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रेजांगला युद्ध पर बन रही फिल्म में तथ्यों में हुई छेड़छाड़ : डॉ. टीसी राव
Thu, 07 Aug 2025 11:49 PM IST
रोहतक ब्यूरो
संवाद न्यूज एजेंसी, रेवाड़ी
संवाद न्यूज एजेंसी, रेवाड़ी
Updated Thu, 07 Aug 2025 11:49 PM IST
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फोटो : 16डॉ. टीसी राव
- फोटो : सफारी में आनंद लेती विदेशी गुलाबी मैना।
संवाद न्यूज एजेंसी
रेवाड़ी। रेजांगला युद्ध के दस्तावेजीकरण में 25 वर्षों से जुटे डॉ. टीसी राव ने कहा कि बॉलीवुड की ओर से रेजांगला युद्ध पर बनाई जा रही फिल्म में तथ्यों से छेड़छाड़ किया गया है।
उन्होंने कहा कि रेजांगला युद्ध वीरता, बलिदान और अपार राष्ट्रभक्ति का प्रतीक है। 18 नवंबर 1962 को लद्दाख के रेजांगला दर्रे पर घटित यह युद्ध चीनी सेना के विरुद्ध लड़ा गया था। इस युद्ध में 120 वीरों की एक छोटी टुकड़ी, जिनमें 117 यदुवंशी (अहीर) सैनिक थे, उन्होंने 5000 से अधिक चीनी सैनिकों का बहादुरी से सामना किया और मातृभूमि के लिए अपने प्राण न्यौछावर कर दिए।
इस युद्ध पर बनाई जा रही फिल्म 120 बहादुर ने तथ्यों को विकृत करके यदुवंशी समाज के बलिदान और गौरव को अंधकार में डालने का प्रयास किया है।
बताया कि सचाई यह है कि युद्ध में 120 में से 117 सैनिक यदुवंशी (अहीर) थे, जो हरियाणा, उत्तर प्रदेश और राजस्थान से थे। यह भ्रम फैलाने वाली फिल्म है। 120 बहादुर फिल्म में बहादुर शब्द का प्रयोग कर इसे गोरखा सैनिकों की वीरगाथा की तरह प्रस्तुत किया गया है, जोकि ऐतिहासिक रूप से गलत है। इसका सही शीर्षक 120 वीर अहीर होना चाहिए।
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मूल इतिहास से छेड़छाड़ भी की गई है। फिल्म में मेजर शैतान सिंह को भाटी के रूप में दिखाकर राजपूत पहचान दी गई, जबकि सैन्य रिकॉर्ड में उनका नाम केवल शैतान सिंह था। यदुवंशी भूमिका का लोप दिखाई दे रहा है।
उन्होंने कहा कि फिल्म में कहीं भी सूबेदार सूरजा राम यादव, वीर चक्र और अन्य सात वीर चक्र विजेता यदुवंशी वीरों का उल्लेख नहीं किया गया। वह रजनीश घई के संपर्क में रहे हैं। उन्हें शोध सामग्री उपलब्ध करवाई।
जब अपीलों को अनदेखा किया गया, तब मजबूरन रजनीश घई और फरहान अख्तर को कानूनी नोटिस भेजा, परंतु उनका जवाब अस्पष्ट और अपमानजनक था। यदुवंशी समाज का अपमान किया गया है।
डॉ. टीसी राव ने कहा कि फिल्म के लाभ का करार मेजर शैतान सिंह के परिवार से हुआ, लेकिन अन्य 8 वीर चक्र विजेताओं के परिवारों की राय नहीं ली गई और लाभ की तो दूर की बात है। पूरे यदुवंशी समाज को इस विकृति के विरुद्ध संगठित होकर आवाज उठाने की मांग की है।
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रेवाड़ी। रेजांगला युद्ध के दस्तावेजीकरण में 25 वर्षों से जुटे डॉ. टीसी राव ने कहा कि बॉलीवुड की ओर से रेजांगला युद्ध पर बनाई जा रही फिल्म में तथ्यों से छेड़छाड़ किया गया है।
उन्होंने कहा कि रेजांगला युद्ध वीरता, बलिदान और अपार राष्ट्रभक्ति का प्रतीक है। 18 नवंबर 1962 को लद्दाख के रेजांगला दर्रे पर घटित यह युद्ध चीनी सेना के विरुद्ध लड़ा गया था। इस युद्ध में 120 वीरों की एक छोटी टुकड़ी, जिनमें 117 यदुवंशी (अहीर) सैनिक थे, उन्होंने 5000 से अधिक चीनी सैनिकों का बहादुरी से सामना किया और मातृभूमि के लिए अपने प्राण न्यौछावर कर दिए।
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इस युद्ध पर बनाई जा रही फिल्म 120 बहादुर ने तथ्यों को विकृत करके यदुवंशी समाज के बलिदान और गौरव को अंधकार में डालने का प्रयास किया है।
बताया कि सचाई यह है कि युद्ध में 120 में से 117 सैनिक यदुवंशी (अहीर) थे, जो हरियाणा, उत्तर प्रदेश और राजस्थान से थे। यह भ्रम फैलाने वाली फिल्म है। 120 बहादुर फिल्म में बहादुर शब्द का प्रयोग कर इसे गोरखा सैनिकों की वीरगाथा की तरह प्रस्तुत किया गया है, जोकि ऐतिहासिक रूप से गलत है। इसका सही शीर्षक 120 वीर अहीर होना चाहिए।
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मूल इतिहास से छेड़छाड़ भी की गई है। फिल्म में मेजर शैतान सिंह को भाटी के रूप में दिखाकर राजपूत पहचान दी गई, जबकि सैन्य रिकॉर्ड में उनका नाम केवल शैतान सिंह था। यदुवंशी भूमिका का लोप दिखाई दे रहा है।
उन्होंने कहा कि फिल्म में कहीं भी सूबेदार सूरजा राम यादव, वीर चक्र और अन्य सात वीर चक्र विजेता यदुवंशी वीरों का उल्लेख नहीं किया गया। वह रजनीश घई के संपर्क में रहे हैं। उन्हें शोध सामग्री उपलब्ध करवाई।
जब अपीलों को अनदेखा किया गया, तब मजबूरन रजनीश घई और फरहान अख्तर को कानूनी नोटिस भेजा, परंतु उनका जवाब अस्पष्ट और अपमानजनक था। यदुवंशी समाज का अपमान किया गया है।
डॉ. टीसी राव ने कहा कि फिल्म के लाभ का करार मेजर शैतान सिंह के परिवार से हुआ, लेकिन अन्य 8 वीर चक्र विजेताओं के परिवारों की राय नहीं ली गई और लाभ की तो दूर की बात है। पूरे यदुवंशी समाज को इस विकृति के विरुद्ध संगठित होकर आवाज उठाने की मांग की है।