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Rewari News: बीपीएल राशन कार्ड नहीं बनने पर कोर्ट पहुंची दिव्यांग पूनम

Wed, 02 Jul 2025 12:50 AM IST
रोहतक ब्यूरो संवाद न्यूज एजेंसी, रेवाड़ी
संवाद न्यूज एजेंसी, रेवाड़ी Updated Wed, 02 Jul 2025 12:50 AM IST
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Divyaang Poonam reached court after BPL ration card was not made
फोटो : 24अपनी समस्या बताती पूनम देवी और उसके पति धर्मेंद्र। स्रोत : ग्रामीण
संवाद न्यूज एजेंसी
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रेवाड़ी। बीपीएल राशन कार्ड नहीं बनने पर आंखों से सौ फीसदी दिव्यांग पूनम देवी ने न्यायालय का दरवाजा खटखटाया है। उसके पास न रहने के लिए उचित मकान है और न ही जीवन यापन करने के लिए कोई आय का स्रोत है।
पूनम देवी पत्नी धर्मेंद्र रामसिंहपुरा की रहने वाली है। उसके पति को भी शाम को दिखाई देना बंद हो जाता है। परिवार में सिर्फ 2 बच्चे हैं। रहने के लिए उचित मकान नहीं है ना ही जीवन यापन करने के लिए आय का कोई स्रोत है।
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वर्ष 2016 से पहले पीड़ित पूनम देवी बीपीएल राशन और दिव्यांग पेंशन के लिए सरकारी कार्यालयों के चक्कर लगा कर थक चुकी है। उस दौरान किसी ने पीड़ित पूनम को कैलाश चंद एडवोकेट के पास पहुंचाया। इसके बाद कैलाश चंद के सहयोग से पीड़िता का गुलाबी राशन कार्ड और दिव्यांग पेंशन बन पाई थी।
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वर्ष 2020 में हरियाणा सरकार ने परिवार पहचान पत्र के आधार पर आमजन के बीपीएल राशन कार्ड और अन्य सरकारी योजनाएं देना शुरू किया।
पूनम देवी के परिवार का गुलाबी बीपीएल राशन कार्ड काट कर पीला राशन कार्ड जारी कर दिया गया। साथ ही 35 किलो अनाज से घटाकर 20 किलो अनाज देना शुरू कर दिया, जो अब वर्ष 2025 मई माह तक मिलता आ रहा था।
जून 2025 में पीड़िता अपने राशन कार्ड का अनाज लेने राशन डिपो पर पहुंची तो पता चला कि उसके परिवार का राशन कार्ड काट दिया है, पीड़िता तुरंत सीएसी सेंटर पर पहुंची तो पता चला कि सरकार ने उसके परिवार पहचान पत्र में 4 पहिया वाहन दिखाया हुआ है, जबकि उसके परिवार में कोई भी 4 पहिया वाहन नहीं है।
पीड़िता 16 जून को एडवोकेट कैलाश चंद के पास पहुंची और अपनी पीड़ा बयान की। कैलाश चंद ने हरियाणा सरकार को ईमेल के माध्यम से पत्र भेजा। समाधान शिविर में पीड़िता को पेश कर बीपीएल राशन कार्ड बहाल करने का आग्रह किया। इसके बाद भी कोई कार्रवाई नहीं की गई।

अब पीड़िता के पास ओर कोई रास्ता नजर नहीं आ रहा था तो 1 जुलाई को छुट्टियां पूरी होने के बाद कोर्ट खुले तो बिना किसी देरी के कैलाश चंद एडवोकेट ने जिला न्यायालय के पीड़िता का केस दायर कर दिया। पीड़िता ने कहा कि अब सिर्फ न्यायालय पर ही भरोसा है कि न्याय मिले और दोबारा से उसके परिवार को अनाज मिलना शुरू हो पाएगा।
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