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Rewari News: पूनावाला फाइनेंस कंपनी पर 50 हजार का जुर्माना लगाया

Fri, 08 Dec 2023 11:45 PM IST
रोहतक ब्यूरो संवाद न्यूज एजेंसी, रेवाड़ी
संवाद न्यूज एजेंसी, रेवाड़ी Updated Fri, 08 Dec 2023 11:45 PM IST
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Fine of Rs 50 thousand imposed on Poonawala Finance Company
रेवाड़ी। जिला उपभोक्ता आयोग ने पूनावाला फाइनेंस कंपनी पर सिबिल स्कोर (लोन लेने की योग्यता) खराब करने के आरोप में 50 हजार का जुर्माना लगाया है। साथ ही फाइनेंस कंपनी को वादी को अलग से 11 हजार रुपये वाद खर्च के भी देने का आदेश दिए हैं।
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गांव कालूवास निवासी नरेश कुमार ने पूनावाला फिनकॉर्प लिमिटेड (जिसे मैग्मा फिनकॉर्प लिमिटेड के नाम से भी जाना जाता है) से एक कार फाइनेंस करवाई थी। कार की कुल कीमत 29 लाख 99 हजार रुपये थी, लेकिन नरेश कुमार ने 15 लाख रुपये का लोन पूनावाला कंपनी से लिया था, जिसे समान मासिक किस्त (ईएमआई) के रूप में अदा किया जाना था। यह लोन राशि 24 अप्रैल 2019 को ली गई थी। जिसकी सभी किस्त समय पर शिकायतकर्ता द्वारा अदा की जा रही थी, लेकिन जब 20 मई 2022 को शिकायतकर्ता ने अपना लोन बैंक फाइनेंस कंपनी से क्लियर करना चाहा तो फाइनेंस कंपनी ने 75200 की राशि लेकर उनके लोन को क्लियर बताते हुए अनापत्ति प्रमाणपत्र भी जारी कर दिया। अनापत्ति प्रमाणपत्र 4 जून 2022 को जारी किया गया था। इसके बाद शिकायतकर्ता ने अन्य लोन लेने के लिए एक्सिस बैंक में आवेदन किया तो उसका लोन यह कहते हुए रिजेक्ट कर दिया गया कि उसका सिबिल स्कोर खराब है, क्योंकि उसने पिछले बैंक में पूरा लोन अदा न कर समझौता किया हुआ है। इसके बाद जब नरेश कुमार ने पूनावाला कंपनी में जाकर पूछताछ की तो उसे बताया गया कि उसकी एक किस्त बकाया है, जिस कारण उसका लोन के आगे सिबिल में समझौता लिखा गया है। इतना ही नहीं पूनावाला कंपनी ने उसे 58774 रुपये 16 पैसे देने के बाद उसकी सिबिल स्कोर को ठीक करने का आश्वासन दिया। इसके बाद नरेश ने मांगी गई राशि भी पूनावाला कंपनी को दे दी, लेकिन उसे अन्य काम के लिए लोन प्राप्त नहीं हो सका।
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कई बार कंपनी के लगाए चक्कर

कई बार पूनावाला कंपनी के चक्कर लगाने के बाद जब कोई समाधान नहीं हुआ तो नरेश कुमार ने अपने अधिवक्ता अश्वनी तिवारी के माध्यम से जिला उपभोक्ता आयोग में शिकायत दायर की। इस शिकायत का निपटारा करते हुए जिला उपभोक्ता आयोग के अध्यक्ष संजय कुमार खंडूजा एवं सदस्य राजेंद्र प्रसाद ने अपने निर्णय में यह स्पष्ट किया कि शिकायतकर्ता को कंपनी की ओर से जानबूझकर परेशान किया गया है, क्योंकि उन्होंने सभी अदायगी कर दी थी, लेकिन इसके बावजूद भी उसे दोबारा एक किस्त ली गई है, जो कि सरासर गलत है।
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ब्याज सहित देनी होगी राशि

शिकायतकर्ता के साक्ष्य पेश करने के बाद जिला उपभोक्ता आयोग ने शिकायतकर्ता द्वारा जमा कराई गई आखिरी बकाया राशि 58675 रुपये 9 प्रतिशत ब्याज सहित देने के आदेश दिए। साथ ही 50 हजार रुपये का जुर्माना भी लगाया, जबकि वाद खर्च के रूप में 11000 रुपये अलग से दिए जाने के आदेश दिए हैं।
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