजय मित्तल, संजय डाटा सहित सभी संयोजकों और कार्यकर्ताओं ने महत्वपूर्ण भूमिका निभाई।