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डेटा आधारित निर्णय प्रक्रिया, पारदर्शिता और नवाचार पर दें जोर : कुलपति
Sun, 13 Sep 2026 11:09 PM IST
रोहतक ब्यूरो
संवाद न्यूज एजेंसी, रेवाड़ी
संवाद न्यूज एजेंसी, रेवाड़ी
Updated Sun, 13 Sep 2026 11:09 PM IST
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बैठक लेते कुलपति प्रो. असीम मिगलानी। स्रोत : विवि
रेवाड़ी। इंदिरा गांधी विश्वविद्यालय के आंतरिक गुणवत्ता आश्वासन प्रकोष्ठ की चौथी उच्चस्तरीय बैठक कुलपति प्रो. असीम मिगलानी की अध्यक्षता में हुई। इसमें विश्वविद्यालय में शैक्षणिक और प्रशासनिक गुणवत्ता को उच्च मानकों के अनुरूप मजबूत करने, पारदर्शिता बढ़ाने और संस्थागत उत्कृष्टता की दिशा में कार्ययोजना तैयार करने पर चर्चा हुई।
कुलपति प्रो. असीम मिगलानी ने कहा कि आईक्यूएसी की भूमिका केवल गुणवत्ता मूल्यांकन तक सीमित नहीं रहनी चाहिए, बल्कि यह विश्वविद्यालय के संपूर्ण शैक्षणिक और प्रशासनिक विकास का दिशा-निर्देशक बने। उन्होंने डेटा आधारित निर्णय प्रक्रिया, पारदर्शिता और नवाचार को बढ़ावा देने पर विशेष जोर दिया।
बैठक में शैक्षणिक सत्र 2024-25 के दौरान हुए ऑडिट की समीक्षा की गई। कुलपति के मार्गदर्शन में नैक के नए मूल्यांकन ढांचे और एनआईआरएफ रैंकिंग में विश्वविद्यालय की प्रभावी भागीदारी के लिए ठोस कार्ययोजना तैयार करने पर सहमति बनी। शिक्षण-अधिगम प्रक्रिया को सहज बनाने और भारतीय भाषाओं को बढ़ावा देने के लिए विशेष समन्वयक नियुक्त किए जाने की जानकारी भी साझा की गई।
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कुलसचिव प्रो. दिलबाग सिंह और डीन अकादमिक अफेयर्स प्रो. सुनील कुमार ने उच्च शिक्षा में बदलते परिदृश्य, निरंतर गुणवत्ता सुधार और अकादमिक उत्कृष्टता पर विचार रखे।
बाह्य विशेषज्ञों के रूप में प्रो. नरसिम्हम (एमडीयू, रोहतक), प्रो. संजय शर्मा (गौतम बुद्ध विश्वविद्यालय, ग्रेटर नोएडा) और रवि गुप्ता शामिल हुए। नैक विशेषज्ञ डॉ. नमीश मिगलानी और प्रो. आशीष कुमार मनचंदा भी विशेष आमंत्रित सदस्य के रूप में उपस्थित रहे।
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कुलपति प्रो. असीम मिगलानी ने कहा कि आईक्यूएसी की भूमिका केवल गुणवत्ता मूल्यांकन तक सीमित नहीं रहनी चाहिए, बल्कि यह विश्वविद्यालय के संपूर्ण शैक्षणिक और प्रशासनिक विकास का दिशा-निर्देशक बने। उन्होंने डेटा आधारित निर्णय प्रक्रिया, पारदर्शिता और नवाचार को बढ़ावा देने पर विशेष जोर दिया।
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बैठक में शैक्षणिक सत्र 2024-25 के दौरान हुए ऑडिट की समीक्षा की गई। कुलपति के मार्गदर्शन में नैक के नए मूल्यांकन ढांचे और एनआईआरएफ रैंकिंग में विश्वविद्यालय की प्रभावी भागीदारी के लिए ठोस कार्ययोजना तैयार करने पर सहमति बनी। शिक्षण-अधिगम प्रक्रिया को सहज बनाने और भारतीय भाषाओं को बढ़ावा देने के लिए विशेष समन्वयक नियुक्त किए जाने की जानकारी भी साझा की गई।
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कुलसचिव प्रो. दिलबाग सिंह और डीन अकादमिक अफेयर्स प्रो. सुनील कुमार ने उच्च शिक्षा में बदलते परिदृश्य, निरंतर गुणवत्ता सुधार और अकादमिक उत्कृष्टता पर विचार रखे।
बाह्य विशेषज्ञों के रूप में प्रो. नरसिम्हम (एमडीयू, रोहतक), प्रो. संजय शर्मा (गौतम बुद्ध विश्वविद्यालय, ग्रेटर नोएडा) और रवि गुप्ता शामिल हुए। नैक विशेषज्ञ डॉ. नमीश मिगलानी और प्रो. आशीष कुमार मनचंदा भी विशेष आमंत्रित सदस्य के रूप में उपस्थित रहे।