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Rewari News: बढ़ती ठंड में कुत्ते हुए आक्रामक
Tue, 17 Dec 2024 11:34 PM IST
रोहतक ब्यूरो
संवाद न्यूज एजेंसी, रेवाड़ी
संवाद न्यूज एजेंसी, रेवाड़ी
Updated Tue, 17 Dec 2024 11:34 PM IST
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फोटो: 01रेवाड़ी। नागरिक अस्पताल में मरीज को रेबीज का टीका लगवाती स्वास्थ्य कर्मी। संवाद
संवाद न्यूज एजेंसी
रेवाड़ी। ठंड में कुत्तों के काटने के मामले बढ़ रहे हैं। इसकी वजह सर्द मौसम में कुत्तों के स्वभाव में बदलाव आना है। जिला नागरिक अस्पताल में एंटी रेबीज वैक्सीन (एआरवी) लगवाने के लिए प्रतिदिन 10 से 12 लोग पहुंच रहे हैं।
शहर के गुर्जरवाड़ा, वैद्यवाड़ा, माता चौक, खासापुरा, पुरानी तहसील, जैनपुरी, पुरानी सब्जी मंडी, नाईवाली चौक आदि स्थानों पर कुत्तों और बंदरों का उत्पात जारी है। आए दिन बंदर और कुत्ते लोगों को काटकर घायल कर रहे हैं। चिकित्सकों के अनुसार ठंड के मौसम में कुत्ते और बंदरों के व्यवहार में बदलाव आता है जिससे वे लोगों को काट लेते हैं। यही वजह है कि कुत्तों के काटने के मामले बढ़े हैं। जिला नागरिक अस्पताल में रोजाना करीब 10 से 12 लोग एआरवी लगवाने के लिए आ रहे हैं। रविवार को अवकाश होने के कारण सोमवार को एआरवी लगवाने के लिए 20 लोग पहुंचे थे। पिछले एक सप्ताह में नागरिक अस्पताल में कुत्ते और बंदर के काटने के करीब 90 मामले आ चुके हैं। चिकित्सकों ने बताया कि कुत्ते या बंदर के काटने पर सबसे पहले घाव को साबुन से 15 मिनट तक साफ करें। जहां पर कुत्ते ने काटा है, वहां टांके न लगाएं, बल्कि घाव को खुला छोड़ देना चाहिए। कुत्ते के काटने के बाद एआरवी लगवा लेना चाहिए, ताकि इसे बढ़ने से रोका जा सके। कुत्ते, बंदर, बिल्ली आदि जानवरों के काटने के 24 घंटे में यह टीका लगवाना आवश्यक होता है। शहरवासी प्रशासन से कुत्ते व बंदरों को पकड़ने की मांग कर चुके हैं। इसके बाद भी कुत्ते व बंदर नहीं पकड़े जा रहे हैं।
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रविवार को होती है परेशानी
जिले में कुत्तों के काटने की घटनाएं तेजी से बढ़ी हैं, लेकिन इससे निपटने की तैयारी आधी-अधूरी है। जिला अस्पताल हो या सीएचसी-पीएचसी, कहीं भी रविवार को इंजेक्शन नहीं लगता है। अन्य छुट्टी वाले दिन भी यही स्थिति है, जबकि कुत्ता काटने की 24 घंटे के भीतर एंटी रेबीज वैक्सीन लगवाना जरूरी होता है। ऐसे में अस्पतालों से मरीजों को वापस लौटना पड़ता है। सक्षम लोग बाजार से 300 से 400 रुपये खर्च कर खरीद लेते हैं।
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वर्जन
कुत्तों के शरीर की बनावट ऐसी होती है कि उन्हें कभी भी पसीना नहीं आता है, इसलिए वह अपने शरीर को ठंडा रखने के लिए नाली या पानी भरे हुए स्थानों में जाकर बैठते हैं। सर्दी के मौसम उनका हीट पीरियड होता है, जिसमें वह आक्रामक हो जाते हैं। - डॉ. विनोद यादव, पशुपालन विभाग
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वर्जन
अस्पताल में पर्याप्त मात्रा में एंटी रैबीज इंजेक्शन उपलब्ध है। ठंड में कुत्तों के व्यवहार में बदलाव आ जाता है और वे लोगों को काटते हैं। ऐसे में कुत्तों से समुचित दूरी बनाकर चलना चाहिए। कुत्तों से छेड़छाड़ न करें। - डॉ. गौरव यादव, चिकित्सक, नागरिक अस्पताल रेवाड़ी।
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रेवाड़ी। ठंड में कुत्तों के काटने के मामले बढ़ रहे हैं। इसकी वजह सर्द मौसम में कुत्तों के स्वभाव में बदलाव आना है। जिला नागरिक अस्पताल में एंटी रेबीज वैक्सीन (एआरवी) लगवाने के लिए प्रतिदिन 10 से 12 लोग पहुंच रहे हैं।
शहर के गुर्जरवाड़ा, वैद्यवाड़ा, माता चौक, खासापुरा, पुरानी तहसील, जैनपुरी, पुरानी सब्जी मंडी, नाईवाली चौक आदि स्थानों पर कुत्तों और बंदरों का उत्पात जारी है। आए दिन बंदर और कुत्ते लोगों को काटकर घायल कर रहे हैं। चिकित्सकों के अनुसार ठंड के मौसम में कुत्ते और बंदरों के व्यवहार में बदलाव आता है जिससे वे लोगों को काट लेते हैं। यही वजह है कि कुत्तों के काटने के मामले बढ़े हैं। जिला नागरिक अस्पताल में रोजाना करीब 10 से 12 लोग एआरवी लगवाने के लिए आ रहे हैं। रविवार को अवकाश होने के कारण सोमवार को एआरवी लगवाने के लिए 20 लोग पहुंचे थे। पिछले एक सप्ताह में नागरिक अस्पताल में कुत्ते और बंदर के काटने के करीब 90 मामले आ चुके हैं। चिकित्सकों ने बताया कि कुत्ते या बंदर के काटने पर सबसे पहले घाव को साबुन से 15 मिनट तक साफ करें। जहां पर कुत्ते ने काटा है, वहां टांके न लगाएं, बल्कि घाव को खुला छोड़ देना चाहिए। कुत्ते के काटने के बाद एआरवी लगवा लेना चाहिए, ताकि इसे बढ़ने से रोका जा सके। कुत्ते, बंदर, बिल्ली आदि जानवरों के काटने के 24 घंटे में यह टीका लगवाना आवश्यक होता है। शहरवासी प्रशासन से कुत्ते व बंदरों को पकड़ने की मांग कर चुके हैं। इसके बाद भी कुत्ते व बंदर नहीं पकड़े जा रहे हैं।
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रविवार को होती है परेशानी
जिले में कुत्तों के काटने की घटनाएं तेजी से बढ़ी हैं, लेकिन इससे निपटने की तैयारी आधी-अधूरी है। जिला अस्पताल हो या सीएचसी-पीएचसी, कहीं भी रविवार को इंजेक्शन नहीं लगता है। अन्य छुट्टी वाले दिन भी यही स्थिति है, जबकि कुत्ता काटने की 24 घंटे के भीतर एंटी रेबीज वैक्सीन लगवाना जरूरी होता है। ऐसे में अस्पतालों से मरीजों को वापस लौटना पड़ता है। सक्षम लोग बाजार से 300 से 400 रुपये खर्च कर खरीद लेते हैं।
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कुत्तों के शरीर की बनावट ऐसी होती है कि उन्हें कभी भी पसीना नहीं आता है, इसलिए वह अपने शरीर को ठंडा रखने के लिए नाली या पानी भरे हुए स्थानों में जाकर बैठते हैं। सर्दी के मौसम उनका हीट पीरियड होता है, जिसमें वह आक्रामक हो जाते हैं। - डॉ. विनोद यादव, पशुपालन विभाग
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अस्पताल में पर्याप्त मात्रा में एंटी रैबीज इंजेक्शन उपलब्ध है। ठंड में कुत्तों के व्यवहार में बदलाव आ जाता है और वे लोगों को काटते हैं। ऐसे में कुत्तों से समुचित दूरी बनाकर चलना चाहिए। कुत्तों से छेड़छाड़ न करें। - डॉ. गौरव यादव, चिकित्सक, नागरिक अस्पताल रेवाड़ी।