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दो दिनों से लघु सचिवालय में धरने पर बैठा परिवार
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कोसली क्षेत्र के एक गांव का निवासी एक परिवार शुक्रवार को डीसी अशोक कुमार गर्ग के पास अपनी असलहा का लाइसेंस बनाने या फिर सुरक्षित आवास मुहैया कराने की गुहार लेकर आता है। उपायुक्त के व्यवहार से दुखी होकर वह सचिवालय में डीसी के कार्यालय के चंद फीट की दूरी पर धरना लगाकर बैठ जाता है।
समाज के लिए काला बदनुमा दाग जैसी वारदात का पीड़ित यह परिवार अब दूसरे पक्ष की छींटाकशी और धमकियों से प्रभावित है। इनकी एक महिला रेणु का कहना है कि वे शुक्रवार को अपने असलहा रखने का लाइसेंस बनाने या सुरक्षित आवास मुहैया कराने की गुहार लेकर मिले मगर डीसी की बातों से हमें बेहद निराशा हुई। हमें दूसरा पक्ष गांव में परेशान करता है। जान से मारने की लगातार धमकियां मिल रही हैं। इसलिए हमने महिला आयोग को एक शिकायत भेजी थी जिसमें सुरक्षित आश्रय उपलब्ध कराने की गुहार लगाई गई थी।
आयोग ने इस पत्र की प्रति डीसी कार्यालय और हमारे पास भेजी, जिसे लेकर रेणु और उसका चार सदस्यीय परिवार यहां सचिवालय पहुंचा। शुक्रवार को सुबह 11 बजे के बाद इनकी उपायुक्त से मुलाकात हुई मगर चंद मिनटों में ही फैसला हो गया। डीसी ने कहा कि वे एक सप्ताह के भीतर इस मामले को समझकर निर्णय लेें मगर त्रिया हठ भी बल खा गई बोलीं, हम गांव नहीं जाएंगे, हमें लगातार धमकियां मिल रही हैं। दूसरा पक्ष हमें मार देगा, हमें सुरक्षित आश्रय दिया जाए। डीसी ने इस मामले में इनको शहर में कहीं किराए पर रहने की बात कही । शनिवार को भी यह परिवार सचिवालय में डीसी कार्यालय के समीप धरना जमाए बैठा दिखाई दिया।
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इस परिवार का शुक्रवार को और शनिवार को यहीं खाना और सोना हुआ। फिलहाल इस परिवार को यहां बैठे हुए 12 घंटे से अधिक समय बीत गया है मगर इनका कोई समाधान नहीं हुआ। उधर महिला आयोग के एक पत्र को लेकर आई महिला रेणु ने अभी तक उन्हें जिला प्रशासन की ओर से इंसाफ नहीं मिलने की बात कही गई। खबर भेजे जाने तक यह परिवार धरने पर बैठा रहा।
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समाज के लिए काला बदनुमा दाग जैसी वारदात का पीड़ित यह परिवार अब दूसरे पक्ष की छींटाकशी और धमकियों से प्रभावित है। इनकी एक महिला रेणु का कहना है कि वे शुक्रवार को अपने असलहा रखने का लाइसेंस बनाने या सुरक्षित आवास मुहैया कराने की गुहार लेकर मिले मगर डीसी की बातों से हमें बेहद निराशा हुई। हमें दूसरा पक्ष गांव में परेशान करता है। जान से मारने की लगातार धमकियां मिल रही हैं। इसलिए हमने महिला आयोग को एक शिकायत भेजी थी जिसमें सुरक्षित आश्रय उपलब्ध कराने की गुहार लगाई गई थी।
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आयोग ने इस पत्र की प्रति डीसी कार्यालय और हमारे पास भेजी, जिसे लेकर रेणु और उसका चार सदस्यीय परिवार यहां सचिवालय पहुंचा। शुक्रवार को सुबह 11 बजे के बाद इनकी उपायुक्त से मुलाकात हुई मगर चंद मिनटों में ही फैसला हो गया। डीसी ने कहा कि वे एक सप्ताह के भीतर इस मामले को समझकर निर्णय लेें मगर त्रिया हठ भी बल खा गई बोलीं, हम गांव नहीं जाएंगे, हमें लगातार धमकियां मिल रही हैं। दूसरा पक्ष हमें मार देगा, हमें सुरक्षित आश्रय दिया जाए। डीसी ने इस मामले में इनको शहर में कहीं किराए पर रहने की बात कही । शनिवार को भी यह परिवार सचिवालय में डीसी कार्यालय के समीप धरना जमाए बैठा दिखाई दिया।
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इस परिवार का शुक्रवार को और शनिवार को यहीं खाना और सोना हुआ। फिलहाल इस परिवार को यहां बैठे हुए 12 घंटे से अधिक समय बीत गया है मगर इनका कोई समाधान नहीं हुआ। उधर महिला आयोग के एक पत्र को लेकर आई महिला रेणु ने अभी तक उन्हें जिला प्रशासन की ओर से इंसाफ नहीं मिलने की बात कही गई। खबर भेजे जाने तक यह परिवार धरने पर बैठा रहा।