{"_id":"5fac43788ebc3e5be50e9641","slug":"drinking-water-crisis-in-festive-season-only-five-days-of-remaining-water-even-after-rationing-rewari-news-rtk582317763","type":"story","status":"publish","title_hn":"त्योहारी सीजन में बढ़ा पेयजल संकट, राशनिंग के बाद भी महज पांच दिन का बचा पानी","category":{"title":"City & states","title_hn":"शहर और राज्य","slug":"city-and-states"}}
त्योहारी सीजन में बढ़ा पेयजल संकट, राशनिंग के बाद भी महज पांच दिन का बचा पानी
विज्ञापन
पानी नहीं आने से सूखी पड़ी जेएलएन नहर।
- फोटो : Rewari
रेवाड़ी। त्योहारी सीजन के दौरान शहर में पेयजल संकट बढ़ गया है। 6 नवंबर से जहां पर पानी एक दिन छोड़कर एक दिन दिया जा रहा था। अब कटौती दो दिन तक की कर दी गई है। ऐसे में दीपावली पर्व की तैयारी में लगे लोगों को परेशानी का सामना करना पड़ रहा है। कुछ लोगों को तो 700 रुपये तक का वाटर टैंक पानी खरीदकर काम चलाना पड़ रहा है।
शहर में 29 अक्तूबर को नहरी पानी सप्लाई बंद हो गई थी। जवाहर लाल नेहरू कैनाल के माध्यम से 16 दिन नहरी पानी आता है। 15 नवंबर तक नहरी पानी आने की संभावना थी, लेकिन अब बताया जा रहा है कि दो दिन बाद 17 तक पानी आ पाएगा। इसके चलते ही जन स्वास्थ्य विभाग की ओर से कालाका स्थित 90 लाख लीटर भंडारण क्षमता के पांच वाटर टैंक से राशनिंग शुरू कर दी गई थी। जन स्वास्थ्य विभाग की माने तो राशनिंग करने के बाद भी मुश्किल से 16 नवंबर तक पेयजल का काम चलाया जा सकता है। ऐसे में यदि नहरी पानी 17 तक भी नहीं आया तो शहर की करीब दो लाख आबादी के सामने पेयजल संकट और ज्यादा गहरा सकता है।
6 साल में जगह का निर्धारण तक नहीं कर सके
वर्ष 2014 के अंत में केंद्रीय मंत्री राव इंद्रजीत सिंह की ओर से सचिवालय में अधिकारियों की बैठक ली गई थी। पानी भंडारण की कमी को देखते हुए उस समय टैंक बनाने के आदेश दिए गए थे। लेकिन सिस्टम के हालात ऐसे हैं कि 6 साल बीत जाने के बाद भी वाटर टैंक निर्माण के लिए प्रशासन जगह चिह्नित नहीं कर पाया है। जबकि दो टैंक निर्माण के लिए सात करोड़ रुपये आवंटित हो चुके हैं। ऐसे में जब तक वाटर टैंक निर्माण का काम शुरू होगा, तब तक पेयजल की मांग और ज्यादा बढ़ चुकी है। सवाल है आखिर कब तक यूं ही सिस्टम का खामियाजा लोगों को भुगतना पड़ेगा।
विज्ञापन
गर्मी के समय और ज्यादा बढ़ जाता है पेयजल संकट
गर्मी के समय पर बीते सालों से प्रत्येक माह शहरवासियों को पेयजल संकट का सामना करना पड़ता है, लेकिन इस बार ठंड के मौसम व त्योहारी सीजन में भी परेशानी झेलनी पड़ रही है। एक ओर लोग घरों की साफ-सफाई में लगे हुए हैं, वहीं दूसरी ओर पानी की सप्लाई नहीं आने से आर्थिक मार भी पड़ रही है। क्योंकि लोगों को मूलभूत कार्यों के लिए भी पानी खरीदना पड़ रहा है।
कनिष्ठ अभियंता, पीएचईडी अजय कुमार ने बताया कि 29 अक्तूबर को नहरी पानी बंद हो गया था। अब 17 तक नहरी पानी आने की उम्मीद है। 6 नवंबर तक से एक दिन छोड़कर एक दिन पानी दिया जा रहा है। कुछ कॉलोनियों में दो दिन पानी नहीं आने का कारण पाइपलाइन का खराब होना था। उसको ठीक कर दिया गया है। 12 नवंबर से 15 तक त्योहार होने के चलते प्रतिदिन पानी सप्लाई दी जाएगी। यदि नहरी पानी आने में ओर ज्यादा देरी होती है तो परेशानी बढ़ सकती है। वाटर टैंक बनने के बाद भी स्थायी समाधान हो पायेगा।
विज्ञापन
शहर में 29 अक्तूबर को नहरी पानी सप्लाई बंद हो गई थी। जवाहर लाल नेहरू कैनाल के माध्यम से 16 दिन नहरी पानी आता है। 15 नवंबर तक नहरी पानी आने की संभावना थी, लेकिन अब बताया जा रहा है कि दो दिन बाद 17 तक पानी आ पाएगा। इसके चलते ही जन स्वास्थ्य विभाग की ओर से कालाका स्थित 90 लाख लीटर भंडारण क्षमता के पांच वाटर टैंक से राशनिंग शुरू कर दी गई थी। जन स्वास्थ्य विभाग की माने तो राशनिंग करने के बाद भी मुश्किल से 16 नवंबर तक पेयजल का काम चलाया जा सकता है। ऐसे में यदि नहरी पानी 17 तक भी नहीं आया तो शहर की करीब दो लाख आबादी के सामने पेयजल संकट और ज्यादा गहरा सकता है।
विज्ञापन
6 साल में जगह का निर्धारण तक नहीं कर सके
वर्ष 2014 के अंत में केंद्रीय मंत्री राव इंद्रजीत सिंह की ओर से सचिवालय में अधिकारियों की बैठक ली गई थी। पानी भंडारण की कमी को देखते हुए उस समय टैंक बनाने के आदेश दिए गए थे। लेकिन सिस्टम के हालात ऐसे हैं कि 6 साल बीत जाने के बाद भी वाटर टैंक निर्माण के लिए प्रशासन जगह चिह्नित नहीं कर पाया है। जबकि दो टैंक निर्माण के लिए सात करोड़ रुपये आवंटित हो चुके हैं। ऐसे में जब तक वाटर टैंक निर्माण का काम शुरू होगा, तब तक पेयजल की मांग और ज्यादा बढ़ चुकी है। सवाल है आखिर कब तक यूं ही सिस्टम का खामियाजा लोगों को भुगतना पड़ेगा।
विज्ञापन
गर्मी के समय और ज्यादा बढ़ जाता है पेयजल संकट
गर्मी के समय पर बीते सालों से प्रत्येक माह शहरवासियों को पेयजल संकट का सामना करना पड़ता है, लेकिन इस बार ठंड के मौसम व त्योहारी सीजन में भी परेशानी झेलनी पड़ रही है। एक ओर लोग घरों की साफ-सफाई में लगे हुए हैं, वहीं दूसरी ओर पानी की सप्लाई नहीं आने से आर्थिक मार भी पड़ रही है। क्योंकि लोगों को मूलभूत कार्यों के लिए भी पानी खरीदना पड़ रहा है।
कनिष्ठ अभियंता, पीएचईडी अजय कुमार ने बताया कि 29 अक्तूबर को नहरी पानी बंद हो गया था। अब 17 तक नहरी पानी आने की उम्मीद है। 6 नवंबर तक से एक दिन छोड़कर एक दिन पानी दिया जा रहा है। कुछ कॉलोनियों में दो दिन पानी नहीं आने का कारण पाइपलाइन का खराब होना था। उसको ठीक कर दिया गया है। 12 नवंबर से 15 तक त्योहार होने के चलते प्रतिदिन पानी सप्लाई दी जाएगी। यदि नहरी पानी आने में ओर ज्यादा देरी होती है तो परेशानी बढ़ सकती है। वाटर टैंक बनने के बाद भी स्थायी समाधान हो पायेगा।