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अस्पतालों में बढ़ वायरल के मरीज
ब्यूरो /अमर उजाला
Updated Tue, 13 Sep 2016 02:04 AM IST
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अमरोहा के मरीजों को छुट्टी देने के बाद जिला अस्पताल में खाली पड़े बेड। संविदा कर्मियों की हड़ताल के चलते बंद पड़ा टीकाकरण कक्ष। अमर उजाला
- फोटो : amar ujala
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मौसम में आए बदलाव से वायरल की मरीजों की संख्या बढ़ा दी है। नागरिक अस्पताल की प्रतिदिन की 1300 की ओपीडी में से आधे से अधिक मरीज वायरल से पीड़ित हैं। अस्पताल में भीड़ का आलम यह है कि मरीजों को पर्ची कटवाने से डॉक्टर को दिखाने तक करीब दो घंटे से अधिक समय लग जाता है।
बरसात के बाद प्रतिवर्ष मच्छरों से होने वाली संक्रमित बीमारियों से लोगों को जूझना पड़ता है। अक्टूबर माह तक यह मौसम का प्रभाव चलता है, जिससे मौसम जनित बीमारियां बढ़ जाती हैं। अस्पताल में डेंगू, मलेरिया के अतिरिक्त वायरल और चिकनगुनिया के मरीज भी पहुंच रहे हैं। उल्लेखनीय है अभी तक जिले में 11 लोगों में डेंगू की पुष्टि हो चुकी है। इनमें से एक में डेंगू पॉजीटिव पाया गया। वहीं मलेरिया के सात केस सामने आए।
दवाइयों की खपस 40 फीसदी बढ़ी
बरसात के बाद होने वाली बीमारियों के लिए प्रतिवर्ष स्वास्थ्य विभाग की ओर तैयारी की जाती है। लेकिन करीब हर घर मेें दस्तक दे चुके वायरल फीवर के चलते इस बार स्वास्थ्य विभाग को करीब चालीस फीसदी अतिरिक्त दवाइयों की खरीद करनी पड़ी है। डॉक्टरों का कहना है कि जिस तरह से ओपीडी में भीड़ बढ़ती जा रही है उसे देखकर लगता है कि इस बार यह आंकड़ा और बढ़ सकता है।
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इन दवाइयों की डिमांड है ज्यादा
विभिन्न प्रकार के बुखारों में काम आने वाली सिट्राजीन, पीसीएम, ओफलोक्स, अजीथ्रोमाइसीन, रेनटेक एवं डाइक्लोफलेक्स जैसी दवाइयों की खपत बहुत ज्यादा है। इसी के साथ बीते साल जहां पर करीब 1500 आईबी फ्लूड से काम चल जाता था,इस सीजन में इसकी डिमांड करीब ढाई हजार पहुुंच तक पहुंच गई है।
गंदगी एवं सीवर ओवरफ्लो बड़ा कारण
चिकित्सा क्षेत्र से जुड़े जानकारों का कहना है कि शहर में चारों ओर फैले कूड़े एवं सीवर ओवर फ्लो के चलते वायरल बुखार के मरीजों की संख्या में बढ़ोतरी हुई है। विशेषज्ञों ने बताया कि गंदगी में ही कुछ बुखारों के वायरस की ब्रीड तैयार होती है,लेकिन प्रशासन इस बात से बेखबर है। उन्होंने बताया कि शहर के सैकड़ों डॉक्टरों के पास आने वाले मरीजों में साठ फीसदी मरीज बुखार से पीड़ित हैं।
इन लक्षणों के साथ पहुंच रहे है मरीज
वायरल से पीड़ित मरीज को तेज बुखार, सरदर्द, जोड़ों का दर्द जैसे लक्षण होते हैं। इसी के साथ मलेरिया से पीड़ित को सर्दी के साथ तेज बुखार होने के साथ बदन दर्द जैसे अनेक लक्षण पाए जाते हैं। मलेरिया में अधिक ताप होने के साथ बुखार दिमाग में चढ़ जाता है। इन लक्षणों के साथ मरीज चिकित्सकों के पास पहुंच रहे हैं।
घबराने की नहीं जरूरत
चिकित्सकों का कहना है कि वायरल फीवर में 95 फीसदी पीड़ित स्वयं ही तीन से छह दिन के अंदर ठीक हो जाते हैं। ऐसे में मरीज घबराने की बजाय पानी अधिक से अधिक लेने के साथ ताजे फल एवं नारियल पानी का सेवन करे तांकि शरीर में पानी की कमी को पूरा किया जा सके।
प्रतिदिन 300 लोगों की हो रही है खून जांच
शहर के नागरिक अस्पताल में प्रतिदिन 300 से अधिक लोगों की खून जांच की जा रही है। जिनमें से अस्सी फीसदी बुखार की जांच हैं। खून की जांच करवाने के लिए लोगों की लैब के बाहर लंबी लाइनें लगी हुई हैं। जांच के लिए लोगों को दो-दो दिन की तक का इंतजार करना पड़ रहा है। इन जांच में भी अस्सी फीसदी मरीज वायरल से पीड़ित आ रहे हैं। संभावित लक्षणों को देखते हुए करीब सत्तर मरीजों की मलेरिया की जांच की जा रही है। हालांकि इनमेें से औसतन एक फीसदी ही मलेरिया की पॉजीटिव रिपोर्ट आ रही है। नागरिक अस्पताल में अभी तक सात मलेरिया के केस सामने आ चुके हैं। जिनका उपचार नागरिक अस्पताल में चल रहा है।
जिले में नहीं है खतरे वाला मलेरिया
मलेरिया दो तरह का होता है,जिनमें एक पीवी अर्थात साधारण दूसरा पीएफ(दिमागी बुखार) मुख्यत है। पीएफ के केस में रोगी के मरने की संभावना ज्यादा होती है। लेकिन गनीमत यह है कि 2009 से जिले में दिमागी बुखार के केस नहीं आ रहे हैं।
अभी तक 350 घरों में मलेरिया की दवाई का छिडक़ाव
जिले में मलेरिया के सात पीवी केस पाए जाने के बाद 350 घरों मेें दवाई का छिड़काव किया जा चुका है। डॉक्टरों के अनुसार यदि किसी एक व्यक्ति को पीवी मलेरिया पाया जाता है तो उसके पास वाले पचास घरों में दवाई का छिड़काव करना जरूरी होता है। ताकि इस मच्छर के दीवार पर बैठते ही यह मर जाए। यदि मरीज में पीएफ मलेरिया पाया जाता है तो पांच हजार की आबादी में दवाई का छिड़काव करना जरूरी होता है।
डेंगू के ग्यारह में से एक केस कंफर्म
रेवाड़ी के नागरिक अस्पताल में प्रतिदिन 1300 से अधिक की ओपीडी होती है। जिनमें आधे से अधिक मरीज बुखार से पीड़ित होते हैं। अस्पताल में प्रतिदिन अभी तक डेंगू के ग्यारह केस सामने आ चुके हैं। जिनमें से एक पॉजीटिव केस पाया गया है। डेंगू में भी एक कार्ड टेस्ट एवं कंफर्म के लिए एलाइजा टेस्ट किया जाता है।
जल भराव के लिए बीस को नोटिस
स्वास्थ्य विभाग की ओर से मलेरिया एवं डेंगू के साथ वायरल से जिले के लोगों को बचाने के लिए जल भराव के लिए बीस लोगों को नोटिस दिया जा चुका है। इसके अतिरिक्त पंफलेट बांटना, जिले के सभी स्कूलों में जागरूकता अभियान चलाना, जिले की पांच सीएचसी, ग्यारह पीएचसी एवं 111 सब सेंटर में जल भराव के स्थानों पर टेमीफोर्स जैसी दवाईयों उपलब्ध कराई हुई हैँ।
मच्छरों के लिए नगर परिषद एवं पब्लिक हेल्थ जिम्मेदार
शरह में चारों ओर फैले कूडे़ एवं गंदे पानी के कारण मच्छर पैदा हो रहे हैं। इन मच्छरों की वजह से अधिकांश वायरल के वायरस इस गंदगी में एक्टिव रहते हैं। शहर में फैले कूड़े के लिए नगर परिषद तो वहीं गदें पानी के लिए पब्लिक हेल्थ जिम्मेदार है। यदि शहर से गंदगी को दूर कर दिया जाए तो मलेरिया एवं वायरल जैसे बुखारों पर आसानी से काबू पाया जा सकता है।
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वर्जन
इस बार वायरल बुखार के मरीज अस्पताल में ज्यादा पहुंच रहे हैं। इसके लिए सबसे ज्यादा शहर में फैला कूड़ा एवं सीवरेज ओवर फ्लो का गंदा पानी है। यदि शहर से खूला पानी को खत्म कर दिया जाए तो बुखार पर कंट्रोल किया जा सकता है। स्वास्थय विभाग की ओर से जागरूकता कार्यक्रम के साथ पूरे इंतजाम किए गए हैं। यदि किसी व्यक्ति को इस तरह के कोई लक्षण दिखाई देंते हैं तो वह तुंरत शहर के नागरिक अस्पताल से संपर्क करे।
-डॉ. जेके सैनी, नोडलत अधिकारी डेंगू एवं मलेरिया
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ओपीडी में आने वाले अधिकतर मरीज बुखार से पीड़ित हैं। इनमें से अधिकतर वायरल से पीड़ित हैं। मरीजों को चाहिए कि वह स्वयं का डॉक्टर बनने की बजाय लक्षण दिखाई देने पर तुरंत क्वालीफाइड डॉक्टर की सलाह लें। ऑडोमास लगाने के साथ ही पूरे शरीर को कपड़े से ढकना भी जरूरी है ताकि मच्छर के डंक से बचा जा सके।
डॉ रणवीर यादव, फिजीशियन नागरिक अस्पताल
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अस्पत ाल में आने वाली लगभग साठ फीसदी ओपीडी बुखार से पीड़ित मरीजों की हैं। शहर में चारों ओर फैली गंदगी एवं ओवर फ्लो सीवर से पैदा होने वाले मच्छरों से लोग चपेट में आ रहे हैं, यदि शहर में सफाई व्यव्स्था पर ध्यान दिया जाए तो काफी हद तक बुखार पर कंट्रोल किया जा सकता है।
-डॉ शिव रतन यादव, प्रेसिडेंट आईएमए रेवाड़ी।
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बरसात के बाद प्रतिवर्ष मच्छरों से होने वाली संक्रमित बीमारियों से लोगों को जूझना पड़ता है। अक्टूबर माह तक यह मौसम का प्रभाव चलता है, जिससे मौसम जनित बीमारियां बढ़ जाती हैं। अस्पताल में डेंगू, मलेरिया के अतिरिक्त वायरल और चिकनगुनिया के मरीज भी पहुंच रहे हैं। उल्लेखनीय है अभी तक जिले में 11 लोगों में डेंगू की पुष्टि हो चुकी है। इनमें से एक में डेंगू पॉजीटिव पाया गया। वहीं मलेरिया के सात केस सामने आए।
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दवाइयों की खपस 40 फीसदी बढ़ी
बरसात के बाद होने वाली बीमारियों के लिए प्रतिवर्ष स्वास्थ्य विभाग की ओर तैयारी की जाती है। लेकिन करीब हर घर मेें दस्तक दे चुके वायरल फीवर के चलते इस बार स्वास्थ्य विभाग को करीब चालीस फीसदी अतिरिक्त दवाइयों की खरीद करनी पड़ी है। डॉक्टरों का कहना है कि जिस तरह से ओपीडी में भीड़ बढ़ती जा रही है उसे देखकर लगता है कि इस बार यह आंकड़ा और बढ़ सकता है।
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इन दवाइयों की डिमांड है ज्यादा
विभिन्न प्रकार के बुखारों में काम आने वाली सिट्राजीन, पीसीएम, ओफलोक्स, अजीथ्रोमाइसीन, रेनटेक एवं डाइक्लोफलेक्स जैसी दवाइयों की खपत बहुत ज्यादा है। इसी के साथ बीते साल जहां पर करीब 1500 आईबी फ्लूड से काम चल जाता था,इस सीजन में इसकी डिमांड करीब ढाई हजार पहुुंच तक पहुंच गई है।
गंदगी एवं सीवर ओवरफ्लो बड़ा कारण
चिकित्सा क्षेत्र से जुड़े जानकारों का कहना है कि शहर में चारों ओर फैले कूड़े एवं सीवर ओवर फ्लो के चलते वायरल बुखार के मरीजों की संख्या में बढ़ोतरी हुई है। विशेषज्ञों ने बताया कि गंदगी में ही कुछ बुखारों के वायरस की ब्रीड तैयार होती है,लेकिन प्रशासन इस बात से बेखबर है। उन्होंने बताया कि शहर के सैकड़ों डॉक्टरों के पास आने वाले मरीजों में साठ फीसदी मरीज बुखार से पीड़ित हैं।
इन लक्षणों के साथ पहुंच रहे है मरीज
वायरल से पीड़ित मरीज को तेज बुखार, सरदर्द, जोड़ों का दर्द जैसे लक्षण होते हैं। इसी के साथ मलेरिया से पीड़ित को सर्दी के साथ तेज बुखार होने के साथ बदन दर्द जैसे अनेक लक्षण पाए जाते हैं। मलेरिया में अधिक ताप होने के साथ बुखार दिमाग में चढ़ जाता है। इन लक्षणों के साथ मरीज चिकित्सकों के पास पहुंच रहे हैं।
घबराने की नहीं जरूरत
चिकित्सकों का कहना है कि वायरल फीवर में 95 फीसदी पीड़ित स्वयं ही तीन से छह दिन के अंदर ठीक हो जाते हैं। ऐसे में मरीज घबराने की बजाय पानी अधिक से अधिक लेने के साथ ताजे फल एवं नारियल पानी का सेवन करे तांकि शरीर में पानी की कमी को पूरा किया जा सके।
प्रतिदिन 300 लोगों की हो रही है खून जांच
शहर के नागरिक अस्पताल में प्रतिदिन 300 से अधिक लोगों की खून जांच की जा रही है। जिनमें से अस्सी फीसदी बुखार की जांच हैं। खून की जांच करवाने के लिए लोगों की लैब के बाहर लंबी लाइनें लगी हुई हैं। जांच के लिए लोगों को दो-दो दिन की तक का इंतजार करना पड़ रहा है। इन जांच में भी अस्सी फीसदी मरीज वायरल से पीड़ित आ रहे हैं। संभावित लक्षणों को देखते हुए करीब सत्तर मरीजों की मलेरिया की जांच की जा रही है। हालांकि इनमेें से औसतन एक फीसदी ही मलेरिया की पॉजीटिव रिपोर्ट आ रही है। नागरिक अस्पताल में अभी तक सात मलेरिया के केस सामने आ चुके हैं। जिनका उपचार नागरिक अस्पताल में चल रहा है।
जिले में नहीं है खतरे वाला मलेरिया
मलेरिया दो तरह का होता है,जिनमें एक पीवी अर्थात साधारण दूसरा पीएफ(दिमागी बुखार) मुख्यत है। पीएफ के केस में रोगी के मरने की संभावना ज्यादा होती है। लेकिन गनीमत यह है कि 2009 से जिले में दिमागी बुखार के केस नहीं आ रहे हैं।
अभी तक 350 घरों में मलेरिया की दवाई का छिडक़ाव
जिले में मलेरिया के सात पीवी केस पाए जाने के बाद 350 घरों मेें दवाई का छिड़काव किया जा चुका है। डॉक्टरों के अनुसार यदि किसी एक व्यक्ति को पीवी मलेरिया पाया जाता है तो उसके पास वाले पचास घरों में दवाई का छिड़काव करना जरूरी होता है। ताकि इस मच्छर के दीवार पर बैठते ही यह मर जाए। यदि मरीज में पीएफ मलेरिया पाया जाता है तो पांच हजार की आबादी में दवाई का छिड़काव करना जरूरी होता है।
डेंगू के ग्यारह में से एक केस कंफर्म
रेवाड़ी के नागरिक अस्पताल में प्रतिदिन 1300 से अधिक की ओपीडी होती है। जिनमें आधे से अधिक मरीज बुखार से पीड़ित होते हैं। अस्पताल में प्रतिदिन अभी तक डेंगू के ग्यारह केस सामने आ चुके हैं। जिनमें से एक पॉजीटिव केस पाया गया है। डेंगू में भी एक कार्ड टेस्ट एवं कंफर्म के लिए एलाइजा टेस्ट किया जाता है।
जल भराव के लिए बीस को नोटिस
स्वास्थ्य विभाग की ओर से मलेरिया एवं डेंगू के साथ वायरल से जिले के लोगों को बचाने के लिए जल भराव के लिए बीस लोगों को नोटिस दिया जा चुका है। इसके अतिरिक्त पंफलेट बांटना, जिले के सभी स्कूलों में जागरूकता अभियान चलाना, जिले की पांच सीएचसी, ग्यारह पीएचसी एवं 111 सब सेंटर में जल भराव के स्थानों पर टेमीफोर्स जैसी दवाईयों उपलब्ध कराई हुई हैँ।
मच्छरों के लिए नगर परिषद एवं पब्लिक हेल्थ जिम्मेदार
शरह में चारों ओर फैले कूडे़ एवं गंदे पानी के कारण मच्छर पैदा हो रहे हैं। इन मच्छरों की वजह से अधिकांश वायरल के वायरस इस गंदगी में एक्टिव रहते हैं। शहर में फैले कूड़े के लिए नगर परिषद तो वहीं गदें पानी के लिए पब्लिक हेल्थ जिम्मेदार है। यदि शहर से गंदगी को दूर कर दिया जाए तो मलेरिया एवं वायरल जैसे बुखारों पर आसानी से काबू पाया जा सकता है।
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वर्जन
इस बार वायरल बुखार के मरीज अस्पताल में ज्यादा पहुंच रहे हैं। इसके लिए सबसे ज्यादा शहर में फैला कूड़ा एवं सीवरेज ओवर फ्लो का गंदा पानी है। यदि शहर से खूला पानी को खत्म कर दिया जाए तो बुखार पर कंट्रोल किया जा सकता है। स्वास्थय विभाग की ओर से जागरूकता कार्यक्रम के साथ पूरे इंतजाम किए गए हैं। यदि किसी व्यक्ति को इस तरह के कोई लक्षण दिखाई देंते हैं तो वह तुंरत शहर के नागरिक अस्पताल से संपर्क करे।
-डॉ. जेके सैनी, नोडलत अधिकारी डेंगू एवं मलेरिया
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ओपीडी में आने वाले अधिकतर मरीज बुखार से पीड़ित हैं। इनमें से अधिकतर वायरल से पीड़ित हैं। मरीजों को चाहिए कि वह स्वयं का डॉक्टर बनने की बजाय लक्षण दिखाई देने पर तुरंत क्वालीफाइड डॉक्टर की सलाह लें। ऑडोमास लगाने के साथ ही पूरे शरीर को कपड़े से ढकना भी जरूरी है ताकि मच्छर के डंक से बचा जा सके।
डॉ रणवीर यादव, फिजीशियन नागरिक अस्पताल
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अस्पत ाल में आने वाली लगभग साठ फीसदी ओपीडी बुखार से पीड़ित मरीजों की हैं। शहर में चारों ओर फैली गंदगी एवं ओवर फ्लो सीवर से पैदा होने वाले मच्छरों से लोग चपेट में आ रहे हैं, यदि शहर में सफाई व्यव्स्था पर ध्यान दिया जाए तो काफी हद तक बुखार पर कंट्रोल किया जा सकता है।
-डॉ शिव रतन यादव, प्रेसिडेंट आईएमए रेवाड़ी।