{"_id":"6a8f2d4c43718b0fce01f461","slug":"do-not-ignore-child-abuse-dr-renu-solkhe-rewari-news-c-198-1-sroh1010-244330-2026-08-26","type":"story","status":"publish","title_hn":"बच्चों के साथ दुर्व्यवहार को नजरअंदाज न करें : डॉ. रेनू सोलखे","category":{"title":"City & states","title_hn":"शहर और राज्य","slug":"city-and-states"}}
बच्चों के साथ दुर्व्यवहार को नजरअंदाज न करें : डॉ. रेनू सोलखे
Wed, 26 Aug 2026 11:45 PM IST
रोहतक ब्यूरो
संवाद न्यूज एजेंसी, रेवाड़ी
संवाद न्यूज एजेंसी, रेवाड़ी
Updated Wed, 26 Aug 2026 11:45 PM IST
विज्ञापन
रेवाड़ी। हरियाणा राज्य विधिक सेवा प्राधिकरण के निर्देश पर जिला विधिक सेवा प्राधिकरण (डीएलएसए) की ओर से शहर के दिल्ली रोड स्थित एक निजी स्कूल में पॉक्सो जागरूकता शिविर का आयोजन किया गया। शिविर की अध्यक्षता जिला विधिक सेवा प्राधिकरण की सचिव एवं मुख्य न्यायिक दंडाधिकारी डॉ. रेनू सोलखे ने की।
डॉ. रेनू सोलखे ने विद्यार्थियों एवं शिक्षकों को बच्चों के यौन अपराधों से संरक्षण अधिनियम (पॉस्को एक्ट) के प्रावधानों के बारे में जानकारी दी। उन्होंने बच्चों के अधिकारों, नशे से होने वाले दुष्प्रभावों तथा बच्चों की साइबर सुरक्षा के संबंध में भी जागरूक किया।
उन्होंने कहा कि बच्चों के साथ किसी भी प्रकार के दुर्व्यवहार अथवा शोषण को नजरअंदाज नहीं किया जाना चाहिए। बच्चों को अपने साथ होने वाली किसी भी अनुचित घटना के बारे में अपने अभिभावकों, शिक्षकों या किसी विश्वसनीय व्यक्ति से खुलकर बात करनी चाहिए। उन्होंने बच्चों की सहायता के लिए चाइल्ड हेल्पलाइन नंबर 1098 की जानकारी भी दी।
विज्ञापन
उन्होंने ने विद्यार्थियों एवं शिक्षकों को निशुल्क कानूनी सहायता, जिला विधिक सेवा प्राधिकरण के कार्यों तथा बच्चों के अधिकारों के संरक्षण में विधिक सेवाओं की भूमिका के बारे में भी जानकारी दी। उन्होंने सभी से बाल शोषण के विरुद्ध आवाज उठाने और बच्चों की सुरक्षा सुनिश्चित करने में सक्रिय भूमिका निभाने का आह्वान किया।
विज्ञापन
डॉ. रेनू सोलखे ने विद्यार्थियों एवं शिक्षकों को बच्चों के यौन अपराधों से संरक्षण अधिनियम (पॉस्को एक्ट) के प्रावधानों के बारे में जानकारी दी। उन्होंने बच्चों के अधिकारों, नशे से होने वाले दुष्प्रभावों तथा बच्चों की साइबर सुरक्षा के संबंध में भी जागरूक किया।
विज्ञापन
उन्होंने कहा कि बच्चों के साथ किसी भी प्रकार के दुर्व्यवहार अथवा शोषण को नजरअंदाज नहीं किया जाना चाहिए। बच्चों को अपने साथ होने वाली किसी भी अनुचित घटना के बारे में अपने अभिभावकों, शिक्षकों या किसी विश्वसनीय व्यक्ति से खुलकर बात करनी चाहिए। उन्होंने बच्चों की सहायता के लिए चाइल्ड हेल्पलाइन नंबर 1098 की जानकारी भी दी।
विज्ञापन
उन्होंने ने विद्यार्थियों एवं शिक्षकों को निशुल्क कानूनी सहायता, जिला विधिक सेवा प्राधिकरण के कार्यों तथा बच्चों के अधिकारों के संरक्षण में विधिक सेवाओं की भूमिका के बारे में भी जानकारी दी। उन्होंने सभी से बाल शोषण के विरुद्ध आवाज उठाने और बच्चों की सुरक्षा सुनिश्चित करने में सक्रिय भूमिका निभाने का आह्वान किया।