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Rewari News: दस्तावेज बनवाने के लिए थाली बजाते लघु सचिवालय पहुंचे दिव्यांग मां-बेटा
Fri, 07 Jul 2023 12:44 AM IST
रोहतक ब्यूरो
संवाद न्यूज एजेंसी, रेवाड़ी
संवाद न्यूज एजेंसी, रेवाड़ी
Updated Fri, 07 Jul 2023 12:44 AM IST
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थाली बजाते हुए डीसी के पास जाती बुजुर्ग महिला। संवाद
रेवाड़ी। जिले में परिवार पहचान पत्र पीपीपी सहित अन्य दस्तावेज बनवाने के लिए अनेक लोग दर-दर की ठोकरें खा रहे हैं। वहीं, अधिकारी दस्तावेज न होने का हवाला देकर लौटा रहे हैं। ऐसा ही एक मामला गांव खोरी के सामने आया है। खोरी निवासी दिव्यांग मां-बेटे अपनी पहचान के दस्तावेज के लिए भटक रहे हैं। दोनों के पास किसी तरह का कोई दस्तावेज नहीं है। इसके चलते उनका पीपीपी भी नहीं बन पाया। घर में कमाई का कोई साधन नहीं है। विकलांग होने के बावजूद उन्हें किसी भी सरकारी सेवा का लाभ नहीं मिल रहा। वीरवार को दोनों मां-बेटे चम्मच से थाली बजाते हुए जिला सचिवालय में डीसी के पास मिलने पहुंचे।
मूलरूप से जिले के गांव बेरली निवासी महेन्द्र सिंह (49) ने बताया कि उनके पिता का निधन हो चुका है। उनकी मां रामादेवी की उम्र करीब 70 साल है। पिता के निधन के कुछ समय बाद ही वह अपने मां के साथ मामा के घर खोरी में आ गए और तभी से यहीं पर रहते हैं। मां पिछले 20 वर्षों से तो वह खुद 4 वर्षों से दिव्यांग हैं। दोनों की आंखों की रोशनी चली गई है। उनके पास आय का कोई साधन नहीं है। महेन्द्र अपने एडवोकेट के जरिए डीसी मोहम्मद इमरान रजा से मिलने पहुंचे। महेन्द्र सिंह ने बताया कि वह पढ़ा-लिखा नहीं होने के कारण आज तक न कोई वोटिंग कार्ड और न ही किसी प्रकार का अन्य पहचान पत्र बनवा पाया। न ही उनके परिवार का राशन कार्ड बना हुआ है। इतना ही नहीं दिव्यांग होने के बावजूद उनके पास कोई प्रमाणपत्र भी नहीं है। दस्तावेज नहीं होने के कारण पेंशन भी नहीं बन रही है।
महेन्द्र सिंह ने डीसी से आधार कार्ड, परिवार पहचान पत्र, राशन कार्ड, दिव्यांग सर्टिफिकेट और पेंशन बनवाने के लिए गुहार लगाई है। डीसी ने आश्वासन दिया कि उनकी हर संभव मदद की जाएगी। साथ ही उन्हें एडीसी के पास कार्रवाई के लिए भेज दिया है।
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मूलरूप से जिले के गांव बेरली निवासी महेन्द्र सिंह (49) ने बताया कि उनके पिता का निधन हो चुका है। उनकी मां रामादेवी की उम्र करीब 70 साल है। पिता के निधन के कुछ समय बाद ही वह अपने मां के साथ मामा के घर खोरी में आ गए और तभी से यहीं पर रहते हैं। मां पिछले 20 वर्षों से तो वह खुद 4 वर्षों से दिव्यांग हैं। दोनों की आंखों की रोशनी चली गई है। उनके पास आय का कोई साधन नहीं है। महेन्द्र अपने एडवोकेट के जरिए डीसी मोहम्मद इमरान रजा से मिलने पहुंचे। महेन्द्र सिंह ने बताया कि वह पढ़ा-लिखा नहीं होने के कारण आज तक न कोई वोटिंग कार्ड और न ही किसी प्रकार का अन्य पहचान पत्र बनवा पाया। न ही उनके परिवार का राशन कार्ड बना हुआ है। इतना ही नहीं दिव्यांग होने के बावजूद उनके पास कोई प्रमाणपत्र भी नहीं है। दस्तावेज नहीं होने के कारण पेंशन भी नहीं बन रही है।
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महेन्द्र सिंह ने डीसी से आधार कार्ड, परिवार पहचान पत्र, राशन कार्ड, दिव्यांग सर्टिफिकेट और पेंशन बनवाने के लिए गुहार लगाई है। डीसी ने आश्वासन दिया कि उनकी हर संभव मदद की जाएगी। साथ ही उन्हें एडीसी के पास कार्रवाई के लिए भेज दिया है।
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