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सरस्वती नदी पर शोध कर सकेंगे विद्यार्थी
ब्यूरो /अमर उजाला
Updated Sun, 25 Sep 2016 12:03 AM IST
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आईजीयू में सेमिनार
- फोटो : अमर उजाला ब्यूरो
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सरस्वती नदी की खोज और उसके पुनरुद्धार में इंदिरा गांधी यूनिवर्सिटी, मीरपुर के विद्यार्थी भी भागीदारी बनेंगे। इसके लिए शीघ्र ही यूनिवर्सिटी में सरस्वती रिवर हेरिटेज सेंटर खोला जाएगा। इसके बाद आईजीयू के विद्यार्थी सरस्वती नदी पर शोध कर सकेंगे। ये घोषणा शनिवार को आईजीयू के कुलपति एस. पी. बंसल ने दी।
इस संबंध में इंदिरा गांधी यूनिवर्सिटी, मीरपुर में शनिवार को वाणिज्य, प्रबंधन तथा पर्यटन संकाय की ओर से भारतीय पर्यटन एवं हॉस्पिटलिटी कांग्रेस की 13वीं राष्ट्रीय संगोष्ठी हुई। संगोष्ठी में देशभर के विश्वविद्यालयों के वाइस चांसलर एवं अन्य अधिकारियों ने भाग लिया। प्रो. बंसल ने कहा कि हमे हरियाणा के पर्यटन के दायरे को पुन: परिभाषित करने की जरूरत है। जिससे यहां की ऐतिहासिक, धार्मिक एवं सांस्कृतिक संभावनाओं को तलाश जा सके।
उन्होंने बताया कि वैश्विक स्तर पर सर्वोत्तम 200 विश्वविद्यालयों में भारत के किसी भी विश्वविद्यालय का नाम नहीं है। देश में केवल 4.7 प्रतिशत ही स्किल वर्कस हैं। जबकि जापान में 80 प्रतिशत, ब्रिटेन में 68 प्रतिशत एवं यूएसए में 52 प्रतिशत हैं। यूनिवर्सिटी की ओर से गोद लिए सभी पांच गांवों के ग्रामीणों के लिए स्किल डवलपमेंट कोर्स शुरू किए जाएंगे। कार्यक्रम में प्रो. एसपी बंसल, प्रशांत गौतम एवं एस. वालिया की ओर से लिखित एक पुस्तक का भी विमोचन किया गया।
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पर्यटन विभाग यूनिवर्सिटी को देगा 2.50 करोड़ रुपये
भारतीय पर्यटन एवं देशाटन प्रबन्धन संस्थान के अध्यक्ष प्रो. संदीप कुलश्रेष्ठ ने यूनिवर्सिटी में होटल प्रबंधन तथा पर्यटन पाठ्यक्रम शुरू करने पर पर्यटन मंत्रालय, भारत सरकार की ओर से 2.50 करोड़ रुपये देने की घोषणा की। साथ ही कुलपति प्रो. एस.पी. बंसल को पर्यटन गौरव सम्मान से भी नवाजा।
पर्यटन उद्योग में बहुत संभावना
गुड़गांव मंडल के आयुक्त डॉ. डी.सुरेश ने कहा कि हमारे देश में पर्यटन उद्योग में बहुत संभावनाएं हैं। अमेरिका के पूर्व राष्ट्रपति बिल क्लिंटन ने भारत यात्रा के बाद कहा था कि दुनिया दो तरह की है। एक वो जिन्होंने ताजमहल देखा और एक वो जिन्होंने नहीं देखा। उन्होंने भारतीय पर्यटन की काफी तारीफ की थी। भारत जैसे गरीब देश में पर्यटन गरीब हटाने एवं रोजगार बढ़ाने में काफी कारगर साबित होगा।
कार्यक्रम में बाबा मस्तनाथ यूनिवर्सिटी के कुलपति डॉ. मार्कंडेय आहूजा, सरस्वती धरोहर विकास बोर्ड के उपाध्यक्ष प्रशांत भारद्वाज, आईजीयू के रजिस्ट्रार डॉ. मदनलाल गोयल, प्रो. रामसजन पांडेयल, प्रो. तेजसिंह, डॉ. दीपक गुप्ता, डॉ. मीरा बाम्बा, डॉ. सीमा महलावत आदि ने भी विचार रखे।
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इस संबंध में इंदिरा गांधी यूनिवर्सिटी, मीरपुर में शनिवार को वाणिज्य, प्रबंधन तथा पर्यटन संकाय की ओर से भारतीय पर्यटन एवं हॉस्पिटलिटी कांग्रेस की 13वीं राष्ट्रीय संगोष्ठी हुई। संगोष्ठी में देशभर के विश्वविद्यालयों के वाइस चांसलर एवं अन्य अधिकारियों ने भाग लिया। प्रो. बंसल ने कहा कि हमे हरियाणा के पर्यटन के दायरे को पुन: परिभाषित करने की जरूरत है। जिससे यहां की ऐतिहासिक, धार्मिक एवं सांस्कृतिक संभावनाओं को तलाश जा सके।
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उन्होंने बताया कि वैश्विक स्तर पर सर्वोत्तम 200 विश्वविद्यालयों में भारत के किसी भी विश्वविद्यालय का नाम नहीं है। देश में केवल 4.7 प्रतिशत ही स्किल वर्कस हैं। जबकि जापान में 80 प्रतिशत, ब्रिटेन में 68 प्रतिशत एवं यूएसए में 52 प्रतिशत हैं। यूनिवर्सिटी की ओर से गोद लिए सभी पांच गांवों के ग्रामीणों के लिए स्किल डवलपमेंट कोर्स शुरू किए जाएंगे। कार्यक्रम में प्रो. एसपी बंसल, प्रशांत गौतम एवं एस. वालिया की ओर से लिखित एक पुस्तक का भी विमोचन किया गया।
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पर्यटन विभाग यूनिवर्सिटी को देगा 2.50 करोड़ रुपये
भारतीय पर्यटन एवं देशाटन प्रबन्धन संस्थान के अध्यक्ष प्रो. संदीप कुलश्रेष्ठ ने यूनिवर्सिटी में होटल प्रबंधन तथा पर्यटन पाठ्यक्रम शुरू करने पर पर्यटन मंत्रालय, भारत सरकार की ओर से 2.50 करोड़ रुपये देने की घोषणा की। साथ ही कुलपति प्रो. एस.पी. बंसल को पर्यटन गौरव सम्मान से भी नवाजा।
पर्यटन उद्योग में बहुत संभावना
गुड़गांव मंडल के आयुक्त डॉ. डी.सुरेश ने कहा कि हमारे देश में पर्यटन उद्योग में बहुत संभावनाएं हैं। अमेरिका के पूर्व राष्ट्रपति बिल क्लिंटन ने भारत यात्रा के बाद कहा था कि दुनिया दो तरह की है। एक वो जिन्होंने ताजमहल देखा और एक वो जिन्होंने नहीं देखा। उन्होंने भारतीय पर्यटन की काफी तारीफ की थी। भारत जैसे गरीब देश में पर्यटन गरीब हटाने एवं रोजगार बढ़ाने में काफी कारगर साबित होगा।
कार्यक्रम में बाबा मस्तनाथ यूनिवर्सिटी के कुलपति डॉ. मार्कंडेय आहूजा, सरस्वती धरोहर विकास बोर्ड के उपाध्यक्ष प्रशांत भारद्वाज, आईजीयू के रजिस्ट्रार डॉ. मदनलाल गोयल, प्रो. रामसजन पांडेयल, प्रो. तेजसिंह, डॉ. दीपक गुप्ता, डॉ. मीरा बाम्बा, डॉ. सीमा महलावत आदि ने भी विचार रखे।