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Rewari News: अस्पतालों में बढ़ रहे डेंगू, मलेरिया और वायरल के मरीज
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फोटो: 04रेवाड़ी। नागरिक अस्पताल में बच्चों की ओपीडी के बाहर लगी मरीजों की भीड़। संवाद
रेवाड़ी। बदलते मौसम ने लोगों की सेहत पर बुरा असर डालना शुरू कर दिया है। दिन में गर्मी और रात में ठंडक के कारण रोग प्रतिरोधक क्षमता कमजोर पड़ रही है जिससे लोग वायरल, डेंगू, मलेरिया और टाइफाइड जैसी बीमारियों की चपेट में आ रहे हैं।
जिला नागरिक अस्पताल समेत निजी क्लीनिकों में इन दिनों बुखार के मरीजों की संख्या तेजी से बढ़ी है। डॉक्टरों के अनुसार मौसमी संक्रमण का असर बच्चों से लेकर बुजुर्गों तक पर दिखाई दे रहा है।
अस्पताल से मिली जानकारी के अनुसार, पिछले एक सप्ताह में बुखार से पीड़ित मरीजों की संख्या में करीब 30 से 40 प्रतिशत तक की बढ़ोतरी दर्ज की गई है। नागरिक अस्पताल की ओपीडी में हर दिन बड़ी संख्या में लोग जांच और उपचार के लिए पहुंच रहे हैं। मरीजों में तेज बुखार, सिर दर्द, थकान, जोड़ों में दर्द और उल्टी जैसी शिकायतें सामान्य हैं। डॉक्टरों का कहना है कि ऐसे मरीजों को ठीक होने में पांच से सात दिन तक का समय लग रहा है।
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वायरल बुखार से ओपीडी में हर दूसरा पीड़ित
बुखार की चपेट में आने वाले मरीजों की संख्या जिले में सबसे अधिक है। नागरिक अस्पताल की मेडिसिन ओपीडी में हर दूसरा वायरल से पीड़ित है। अगस्त में ओपीडी 150 से कम थी लेकिन अब 200 तक पहुंच गई है। रोज 5 से ज्यादा लोगों को भर्ती करने की जरूरत भी पड़ रही है। बदलते मौसम के बीच वायरल बुखार का प्रकोप बढ़ने की आशंका जताई गई है। टायफाइड के ज्यादातर मरीजों में जोड़ों में दर्द की समस्या बताई जा रही है। काफी मरीज बुखार ठीक होने के बाद भी हाथ-पैर या शरीर के अन्य हिस्सों में दर्द की शिकायत कर रहे हैं।
बच्चों और बुजुर्गों पर ज्यादा असर
मौसम के उतार-चढ़ाव का असर सबसे अधिक बच्चों और बुजुर्गों पर पड़ रहा है। बच्चों में सर्दी-जुकाम और वायरल बुखार तेजी से फैल रहा है जबकि बुजुर्गों में थकान और कमजोरी की शिकायतें बढ़ रही हैं। चिकित्सकों ने कहा कि इस समय शरीर की इम्यूनिटी कमजोर होती है इसलिए लोग संक्रमण के प्रति ज्यादा संवेदनशील हो जाते हैं।
एक्सपर्ट व्यू : सतर्क रहें, खुद दवा न लें
फिजिशियन डॉ. गौरव यादव ने बताया कि इस समय दिन और रात के तापमान में 10 से 12 डिग्री तक का अंतर है जो शरीर पर सीधा प्रभाव डालता है। उन्होंने कहा कि लोग रात में ठंडी हवा से बचें, गुनगुना पानी पिएं और हल्का, पौष्टिक आहार लें। मच्छरों से बचने के लिए घर के आसपास पानी जमा न होने दें और रात में मच्छरदानी का प्रयोग करें। बुखार को नजरअंदाज न करें। तीन दिन से अधिक बुखार रहने पर तुरंत ब्लड टेस्ट कराएं क्योंकि यह डेंगू या टाइफाइड का लक्षण हो सकता है। ऐसे मामलों में खुद से दवा लेने से स्थिति बिगड़ सकती है।
डेंगू के 200 और मलेरिया के 14 केस
सीजन में अब तक राज्य में डेंगू के रेवाड़ी में सर्वाधिक केस आए हैं। मंगलवार को भी 2 नए केस मिले और डेंगू के मरीजों की संख्या बढ़कर 276 पहुंच गई है। डेंगू के रोज 40 से 50 तक सैंपल लिए जा रहे हैं। अब तक 4004 सैंपल लेकर जांच की जा चुकी है। डेंगू के जो केस मिले, उनमें 125 को एडमिट करने की जरूरत नहीं पड़ी है। मलेरिया के भी 14 पॉजिटिव मरीज मिल चुके हैं। इसका बड़ा कारण जलभराव है। यह बीमारी 25 से 35 डिग्री तापमान के बीच फैलती है। इसलिए विशेषज्ञ मान रहे हैं कि बीमारी और फैल सकती है।
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वर्जन
नागरिकों से अपील की है कि बदलते मौसम में विशेष सतर्कता बरतें। भीड़भाड़ वाले इलाकों से बचें, सफाई का ध्यान रखें और संक्रमण के लक्षण दिखने पर तुरंत चिकित्सक से संपर्क करें। जागरूकता और समय पर इलाज ही मौसमी बीमारियों से बचाव का सबसे प्रभावी उपाय है। -डॉ. नरेंद्र दहिया, सिविल सर्जन, रेवाड़ी
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जिला नागरिक अस्पताल समेत निजी क्लीनिकों में इन दिनों बुखार के मरीजों की संख्या तेजी से बढ़ी है। डॉक्टरों के अनुसार मौसमी संक्रमण का असर बच्चों से लेकर बुजुर्गों तक पर दिखाई दे रहा है।
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अस्पताल से मिली जानकारी के अनुसार, पिछले एक सप्ताह में बुखार से पीड़ित मरीजों की संख्या में करीब 30 से 40 प्रतिशत तक की बढ़ोतरी दर्ज की गई है। नागरिक अस्पताल की ओपीडी में हर दिन बड़ी संख्या में लोग जांच और उपचार के लिए पहुंच रहे हैं। मरीजों में तेज बुखार, सिर दर्द, थकान, जोड़ों में दर्द और उल्टी जैसी शिकायतें सामान्य हैं। डॉक्टरों का कहना है कि ऐसे मरीजों को ठीक होने में पांच से सात दिन तक का समय लग रहा है।
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वायरल बुखार से ओपीडी में हर दूसरा पीड़ित
बुखार की चपेट में आने वाले मरीजों की संख्या जिले में सबसे अधिक है। नागरिक अस्पताल की मेडिसिन ओपीडी में हर दूसरा वायरल से पीड़ित है। अगस्त में ओपीडी 150 से कम थी लेकिन अब 200 तक पहुंच गई है। रोज 5 से ज्यादा लोगों को भर्ती करने की जरूरत भी पड़ रही है। बदलते मौसम के बीच वायरल बुखार का प्रकोप बढ़ने की आशंका जताई गई है। टायफाइड के ज्यादातर मरीजों में जोड़ों में दर्द की समस्या बताई जा रही है। काफी मरीज बुखार ठीक होने के बाद भी हाथ-पैर या शरीर के अन्य हिस्सों में दर्द की शिकायत कर रहे हैं।
बच्चों और बुजुर्गों पर ज्यादा असर
मौसम के उतार-चढ़ाव का असर सबसे अधिक बच्चों और बुजुर्गों पर पड़ रहा है। बच्चों में सर्दी-जुकाम और वायरल बुखार तेजी से फैल रहा है जबकि बुजुर्गों में थकान और कमजोरी की शिकायतें बढ़ रही हैं। चिकित्सकों ने कहा कि इस समय शरीर की इम्यूनिटी कमजोर होती है इसलिए लोग संक्रमण के प्रति ज्यादा संवेदनशील हो जाते हैं।
एक्सपर्ट व्यू : सतर्क रहें, खुद दवा न लें
फिजिशियन डॉ. गौरव यादव ने बताया कि इस समय दिन और रात के तापमान में 10 से 12 डिग्री तक का अंतर है जो शरीर पर सीधा प्रभाव डालता है। उन्होंने कहा कि लोग रात में ठंडी हवा से बचें, गुनगुना पानी पिएं और हल्का, पौष्टिक आहार लें। मच्छरों से बचने के लिए घर के आसपास पानी जमा न होने दें और रात में मच्छरदानी का प्रयोग करें। बुखार को नजरअंदाज न करें। तीन दिन से अधिक बुखार रहने पर तुरंत ब्लड टेस्ट कराएं क्योंकि यह डेंगू या टाइफाइड का लक्षण हो सकता है। ऐसे मामलों में खुद से दवा लेने से स्थिति बिगड़ सकती है।
डेंगू के 200 और मलेरिया के 14 केस
सीजन में अब तक राज्य में डेंगू के रेवाड़ी में सर्वाधिक केस आए हैं। मंगलवार को भी 2 नए केस मिले और डेंगू के मरीजों की संख्या बढ़कर 276 पहुंच गई है। डेंगू के रोज 40 से 50 तक सैंपल लिए जा रहे हैं। अब तक 4004 सैंपल लेकर जांच की जा चुकी है। डेंगू के जो केस मिले, उनमें 125 को एडमिट करने की जरूरत नहीं पड़ी है। मलेरिया के भी 14 पॉजिटिव मरीज मिल चुके हैं। इसका बड़ा कारण जलभराव है। यह बीमारी 25 से 35 डिग्री तापमान के बीच फैलती है। इसलिए विशेषज्ञ मान रहे हैं कि बीमारी और फैल सकती है।
वर्जन
नागरिकों से अपील की है कि बदलते मौसम में विशेष सतर्कता बरतें। भीड़भाड़ वाले इलाकों से बचें, सफाई का ध्यान रखें और संक्रमण के लक्षण दिखने पर तुरंत चिकित्सक से संपर्क करें। जागरूकता और समय पर इलाज ही मौसमी बीमारियों से बचाव का सबसे प्रभावी उपाय है। -डॉ. नरेंद्र दहिया, सिविल सर्जन, रेवाड़ी