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नहीं निकला ड्रा, बदली तारीख
ब्यूरो /अमर उजाला
Updated Wed, 10 Aug 2016 12:39 AM IST
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134-ए के तहत ड्रा के लिए बैठक
- फोटो : अमर उजाला ब्यूरो
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निजी स्कूलों के ऑडिट के मसले को लेकर लघु सचिवालय मेें ड्रा निकालने को लेकर हुई बैठक में ड्रा नहीं निकल सका। बैठक में निजी स्कूल संचालकों ने एडीसी के सामने अपनी समस्याओं का रोना रोया। उधर स्कूल संचालकों की समस्याएं सुन एडीसी ने ड्रा की तारीख में बदलाव कर दिया। अब ड्रा पर सुनवाई 19 अगस्त को होगी।
सोमवार को लघु सचिवालय में आयोजित बैठक में एडीसी-डीईओ के समक्ष निजी स्कूल संचालक व अभिभावक सुनवाई के लिए एकत्रित हुए थे। एडीसी मनोज कुमार ने मंगलवार के लिए ड्रा के माध्यम से स्कूलों के ऑडिट करवाने की बात कही थी। बैठक में 46 हाई व 106 सीनियर सेकेंडरी स्कूलों का ड्रा निकलना था।
निजी स्कूल संचालकों ने मांगी मोहलत
निजी स्कूलों का ड्रा निकालकर ऑडिट करवाने की प्रक्रिया मंगलवार को शुरू होनी थी, लेकिन प्राईवेट स्कूल एसोसिएशन के सदस्यों ने बैठक में एडीसी के समक्ष अन्य जिलों में ड्रा की प्रक्रिया नहीं होने की बात कही। प्रधान जवाहर दूहन ने कहा कि रेवाड़ी को छोड़कर किसी भी अन्य जिले में ड्रा के माध्यम से स्कूल चिह्नित कर ऑडिट करवाने जैसा काम नहीं हो रहा है।
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उन्होंने कहा कि एडीसी की कमेटी भी इस बात की पुष्टि कर लें। वहीं उन्होंने निजी स्कूलों के मसले को लेकर एक बार मुख्यमंत्री से मिलने की बात कही। उन्होंने बताया कि गुड़गांव में जिन स्कूलों के खिलाफ शिकायत हुई थी, उन स्कूलों का ऑडिट करवाने के निर्देश जारी हुए थे। वहीं एसोसिएशन ने ऑडिट के नियम व अन्य तकनीकी पहलु जानने के लिए कुछ समय की मोहलत मांगी। इसी पर गौर करते हुए एडीसी ने ड्रा के लिए 19 अगस्त को 11 बजे सुनवाई के लिए समय निर्धारत किया है।
पहले समस्या सुनी, फिर समझाया
बैठक में एडीसी के समक्ष निजी स्कूल संचालकों ने अपनी समस्याएं भी रखी। संचालक अजय यादव ने कहा कि कुछ अभिभावक सामाजिक संगठनों के साथ मिलकर उन पर दबाव बनाते हैं तथा समय पर बच्चे की फीस भी अदा नहीं करते हैं और कहने पर उलटे स्कूल प्रबंधन पर फीस के नाम पर लूट-खसोट जैसे आरोप लगाते हैं। वहीं बैठक में बसों से सीसीटीवी कैमरे तोड़ने को भी मुद्दा उठा।
वहीं एक स्कूल संचालक ने ट्रांस्पोर्ट अधिकारियों पर किसी विशेष कंपनी के स्पीड गवर्नर लगाने का दबाव बनाने की बात कही। उन्होंने बताया कि जिन गाड़ी में स्पीड गवर्नर पहले से लगे हैं, उन्हें विशेष कंपनी का नहीं होने के कारण पास नहीं किया जा रहा है। वहीं जवाब में एडीसी ने कहा कि सरकारी अधिकारी किसी भी निजी कंपनी के ब्रांड को नहीं थोप सकती है। यदि ऐसा है तो निश्चित तौर पर कार्रवाई होगी।
इसी कड़ी में उन्होंने निजी स्कूल संचालकों को समझाते हुए कहा कि शिक्षा को मुनाफा के उद्देश्य से न परोसे। जरूरतमंद बच्चों को शिक्षा सेवा जरूर दें। वहीं शिक्षा सुविधाओं के जायज पैसे वसूलें। ऐसा नहीं हो कि पांच रुपये की दाल के 25 हजार रुपये वसूले जाएं।
हाईड्रोलिक डोर के मुद्दे पर बातचीत का दिया आश्वासन
बैठक के एक और अह्म मुद्दा हाईड्रोलिक डोर से संबंधित उठा। निजी स्कूल संचालकों ने कहा कि स्कूल बसों में हाईड्रोलिक डोर सफल नहीं हो सकते। पुरानी बसों में हाईड्रोलिक डोर के जुगाड़ फिट हो सकते हैं और ये दरवाजे झटके से बंद होते हैं। ऐसे में बच्चों को नुकसान पहुंच सकता है। लेकिन विभाग अधिकारी इस बात को नहीं समझते, वे बिना हाईड्रोलिक डोर के बसों की पासिंग को रोक रहे हैं। वहीं एडीसी ने इस बिंदू को सही बताते हुए आला अधिकारियों से इस बाबत बात करने की बात कही है।
आप ने की संयुक्त कमेटी से जांच कराने की मांग
इस पूरे प्रकरण में आम आदमी पार्टी ने अभिभावकों के हवाले से निजी स्कूलों के ऑडिट के लिए संयुक्त कमेटी गठित कर उसके माध्यम से जांच कराने की मांग की है। आप प्रभारी संजय यादव ने कहा कि इस कमेटी में फीस एंड फंड रेगुलेरिटी की ओर से मनोनीत सीए, शिकायतकर्ता पक्ष का सीए, डीईओ, संबंधित स्कूल तथा शिकायतकर्ता को शामिल किया जाना चाहिए। उन्होंने कहा इससे ऑडिट प्रक्रिया की पारदर्शिता बनी रहेगी।
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सोमवार को लघु सचिवालय में आयोजित बैठक में एडीसी-डीईओ के समक्ष निजी स्कूल संचालक व अभिभावक सुनवाई के लिए एकत्रित हुए थे। एडीसी मनोज कुमार ने मंगलवार के लिए ड्रा के माध्यम से स्कूलों के ऑडिट करवाने की बात कही थी। बैठक में 46 हाई व 106 सीनियर सेकेंडरी स्कूलों का ड्रा निकलना था।
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निजी स्कूल संचालकों ने मांगी मोहलत
निजी स्कूलों का ड्रा निकालकर ऑडिट करवाने की प्रक्रिया मंगलवार को शुरू होनी थी, लेकिन प्राईवेट स्कूल एसोसिएशन के सदस्यों ने बैठक में एडीसी के समक्ष अन्य जिलों में ड्रा की प्रक्रिया नहीं होने की बात कही। प्रधान जवाहर दूहन ने कहा कि रेवाड़ी को छोड़कर किसी भी अन्य जिले में ड्रा के माध्यम से स्कूल चिह्नित कर ऑडिट करवाने जैसा काम नहीं हो रहा है।
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उन्होंने कहा कि एडीसी की कमेटी भी इस बात की पुष्टि कर लें। वहीं उन्होंने निजी स्कूलों के मसले को लेकर एक बार मुख्यमंत्री से मिलने की बात कही। उन्होंने बताया कि गुड़गांव में जिन स्कूलों के खिलाफ शिकायत हुई थी, उन स्कूलों का ऑडिट करवाने के निर्देश जारी हुए थे। वहीं एसोसिएशन ने ऑडिट के नियम व अन्य तकनीकी पहलु जानने के लिए कुछ समय की मोहलत मांगी। इसी पर गौर करते हुए एडीसी ने ड्रा के लिए 19 अगस्त को 11 बजे सुनवाई के लिए समय निर्धारत किया है।
पहले समस्या सुनी, फिर समझाया
बैठक में एडीसी के समक्ष निजी स्कूल संचालकों ने अपनी समस्याएं भी रखी। संचालक अजय यादव ने कहा कि कुछ अभिभावक सामाजिक संगठनों के साथ मिलकर उन पर दबाव बनाते हैं तथा समय पर बच्चे की फीस भी अदा नहीं करते हैं और कहने पर उलटे स्कूल प्रबंधन पर फीस के नाम पर लूट-खसोट जैसे आरोप लगाते हैं। वहीं बैठक में बसों से सीसीटीवी कैमरे तोड़ने को भी मुद्दा उठा।
वहीं एक स्कूल संचालक ने ट्रांस्पोर्ट अधिकारियों पर किसी विशेष कंपनी के स्पीड गवर्नर लगाने का दबाव बनाने की बात कही। उन्होंने बताया कि जिन गाड़ी में स्पीड गवर्नर पहले से लगे हैं, उन्हें विशेष कंपनी का नहीं होने के कारण पास नहीं किया जा रहा है। वहीं जवाब में एडीसी ने कहा कि सरकारी अधिकारी किसी भी निजी कंपनी के ब्रांड को नहीं थोप सकती है। यदि ऐसा है तो निश्चित तौर पर कार्रवाई होगी।
इसी कड़ी में उन्होंने निजी स्कूल संचालकों को समझाते हुए कहा कि शिक्षा को मुनाफा के उद्देश्य से न परोसे। जरूरतमंद बच्चों को शिक्षा सेवा जरूर दें। वहीं शिक्षा सुविधाओं के जायज पैसे वसूलें। ऐसा नहीं हो कि पांच रुपये की दाल के 25 हजार रुपये वसूले जाएं।
हाईड्रोलिक डोर के मुद्दे पर बातचीत का दिया आश्वासन
बैठक के एक और अह्म मुद्दा हाईड्रोलिक डोर से संबंधित उठा। निजी स्कूल संचालकों ने कहा कि स्कूल बसों में हाईड्रोलिक डोर सफल नहीं हो सकते। पुरानी बसों में हाईड्रोलिक डोर के जुगाड़ फिट हो सकते हैं और ये दरवाजे झटके से बंद होते हैं। ऐसे में बच्चों को नुकसान पहुंच सकता है। लेकिन विभाग अधिकारी इस बात को नहीं समझते, वे बिना हाईड्रोलिक डोर के बसों की पासिंग को रोक रहे हैं। वहीं एडीसी ने इस बिंदू को सही बताते हुए आला अधिकारियों से इस बाबत बात करने की बात कही है।
आप ने की संयुक्त कमेटी से जांच कराने की मांग
इस पूरे प्रकरण में आम आदमी पार्टी ने अभिभावकों के हवाले से निजी स्कूलों के ऑडिट के लिए संयुक्त कमेटी गठित कर उसके माध्यम से जांच कराने की मांग की है। आप प्रभारी संजय यादव ने कहा कि इस कमेटी में फीस एंड फंड रेगुलेरिटी की ओर से मनोनीत सीए, शिकायतकर्ता पक्ष का सीए, डीईओ, संबंधित स्कूल तथा शिकायतकर्ता को शामिल किया जाना चाहिए। उन्होंने कहा इससे ऑडिट प्रक्रिया की पारदर्शिता बनी रहेगी।