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Rewari News: कूड़े के साथ जल रहे ग्रैप 3 के नियम
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भाड़ावास फाटक के पास जल रहा कूड़ा। संवाद
रेवाड़ी। जिले में प्रदूषण नियंत्रण के लिए लागू ग्रैप-3 के नियम कूड़े के साथ जलाए जा रहे हैं। बुधवार को एक्यूआई 281 दर्ज किया गया जो पिछले कई दिनों से 300 के ऊपर बना हुआ था। हालांकि अभी भी स्थिति सामान्य नहीं है क्योंकि शहर में कई स्थानों पर न निर्माण सामग्री को ढक कर रखा जा रहा और न खुले में कूड़ा जलाने पर रोक लग रही है।
इससे न केवल वायु प्रदूषण बढ़ रहा है बल्कि स्थानीय लोगों की आंखों और गले में जलन की शिकायतें भी सामने आ रही हैं। यदि नगर परिषद और प्रदूषण नियंत्रण विभाग ने सख्ती नहीं दिखाई तो आने वाले दिनों में फिर से हवा का स्तर खराब हो सकता है।
मौसम विभाग के अनुसार 18 नवंबर तक मौसम आमतौर पर शुष्क रहने की संभावना है। इस दौरान उत्तर और उत्तर-पश्चिमी हवाएं हल्की से मध्यम गति से चलेंगी जिससे सुबह और शाम को हल्की ठंड महसूस होगी। दिन के तापमान में हल्की बढ़ोतरी और रात के तापमान में गिरावट की संभावना है। आने वाले दिनों में अधिकतम तापमान 25 से 29 डिग्री सेल्सियस और न्यूनतम तापमान 6 से 10 डिग्री सेल्सियस के बीच रहने का अनुमान है।
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इन बातों का रखना होगा ध्यान
ग्रैप के तीसरे चरण के तहत सड़कों की मशीनों और वैक्यूम आधारित सफाई, रोजाना पानी का छिड़काव और धूल नियंत्रण सामग्री का प्रयोग करने के साथ-साथ एकत्रित धूल को निर्धारित स्थलों पर निस्तारित करना होगा। निर्माण कार्यों में केवल गैर-प्रदूषणकारी गतिविधियां प्लंबिंग, इलेक्ट्रिकल, कारपेंट्री और इंटीरियर फिनिशिंग की अनुमति दी गई है जबकि स्टोन क्रशर और माइनिंग गतिविधियों पर पूर्ण प्रतिबंध रहेगा। इसके अलावा बीएस-3 पेट्रोल और बीएस-4 डीजल वाहनों के संचालन पर गुरुग्राम, फरीदाबाद, गाजियाबाद, गौतमबुद्ध नगर और दिल्ली में रोक लगाई गई है।
ध्यान रखने की जरूरत, नहीं तो हो सकती है परेशानी
हवा में पीएम-2.5 और पीएम-10 कणों की मात्रा अत्यधिक बढ़ जाने से श्वसन संबंधी बीमारियां, खांसी-जुकाम, गले में जलन, आंखों में खुजली व जलन और त्वचा रोग तेजी से बढ़ सकते हैं। बच्चों, बुजुर्गों और हृदय रोगियों के लिए यह स्थिति और भी खतरनाक है। फिजिशियन डॉ. मनीष ने लोगों को सलाह दी है कि वे सुबह-शाम की सैर से बचें, मास्क का प्रयोग करें, घरों में पौधे लगाएं और पर्याप्त मात्रा में पानी पिएं। प्रदूषण के कण फेफड़ों में गहराई तक पहुंचकर सांस की बीमारियों को बढ़ा सकते हैं।
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विभागों को प्रदूषण रोकने के निर्देश जारी
डीसी अभिषेक मीणा ने प्रदूषण नियंत्रण बोर्ड, शहरी निकायों, एचएसआईआईडीसी सहित अन्य संबंधित विभागाध्यक्षों को कड़े निर्देश दिए हैं कि वे जिले में बढ़ते प्रदूषण स्तर को नियंत्रित करने के लिए सख्त कदम उठाएं।
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इससे न केवल वायु प्रदूषण बढ़ रहा है बल्कि स्थानीय लोगों की आंखों और गले में जलन की शिकायतें भी सामने आ रही हैं। यदि नगर परिषद और प्रदूषण नियंत्रण विभाग ने सख्ती नहीं दिखाई तो आने वाले दिनों में फिर से हवा का स्तर खराब हो सकता है।
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मौसम विभाग के अनुसार 18 नवंबर तक मौसम आमतौर पर शुष्क रहने की संभावना है। इस दौरान उत्तर और उत्तर-पश्चिमी हवाएं हल्की से मध्यम गति से चलेंगी जिससे सुबह और शाम को हल्की ठंड महसूस होगी। दिन के तापमान में हल्की बढ़ोतरी और रात के तापमान में गिरावट की संभावना है। आने वाले दिनों में अधिकतम तापमान 25 से 29 डिग्री सेल्सियस और न्यूनतम तापमान 6 से 10 डिग्री सेल्सियस के बीच रहने का अनुमान है।
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इन बातों का रखना होगा ध्यान
ग्रैप के तीसरे चरण के तहत सड़कों की मशीनों और वैक्यूम आधारित सफाई, रोजाना पानी का छिड़काव और धूल नियंत्रण सामग्री का प्रयोग करने के साथ-साथ एकत्रित धूल को निर्धारित स्थलों पर निस्तारित करना होगा। निर्माण कार्यों में केवल गैर-प्रदूषणकारी गतिविधियां प्लंबिंग, इलेक्ट्रिकल, कारपेंट्री और इंटीरियर फिनिशिंग की अनुमति दी गई है जबकि स्टोन क्रशर और माइनिंग गतिविधियों पर पूर्ण प्रतिबंध रहेगा। इसके अलावा बीएस-3 पेट्रोल और बीएस-4 डीजल वाहनों के संचालन पर गुरुग्राम, फरीदाबाद, गाजियाबाद, गौतमबुद्ध नगर और दिल्ली में रोक लगाई गई है।
ध्यान रखने की जरूरत, नहीं तो हो सकती है परेशानी
हवा में पीएम-2.5 और पीएम-10 कणों की मात्रा अत्यधिक बढ़ जाने से श्वसन संबंधी बीमारियां, खांसी-जुकाम, गले में जलन, आंखों में खुजली व जलन और त्वचा रोग तेजी से बढ़ सकते हैं। बच्चों, बुजुर्गों और हृदय रोगियों के लिए यह स्थिति और भी खतरनाक है। फिजिशियन डॉ. मनीष ने लोगों को सलाह दी है कि वे सुबह-शाम की सैर से बचें, मास्क का प्रयोग करें, घरों में पौधे लगाएं और पर्याप्त मात्रा में पानी पिएं। प्रदूषण के कण फेफड़ों में गहराई तक पहुंचकर सांस की बीमारियों को बढ़ा सकते हैं।
विभागों को प्रदूषण रोकने के निर्देश जारी
डीसी अभिषेक मीणा ने प्रदूषण नियंत्रण बोर्ड, शहरी निकायों, एचएसआईआईडीसी सहित अन्य संबंधित विभागाध्यक्षों को कड़े निर्देश दिए हैं कि वे जिले में बढ़ते प्रदूषण स्तर को नियंत्रित करने के लिए सख्त कदम उठाएं।

भाड़ावास फाटक के पास जल रहा कूड़ा। संवाद