फ्री ई-पेपर
पर्सनलाइज़्ड फ़ीड
पर्सनलाइज़्ड नोटिफ़िकेशन
चलते-फिरते ख़बरें
लॉयल्टी रिवॉर्ड्स
डाउनलोड करें

सब्सक्राइब करें
Hindi News ›   Haryana ›   Rewari News ›   Daughters will be able to become strong women by reading

पढ़ लिखकर सशक्त महिला बन पाएंगी बेटियां

Fri, 24 Dec 2021 10:15 PM IST
Rohtak Bureau रोहतक ब्यूरो
Updated Fri, 24 Dec 2021 10:15 PM IST
विज्ञापन
Daughters will be able to become strong women by reading
विधानसभा के शीतकालीन सत्र में बेटियां की शादी की आयु 18 से बढ़ाकर 21 साल करने के फैसले का शहर के लोगों ने स्वागत किया है। शहर के प्रबुद्ध लोगों ने अपनी प्रतिक्रिया देते हुए कहा कि सरकार का यह सराहनीय कदम है। सरकार के इस फैसले का हम स्वागत करते हैं। बेटियों की शादी की आयु 21 करने के बाद बेटियों को आगे शिक्षा ग्रहण करने का अवसर मिलेगा, साथ ही बेटियां पढ़ लिखकर अपने पैरों पर खड़ी हो सकेंगी। 18 वर्ष की उम्र में लड़कियां पढ़ाई आदि करने के चलते अपने पैरों पर खड़ी नहीं हो पाती हैं। कई बार नौकरी आदि की तैयारी भी नहीं कर पाती हैं। परिवार के लोग भी उम्र होने का हवाला देकर शादी का दबाव बनाने लगते हैं। 21 वर्ष की उम्र काफी समझदारी भरी होती है। ऐसे में लड़कियों को अपने करियर के प्रति निर्णय लेने का मौका भी मिल सकेगा। शहर की महिलाओं और युवतियों ने केंद्र सरकार के निर्णय को सही ठहराया है।
विज्ञापन

लड़कियों की विवाह की उम्र 18 से 21 साल किये जाने के प्रस्ताव का स्वागत है। 18 वर्ष की आयु में लड़कियों को पूरी समझ नहीं होती। कई बार देखा गया है कि 18 वर्ष की आयु में लव मैरिज करने के बाद बेटियों को काफी पछताना पड़ता हैं। यह कानून लागू होने के बाद ऐसी घटनाओं पर अंकुश लगेगा।
विज्ञापन

- एडवोकेट शमशेर सिंह, जिला बार प्रधान।
सरकार का यह सराहनीय कदम हैं। 18 वर्ष की आयु में लड़कियों सिर्फ बारहवीं तक पढ़ाई कर पाती हैं। इसके बाद परिजन उनकी शादी कर देते हैं। यह कानून बनने के बाद लड़कियां पढ़ाई पूरी कर अपने पैरों पर खड़ी हो अपने परिवार को अच्छे से संभाल सकेंगी और अपने बारे मे सही और अच्छे फैसले लेने मे सक्षम होंगी ।
विज्ञापन
विज्ञापन

- डॉ. श्रेयस यादव।
सरकार ने सही समय पर बेटियों की शादी की उम्र 18 से 21 कर सराहनीय फैसला लिया है। शादी की जल्दबाजी में जो माता पिता बेटियों की पढ़ाई रोकते थे, या शादी के बाद पढ़ाई बीच में छूट जाती थी, अब ऐसा नहीं होगा। लड़कियां अब अपनी पढ़ाई पूरी करेंगी और आगे बढ़ेंगी।

- डॉ. स्वाति, शिक्षक।
सरकार के इस फैसले का मैं स्वागत करती हूं। खुशी की बात है कि सरकार अब देश की आधी आबादी के बारे में बराबर का सोच रही है। बस आगे उम्मीद करते हैं कि समाज का हर आदमी इस फैसले और कानून का सम्मान करें क्योंकि देश का कानून बदलने से नहीं सोच बदलने से बदलेगा।
- पूनम यादव, चेयरपर्सन, नगर परिषद।
विज्ञापन
विज्ञापन

रहें हर खबर से अपडेट, डाउनलोड करें Android Hindi News App, iOS Hindi News App और Amarujala Hindi News APP अपने मोबाइल पे|
Get all India News in Hindi related to live update of politics, sports, entertainment, technology and education etc. Stay updated with us for all breaking news from India News and more news in Hindi.

विज्ञापन
विज्ञापन
विज्ञापन

एड फ्री अनुभव के लिए अमर उजाला प्रीमियम सब्सक्राइब करें

Next Article

AU ऐप में पढ़ें

Followed