बावल। कृषि महाविद्यालय बावल में कृषिवानिकी दिवस पर पौधरोपण कर वानिकी की महत्ता पर जोर दिया गया। कार्यक्रम की शुरूआत प्राचार्य डॉ. नरेश कौशिक द्वारा की गई। कार्यक्रम में सभी शिक्षकों, विद्यार्थियों एवं कर्मचारियों ने उत्साहपूर्वक भाग लिया।
डॉ. कौशिक ने कृषिवानिकी की संकल्पना, कृषि में इसकी भूमिका और पर्यावरण संरक्षण में इसके योगदान पर विस्तार से प्रकाश डाला। उन्होंने बताया कि कृषिवानिकी जिसमें पेड़-पौधों को फसल प्रणाली में एकीकृत किया जाता है न केवल किसानों की आय बढ़ाने में सहायक है, बल्कि यह मृदा उर्वरता को बनाए रखने, जल संरक्षण को बढ़ावा देने और जैव विविधता के संरक्षण में भी महत्वपूर्ण भूमिका निभाती है। उन्होंने यह भी कहा कि वृक्ष आधारित कृषि प्रणाली अपनाकर जलवायु परिवर्तन के प्रभावों को भी कम किया जा सकता है।