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डोर-टू-डोर कचरा कलेक्शन ठेकेदार की कॉन्ट्रैक्ट अवधि पूरी हुए एक माह बीता, बिगड़ सकती है 31 वार्ड की व्यवस्था
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शहर के 31 वार्ड के 30 हजार से अधिक घरों से डोर-टू-डोर कचरा कलेक्शन करने वाली एजेंसी की कांट्रेक्ट अवधि पूरी हुए एक माह से ज्यादा का समय बीत चुका है, लेकिन जिम्मेदार अभी तक नई व्यवस्था नहीं कर पाए हैं। हालांकि एक अगस्त से एजेंसी को एक माह का विस्तार दे दिया गया था, लेकिन अब दूसरा माह शुरू होने से कचरा कलेक्शन की व्यवस्था पटरी से उतर सकती है।
बता दें कि दिल्ली-जयपुर हाईवे स्थित गांव रामसिंहपुरा की 14.6 एकड़ जमीन पर ठोस कचरा निष्पादन संयंत्र लगाया जाना था। यहां पर महेंद्रगढ़, नारनौल, अटेली की नगर पालिकाओं का कचरे का भी निस्तारण किया जाना है। 60 करोड़ रुपये वाले इस प्रोजेक्ट में सभी औपचारिकताएं पूरी होने के बाद भी जिम्मेदार एक ठेकेदार को नहीं ढूंढ पा रहे हैं। क्योंकि कचरा निष्पादन करने वाली एजेंसी को ही डोर-टू-डोर कचरा कलेक्शन करना है।
रामसिंहपुरा में कचरा निष्पादन नहीं होने से बिगड़ रहे हालात
दिल्ली जयपुर हाईवे स्थित रामसिंहपुरा गांव की 14.6 एकड़ जमीन निर्धारित की गई थी, बीते 4 साल से यहां पर कचरा भी डाला जा रहा है। कचरा पहाड़ का रूप लेता जा रहा है, लेकिन सिस्टम ऐसा है कि यहां पर आज तक कचरा निस्तारण षड्यंत्र नहीं लगाया जा सका। ऐसे में यहां पड़ा कचरा आसपास के ग्रामीणों की सांस पर आफत बना हुआ है, ग्रामीण हवा चलने पर बदबू से परेशान रहते हैं। वहीं आग लगाए जाने के कारण जिले की हवा में जहर घुल रहा है। प्रदूषण नियंत्रण विभाग ने बावल नपा पर कचरा जलाए जाने के आरोप में जुर्माना भी लगा चुका है। हालात ऐसे हैं कि मानेसर तक का कचरा रामसिंहपुरा में डाला जा रहा है।
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बिना सेग्रीगेशन के ही रामसिंहपुरा पहुंचा जा रहा कचरा
नगर परिषद की ओर 9 माह पहले जो टेंडर दिया गया था, उसके तहत कचरा कलेक्शन गाड़ी में गीला व सूखा कचरा डालने की अलग से व्यवस्था की गई थी। लेकिन एजेंसी की ओर से गाड़ी पर चालक के अलावा सहायक को नियुक्त नहीं किया। चालक भी गाड़ी से उतरकर नीचे नहीं आता और लोग गीला व सूखा कचरा एक ही जगह डाल देते हैं। इसके चलते भूजल से लेकर जिला की हवा खराब हो रही है।
टेंडर नहीं होने तक पुरानी एजेंसी से करवाएंगे काम: ईओ
नगर परिषद ईओ विजपाल यादव ने कहा कि रामसिंहपुरा में कचरा निस्तारण संयंत्र के टेंडर आदि का काम उच्चाधिकारियों की ओर से ही किया जा रहा है। जब तक टेंडर प्रक्रिया पूरी नहीं होगी, पुरानी एजेंसी से ही काम करवाया जाएगा। शहरवासियों को किसी तरह की परेशानी नहीं होने दी जाएगी। गीला व सूखा कचरा अलग-अलग डालने के लिए लोगों को भी सहयोग करना चाहिए।
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बता दें कि दिल्ली-जयपुर हाईवे स्थित गांव रामसिंहपुरा की 14.6 एकड़ जमीन पर ठोस कचरा निष्पादन संयंत्र लगाया जाना था। यहां पर महेंद्रगढ़, नारनौल, अटेली की नगर पालिकाओं का कचरे का भी निस्तारण किया जाना है। 60 करोड़ रुपये वाले इस प्रोजेक्ट में सभी औपचारिकताएं पूरी होने के बाद भी जिम्मेदार एक ठेकेदार को नहीं ढूंढ पा रहे हैं। क्योंकि कचरा निष्पादन करने वाली एजेंसी को ही डोर-टू-डोर कचरा कलेक्शन करना है।
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रामसिंहपुरा में कचरा निष्पादन नहीं होने से बिगड़ रहे हालात
दिल्ली जयपुर हाईवे स्थित रामसिंहपुरा गांव की 14.6 एकड़ जमीन निर्धारित की गई थी, बीते 4 साल से यहां पर कचरा भी डाला जा रहा है। कचरा पहाड़ का रूप लेता जा रहा है, लेकिन सिस्टम ऐसा है कि यहां पर आज तक कचरा निस्तारण षड्यंत्र नहीं लगाया जा सका। ऐसे में यहां पड़ा कचरा आसपास के ग्रामीणों की सांस पर आफत बना हुआ है, ग्रामीण हवा चलने पर बदबू से परेशान रहते हैं। वहीं आग लगाए जाने के कारण जिले की हवा में जहर घुल रहा है। प्रदूषण नियंत्रण विभाग ने बावल नपा पर कचरा जलाए जाने के आरोप में जुर्माना भी लगा चुका है। हालात ऐसे हैं कि मानेसर तक का कचरा रामसिंहपुरा में डाला जा रहा है।
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बिना सेग्रीगेशन के ही रामसिंहपुरा पहुंचा जा रहा कचरा
नगर परिषद की ओर 9 माह पहले जो टेंडर दिया गया था, उसके तहत कचरा कलेक्शन गाड़ी में गीला व सूखा कचरा डालने की अलग से व्यवस्था की गई थी। लेकिन एजेंसी की ओर से गाड़ी पर चालक के अलावा सहायक को नियुक्त नहीं किया। चालक भी गाड़ी से उतरकर नीचे नहीं आता और लोग गीला व सूखा कचरा एक ही जगह डाल देते हैं। इसके चलते भूजल से लेकर जिला की हवा खराब हो रही है।
टेंडर नहीं होने तक पुरानी एजेंसी से करवाएंगे काम: ईओ
नगर परिषद ईओ विजपाल यादव ने कहा कि रामसिंहपुरा में कचरा निस्तारण संयंत्र के टेंडर आदि का काम उच्चाधिकारियों की ओर से ही किया जा रहा है। जब तक टेंडर प्रक्रिया पूरी नहीं होगी, पुरानी एजेंसी से ही काम करवाया जाएगा। शहरवासियों को किसी तरह की परेशानी नहीं होने दी जाएगी। गीला व सूखा कचरा अलग-अलग डालने के लिए लोगों को भी सहयोग करना चाहिए।