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जब तक सरकार तीनों कृषि कानून वापस नहीं लेगी, किसान डटे रहेंगे : राकेश टिकैत

Thu, 20 May 2021 11:40 PM IST
Rohtak Bureau रोहतक ब्यूरो
Updated Thu, 20 May 2021 11:40 PM IST
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रेवाड़ी। शाहजहांपुर-खेड़ा बॉर्डर पर किसानों का धरना लगातार 158वें दिन भी जारी रहा। वीरवार को शाहजहांपुर-खेड़ा बॉर्डर पर किसान नेता राकेश टिकैत और युद्धवीर सिंह पहुंचे। जहां किसानों ने उनका जोरदार स्वागत किया।
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राकेश टिकैत ने किसानों का हौसला बढ़ाते हुए कहा कि केंद्र सरकार की सरकारी मशीनरी और राष्ट्रीय स्वयंसेवक संघ के फासीवादी प्रचार तंत्र के द्वारा लगातार गलत खबरें और अफवाहें फैलाते हुए दुष्प्रचार किया जाता रहा है कि किसान-आंदोलन कमजोर हो रहा है, खत्म हो रहा है, मोर्चे टूट रहे हैं। परंतु भाजपा-आरएसएस सरकार सुन लें और याद कर लें कि जब तक केंद्र सरकार संयुक्त किसान मोर्चा की मांग के अनुसार तीनों कृषि कानून वापस नहीं लेगी और एमएसपी पर कानून नहीं बनाएगी तब तक न तो किसानों के मोर्चे हटेंगे, न मोर्चे टूटेंगे।
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किसानों से अपील करते हुए कहा कि अब फसल कटाई का दौर लगभग खत्म हो गया है तो सभी किसान साथी पहले जैसे अपने-अपने नजदीक के मोर्चो पर कोरोना प्रोटोकाल का पालन करते हुए बारी-बारी से आते-जाते रहें। उन्होंने कहा कि मोर्चों पर सभी लोग शारीरिक दूरी के मापदंडों का भी पालन करें व मास्क जरूर लगाएं। सामाजिक दूरी नहीं बल्कि शारीरिक दूरी और सामाजिक एकजुटता के नारे के साथ एक-दूसरे की और सभी देशवासियों की मदद करते हुए हमें किसान आंदोलन को और मजबूत बनाना है।
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किसान नेता युद्धवीर सिंह ने व्यापक किसान-मजदूर एकता का संदेश देते हुए 26 मई को काला दिवस मनाने के आह्वान को व्यापक रूप से सफल बनाने की अपील की है। उन्होंने कहा कि सरकार की जनविरोधी नीतियों से छात्र, युवा, महिला, किसान, मजदूर, कर्मचारी सहित जनता का हर हिस्सा त्राहिमाम त्राहिमाम कर रहा है। कहा कि 26 मई को ही दिल्ली के चारों ओर जारी किसानों के ऐतिहासिक आंदोलन के भी छह महीने पूरे हो रहे हैं। इसलिए इस दिन नरेंद्र मोदी सरकार का पुतला दहन होगा। मजदूर साथी और आम जनता अपने-अपने घरों, वाहनों व गांव की चौपालों पर काला झंडा लगाते काला दिवस मनाएंगे।

समूह चर्चा करते हुए किसानों ने कहा कि अब तक किसानों ने शांतिपूर्ण तरीके से अपनी मांगों को रखा है। सरकार ने किसानों को बदनाम करने की तमाम कोशिशें कीं परंतु असफल रही। देश में किसी फसल या राज्य में उत्पादन या निर्यात बढ़ने का पूरा श्रेय सरकार लेती है। किसानों के कल्याण का दिखावा करने वाली सरकार आज दिल्ली की सीमाओं पर हो रहे हर मानवीय और अन्य नुकसान की भी जिम्मेदारी ले। किसान आंदोलन में अब तक 470 से ज्यादा किसान शहीद हो गए हैं। अनेक आंदोलनकारियों को अपनी नौकरी, पढ़ाई व काम छोड़ने पड़े हैं। हिसार में किसानों पर लाठीचार्ज के बाद गुस्साए किसानों ने मय्यड़ टोल प्लाजा, जिला हिसार पर बरवाला विधायक जोगीराम सिहाग की गाड़ी रोककर भारी विरोध किया। यह बताता है कि किसानों के हौसले बुलंद हैं। खेड़ा बॉर्डर पर अमराराम, रामकिशन महलावत, राजाराम मील, रणजीत राजू, तारा सिंह सिद्धू बलवीर छिल्लर, बाबा जैमल सिंह, बाबा सुखदेव सिंह, पृथ्वी, हरफूल सिंह, कुलदीप यादव, मदन सिंह यादव, रूड सिंह महला, मा. रघुवीर सिंह, ज्ञानी राजवीर सिंह, महावीर सिंह सरपंच, अनिल भेरा, जय सिंह जनवास, चौधरी फजलुद्दीन, कुलदीप मोहनपुर, सोनू सिंह, मौलाना दिलशाद, अमजद भाई, फजरु रहमान, साजिद भाई, अब्दुल भाई, पवन दुग्गल, नवीन नागौर व जुनैद भाई, समेत कई साथी शामिल हुए।
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