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Rewari News: सूखी नहर, पानी नहीं छोड़ा गया तो गहराएगा संकट
Sun, 16 Mar 2025 12:42 AM IST
रोहतक ब्यूरो
संवाद न्यूज एजेंसी, रेवाड़ी
संवाद न्यूज एजेंसी, रेवाड़ी
Updated Sun, 16 Mar 2025 12:42 AM IST
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संवाद न्यूज एजेंसी
रेवाड़ी। गर्मी का मौसम शुरू होने के साथ ही पानी की खपत बढ़ गई है। वहीं पानी नहीं छोड़े जाने के कारण जवाहर लाल नेहरू (जेएलएन) नहर सूखी पड़ी है। जलघरों में सिर्फ चार दिन का पानी बचा है। अगर जल्द पानी नहीं छोड़ा गया तो पेयजल संकट गहरा जाएगा और लोगों मुश्किलों का सामना करना पड़ेगा।
शहर में पेयजल आपूर्ति नहरी पानी पर निर्भर है। जवाहर लाल नेहरू में पानी नहीं छोड़े जाने के कारण पेयजल की कमी हो गई है। ऐसे में शहर की पौने तीन लाख की आबादी को पेयजल संकट का सामना करना पड़ रहा है। लोग कैंपर का पानी खरीद रहे हैं। अगर नहर में पानी नहीं छोड़ा गया तो समस्या गहरा जाएगी। अधिकारियों का कहना है कि शेड्यूल के अनुसार 8 मार्च तक पानी आना था, लेकिन पानी नहीं छोड़ा गया। अगले दो या चार दिन में पानी आएगा या नहीं, इसके बारे में स्पष्ट नहीं बताया जा सकता है।
एक माह से जनस्वास्थ्य विभाग एक दिन छोड़कर पानी दे रहा है जिससे लोगों को पेयजल संकट का सामना करना पड़ रहा है। 12 फरवरी को नहर में पानी आना बंद हुआ था। इसके बाद जनस्वास्थ्य विभाग की ओर से एक दिन छोड़कर पानी की आपूर्ति की जा रही है। फिलहाल जनस्वास्थ्य विभाग ट्यूबवेलों से पानी एकत्रित कर काम चला रहा है।
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जनस्वास्थ्य विभाग के कनिष्ठ अभियंता हेमंत ने बताया कि शहर के लोगों को पानी की कोई दिक्कत न हो, इसके लिए पूरे प्रयास किए जा रहे हैं। दूसरे ट्यूबवेलों से पानी एकत्रित कर काम चलाया जा रहा है। नहर में अभी दो से तीन दिन बाद ही पानी पहुंचने की संभावना है। ऐसे में लोग पानी बर्बाद न करें। उन्होंने बताया कि पहले खुबड़ू हेड से शेड्यूल के अनुसार 12 मार्च को पानी छोड़ा जाना था लेकिन पानी नहीं छोड़ा गया। यदि 17 मार्च (सोमवार) की रात वहां से पानी छोड़ा जाता है तो 19 मार्च की शाम या सुबह तक रेवाड़ी जेएलएन नहर में पानी पहुंच जाएगा। इसके बाद टैंकों को भरने का काम शुरू किया जाएगा। ऐसा होने पर 21 मार्च से पानी की सप्लाई शुरू कर दी जाएगी।
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पांच वर्ष से पानी का संकट बरकरार
शहर में पेयजल की राशनिंग करीब पांच वर्ष से चल रही है। नहरी पानी का शेड्यूल पहले 16-16 दिन का था। यानी 16 दिन नहर में पानी आता था और 16 दिन नहर बंद रहती थी। अब 3 साल से शेड्यूल 16-24 का हो गया है। अब 16 दिन नहर में पानी आता है और 24 दिन बंद रहता है। पिछले माह 12 फरवरी को नहरी में पानी आना बंद हुआ था। ऐसे में जनस्वास्थ्य विभाग के पास अब इतनी स्टोरेज क्षमता नहीं है कि शहर वासियों को हर दिन पेयजल सप्लाई दी जा सके, इसलिए हर माह पेयजल राशनिंग की जाती है। सोमवार की शाम तक नहर में पानी आता है उसके बाद पुराने शहर को पेयजल सप्लाई की जाएगी।
नहरी पानी पर आधारित है आपूर्ति
शहर में पेयजल आपूर्ति की व्यवस्था नहरी पानी पर आधारित है। नहर के पानी को कालाका और लिसाना में बने वाटर टैंक में स्टोर किया जाता है। वहां से बूस्टिंग स्टेशन के माध्यम से शहर में पानी की आपूर्ति होती है। कालाका जलघर में बनाए गए 5 वाटर टैंकों से शहर के 70 फीसदी हिस्से में पेयजल आपूर्ति होती है। वहीं, लिसाना स्थित जलघर के तीन वाटर टैंकों से 30 फीसदी भाग में पानी की सप्लाई होती है। दोनों जलघरों से पूरे शहर को 15 से 20 दिन ही पानी आपूर्ति हो सकती है।
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वर्जन:
नहर में सोमवार की रात खूबड़ू हेड से पानी छोड़े जाने की संभावना है। यदि वहां से पानी छोड़ दिया जाता है तो शहरवासियों को नियमित पानी की आपूर्ति की जाएगी।-हेमंत कुमार, कनिष्ठ अभियंता, जनस्वास्थ्य विभाग।
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रेवाड़ी। गर्मी का मौसम शुरू होने के साथ ही पानी की खपत बढ़ गई है। वहीं पानी नहीं छोड़े जाने के कारण जवाहर लाल नेहरू (जेएलएन) नहर सूखी पड़ी है। जलघरों में सिर्फ चार दिन का पानी बचा है। अगर जल्द पानी नहीं छोड़ा गया तो पेयजल संकट गहरा जाएगा और लोगों मुश्किलों का सामना करना पड़ेगा।
शहर में पेयजल आपूर्ति नहरी पानी पर निर्भर है। जवाहर लाल नेहरू में पानी नहीं छोड़े जाने के कारण पेयजल की कमी हो गई है। ऐसे में शहर की पौने तीन लाख की आबादी को पेयजल संकट का सामना करना पड़ रहा है। लोग कैंपर का पानी खरीद रहे हैं। अगर नहर में पानी नहीं छोड़ा गया तो समस्या गहरा जाएगी। अधिकारियों का कहना है कि शेड्यूल के अनुसार 8 मार्च तक पानी आना था, लेकिन पानी नहीं छोड़ा गया। अगले दो या चार दिन में पानी आएगा या नहीं, इसके बारे में स्पष्ट नहीं बताया जा सकता है।
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एक माह से जनस्वास्थ्य विभाग एक दिन छोड़कर पानी दे रहा है जिससे लोगों को पेयजल संकट का सामना करना पड़ रहा है। 12 फरवरी को नहर में पानी आना बंद हुआ था। इसके बाद जनस्वास्थ्य विभाग की ओर से एक दिन छोड़कर पानी की आपूर्ति की जा रही है। फिलहाल जनस्वास्थ्य विभाग ट्यूबवेलों से पानी एकत्रित कर काम चला रहा है।
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जनस्वास्थ्य विभाग के कनिष्ठ अभियंता हेमंत ने बताया कि शहर के लोगों को पानी की कोई दिक्कत न हो, इसके लिए पूरे प्रयास किए जा रहे हैं। दूसरे ट्यूबवेलों से पानी एकत्रित कर काम चलाया जा रहा है। नहर में अभी दो से तीन दिन बाद ही पानी पहुंचने की संभावना है। ऐसे में लोग पानी बर्बाद न करें। उन्होंने बताया कि पहले खुबड़ू हेड से शेड्यूल के अनुसार 12 मार्च को पानी छोड़ा जाना था लेकिन पानी नहीं छोड़ा गया। यदि 17 मार्च (सोमवार) की रात वहां से पानी छोड़ा जाता है तो 19 मार्च की शाम या सुबह तक रेवाड़ी जेएलएन नहर में पानी पहुंच जाएगा। इसके बाद टैंकों को भरने का काम शुरू किया जाएगा। ऐसा होने पर 21 मार्च से पानी की सप्लाई शुरू कर दी जाएगी।
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पांच वर्ष से पानी का संकट बरकरार
शहर में पेयजल की राशनिंग करीब पांच वर्ष से चल रही है। नहरी पानी का शेड्यूल पहले 16-16 दिन का था। यानी 16 दिन नहर में पानी आता था और 16 दिन नहर बंद रहती थी। अब 3 साल से शेड्यूल 16-24 का हो गया है। अब 16 दिन नहर में पानी आता है और 24 दिन बंद रहता है। पिछले माह 12 फरवरी को नहरी में पानी आना बंद हुआ था। ऐसे में जनस्वास्थ्य विभाग के पास अब इतनी स्टोरेज क्षमता नहीं है कि शहर वासियों को हर दिन पेयजल सप्लाई दी जा सके, इसलिए हर माह पेयजल राशनिंग की जाती है। सोमवार की शाम तक नहर में पानी आता है उसके बाद पुराने शहर को पेयजल सप्लाई की जाएगी।
नहरी पानी पर आधारित है आपूर्ति
शहर में पेयजल आपूर्ति की व्यवस्था नहरी पानी पर आधारित है। नहर के पानी को कालाका और लिसाना में बने वाटर टैंक में स्टोर किया जाता है। वहां से बूस्टिंग स्टेशन के माध्यम से शहर में पानी की आपूर्ति होती है। कालाका जलघर में बनाए गए 5 वाटर टैंकों से शहर के 70 फीसदी हिस्से में पेयजल आपूर्ति होती है। वहीं, लिसाना स्थित जलघर के तीन वाटर टैंकों से 30 फीसदी भाग में पानी की सप्लाई होती है। दोनों जलघरों से पूरे शहर को 15 से 20 दिन ही पानी आपूर्ति हो सकती है।
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वर्जन:
नहर में सोमवार की रात खूबड़ू हेड से पानी छोड़े जाने की संभावना है। यदि वहां से पानी छोड़ दिया जाता है तो शहरवासियों को नियमित पानी की आपूर्ति की जाएगी।-हेमंत कुमार, कनिष्ठ अभियंता, जनस्वास्थ्य विभाग।