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Rewari News: कुत्ते-बंदर के काटने पर लापरवाही न करें, तुरंत इलाज कराएं
Sun, 27 Sep 2026 11:44 PM IST
रोहतक ब्यूरो
संवाद न्यूज एजेंसी, रेवाड़ी
संवाद न्यूज एजेंसी, रेवाड़ी
Updated Sun, 27 Sep 2026 11:44 PM IST
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रेवाड़ी। जिले में कुत्ते और बंदरों के काटने से लोगों के जख्मी होने के मामले बढ़ते जा रहे हैं। अस्पतालों में रोजाना 15 से 20 लोग कुत्तों के काटने के बाद उपचार के लिए पहुंच रहे हैं। वहीं, बंदरों के काटने के भी प्रतिदिन चार से पांच मामले सामने आ रहे हैं। ऐसी घटनाओं पर अंकुश लगाने के लिए लोगों को जागरूक करने के उद्देश्य से 28 सितंबर को विश्व रेबीज दिवस मनाया जाता है।
सीएमओ डॉ. नरेंद्र दहिया ने बताया कि रेबीज संक्रमित जानवर की लार के माध्यम से फैलने वाला वायरल संक्रमण है। आमतौर पर संक्रमित कुत्ते के काटने से इसके फैलने का खतरा रहता है। बंदर, बिल्ली और अन्य स्तनधारी जानवरों के काटने या खरोंचने से भी संक्रमण की आशंका हो सकती है। बीमारी से बचाव के लिए जानवर के काटने के बाद समय पर चिकित्सकीय सलाह लेना जरूरी है।
कुत्ते या बंदर के काटने अथवा खरोंचने पर सबसे पहले प्रभावित स्थान को साबुन और बहते पानी से अच्छी तरह धोना चाहिए। इसके बाद बिना देरी किए अस्पताल या स्वास्थ्य केंद्र पहुंचकर चिकित्सकीय सलाह लेनी चाहिए। चिकित्सक की सलाह के अनुसार एंटी रेबीज वैक्सीन और जरूरत पड़ने पर अन्य उपचार दिया जाता है। रेबीज से बचाव के लिए पालतू कुत्तों का समय पर टीकाकरण कराना भी जरूरी है।
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रेबीज एक गंभीर वायरल बीमारी
डॉ. दहिया ने बताया कि रेबीज एक गंभीर वायरल बीमारी है, जो संक्रमित जानवर की लार के संपर्क में आने से फैल सकती है। इसका सबसे आम कारण संक्रमित कुत्ते का काटना है। बंदर, बिल्ली और अन्य स्तनधारी जानवरों के काटने या खरोंचने से भी संक्रमण का खतरा हो सकता है। जानवर के काटने या खरोंचने पर घाव को तुरंत साबुन और बहते पानी से अच्छी तरह धोना चाहिए। इसके बाद बिना देरी किए अस्पताल पहुंचकर चिकित्सकीय सलाह लेनी चाहिए। डॉक्टर की सलाह के अनुसार एंटी-रेबीज वैक्सीन लगवाना जरूरी है। समय पर उपचार और टीकाकरण से रेबीज के खतरे से बचाव किया जा सकता है।
काटने के बाद न बरतें लापरवाही
सीएमओ डॉ. नरेंद्र दहिया ने बताया कि जानवर के काटने के बाद घाव छोटा होने या खून कम निकलने को सामान्य मानकर उपचार में देरी नहीं करनी चाहिए। समय पर उपचार और वैक्सीनेशन से रेबीज के खतरे को रोका जा सकता है। विश्व रेबीज दिवस पर स्वास्थ्य विशेषज्ञों ने लोगों से अपील की है कि जानवर के काटने या खरोंचने की स्थिति में घरेलू उपचार के भरोसे न रहें और तुरंत स्वास्थ्य केंद्र पर संपर्क करें।
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सीएमओ डॉ. नरेंद्र दहिया ने बताया कि रेबीज संक्रमित जानवर की लार के माध्यम से फैलने वाला वायरल संक्रमण है। आमतौर पर संक्रमित कुत्ते के काटने से इसके फैलने का खतरा रहता है। बंदर, बिल्ली और अन्य स्तनधारी जानवरों के काटने या खरोंचने से भी संक्रमण की आशंका हो सकती है। बीमारी से बचाव के लिए जानवर के काटने के बाद समय पर चिकित्सकीय सलाह लेना जरूरी है।
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कुत्ते या बंदर के काटने अथवा खरोंचने पर सबसे पहले प्रभावित स्थान को साबुन और बहते पानी से अच्छी तरह धोना चाहिए। इसके बाद बिना देरी किए अस्पताल या स्वास्थ्य केंद्र पहुंचकर चिकित्सकीय सलाह लेनी चाहिए। चिकित्सक की सलाह के अनुसार एंटी रेबीज वैक्सीन और जरूरत पड़ने पर अन्य उपचार दिया जाता है। रेबीज से बचाव के लिए पालतू कुत्तों का समय पर टीकाकरण कराना भी जरूरी है।
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रेबीज एक गंभीर वायरल बीमारी
डॉ. दहिया ने बताया कि रेबीज एक गंभीर वायरल बीमारी है, जो संक्रमित जानवर की लार के संपर्क में आने से फैल सकती है। इसका सबसे आम कारण संक्रमित कुत्ते का काटना है। बंदर, बिल्ली और अन्य स्तनधारी जानवरों के काटने या खरोंचने से भी संक्रमण का खतरा हो सकता है। जानवर के काटने या खरोंचने पर घाव को तुरंत साबुन और बहते पानी से अच्छी तरह धोना चाहिए। इसके बाद बिना देरी किए अस्पताल पहुंचकर चिकित्सकीय सलाह लेनी चाहिए। डॉक्टर की सलाह के अनुसार एंटी-रेबीज वैक्सीन लगवाना जरूरी है। समय पर उपचार और टीकाकरण से रेबीज के खतरे से बचाव किया जा सकता है।
काटने के बाद न बरतें लापरवाही
सीएमओ डॉ. नरेंद्र दहिया ने बताया कि जानवर के काटने के बाद घाव छोटा होने या खून कम निकलने को सामान्य मानकर उपचार में देरी नहीं करनी चाहिए। समय पर उपचार और वैक्सीनेशन से रेबीज के खतरे को रोका जा सकता है। विश्व रेबीज दिवस पर स्वास्थ्य विशेषज्ञों ने लोगों से अपील की है कि जानवर के काटने या खरोंचने की स्थिति में घरेलू उपचार के भरोसे न रहें और तुरंत स्वास्थ्य केंद्र पर संपर्क करें।