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सीवर लाइन शुरू नहीं, रिपेयर के नाम पर कर दी 85 लाख की पेमेंट
अमर उजाला ब्यूरो/रेवाड़ी
Updated Sun, 06 Dec 2015 12:37 AM IST
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कोसली में सीवरेज लाइन में मिली अनियमितताओं के बीच ठेकेदार को 85 लाख का पेमेंट करने के मामले में हुई विजिलेंस जांच में जन स्वास्थ्य विभाग के आठ अधिकारियों को दोषी पाया गया है।
विजिलेंस के एसई पंकज कंबोज ने जांच रिपोर्ट चीफ इंजीनियर विजिलेंस सुजानाराम को सौंप दी है। अब महकमे ने सभी अधिकारियों को शो कॉज नोटिस देने के साथ चार्जशीट देने की तैयार शुरू कर दी है।
जांच में तत्कालीन एक्सईएन जितेंद्र सिंह, उमेश भारद्वाज, दलीप सिंह श्योराण, राकेश कुमार, एसडीई अशोक कुमार, फूल सिंह तंवर व अनिल भारद्वाज और जेई नितिन कुमार को दोषी पाया गया है। यहां बता दें कि कोसली में 16 करोड़ रुपये खर्च कर सीवरेज लाइन डाली गई है लेकिन ज्यादातर इलाके में इसे शुरू तक नहीं किया गया है।
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खोला ने की शिकायत, मंत्री के आदेश पर हुई जांच
भाजपा के जिलाध्यक्ष सतीश खोला का कहना है कि कोसली के आदर्श नगर सोसायटी के लोग उनसे मिले थे। पूरे मामले की जानकारी लेने के बाद उन्होंने रेवाड़ी एसई से शिकायत की और इसके बाद मामला ग्रीवेंस कमेटी में पहुंचा। जहां प्रभारी मंत्री राव नरबीर सिंह ने इसकी विजिलेंस जांच कराने के आदेश दिए थे। जांच में अधिकारी दोषी पाए गए हैं। खोला का कहना है कि अब सभी के खिलाफ सख्त कार्रवाई होनी चाहिए। सरकार भ्रष्टाचारियों के खिलाफ काम कर रही है।
यह लगाए थे शिकायत पर आरोप
सतीश खोला ने अपनी शिकायत में कहा था कि सीवर रख रखाव के नाम अक्तूबर-2014 में 20 लाख रुपये का कार्य कुटेशन से किया गया, जबकि निविदा के जरिए होना था।
कुटेशन रेट एचएसआर रेट से दस गुणा ज्यादा थी। जो काम दिखाया गया, उसके अनुसार मेन हॉल से पानी निकालना, मिट्टी निकाला, जबकि सीवर लाइन चालू ही नहीं थी। इसके बावजूद सभी भुगतान एक ही ठेकेदार को कर दिया गया। मार्च, 2015 में दो-दो लाख की कुटेशन से एसटीपी के टैंक की खुदाई की है जोकि निविदा से होनी चाहिए थी।
एसटीपी की खुदाई कार्य के लिए 5-5 लाख के दो टेंडर लगाए गए जबकि दस लाख का टेंडर, ई-टेंडर से होना चाहिए। छह महीने में लगभग 50 लाख का काम कुटेशन द्वारा किया गया। मार्च, 2015 में पांच लाख रुपये का कार्य कुटेशन द्वारा किया गया।
सभी अधिकारी जांच में दोषी पाए गए हैं। इन्होंने सीवरेज लाइन का कार्य पूरा न होने पर ही ठेकेदार को 85 लाख रुपये की पेमेंट कर दी। सभी को शो कॅाज नोटिस के बाद चार्ज शीट दी जाएगी।
सुजानाराम, चीफ इंजीनियर
ऐसे हैं हालात
कोसली में सोलह करोड़ की लागत से डाली गई सीवर लाइन चार साल का लंबा समय बीत जाने के बाद ज्यादातर इलाके में शुरू नहीं हो पाई। हाल यह है कि कुछ जगह लाइन तक नहीं बिछाई गई है। जबकि सीवर रिपेयर के नाम पर लाखों खर्च कर दिए गए हैं।
कोसली के गांव भकली व कोसली कस्बे में वर्ष 2011 में सीवर डालने का काम चालू किया गया, जिसका आठ करोड़ रुपये का एस्टीमेट बनाया गया, लेकिन जनस्वास्थ्य विभाग ने सरकार से सोलह करोड रुपये इस सीवरेज लाइन के लिए लेने के बावजूद आज तक यह चालू नहीं हुई। बता दें कि 2006 में तत्कालीन मुख्यमंत्री भूपेंद्र सिंह हुड्डा ने यहां सीवरेज लाइन की घोषणा की थी और 2011 में काम शुरू हुआ था।
यहां चालू नहीं हो रही सीवर लाइन
कोसली की भोगल बस्ती, शिव कालोनी, शक्ति नगर, विकास नगर, नाहड़ रोड क्षेत्र,आस्था कालोनी, शहर का लगभग आधा हिस्सा बनता है, सीवरेज चालू ही नहीं हो पा रहा है। आदर्श नगर में लाइन तक नहीं डाली गई। इसके अलावा कोसली गांव में बाहह्मण वाड़ा मोहल्ला, माता वाली गली, नाहडिय़ा बाजार से रोलिया मोहल्ला लाखान मोहल्ला, कोसली मठ से हवेलिया तक, जाल वाला मोहल्ला साध मोहल्ला में सीवरेज लाइन ही नहीं डाली गई।
क्या कहना है लोगों का
कोसली निवासी पूर्ण सिंह का कहना है कि सीवरेज लाइन की जरूरत कस्बे के लोगों की थी जहां ना तो गंदे पानी की निकासी है और ना ही बारिश के पानी की निकासी का कोई प्रंबध हे जिसके कारण लोगों को नारकीय जीवन जीना पड़ रहा है, लोगों को आशा जगी थी कि सीवरेज का काम पूरा होते ही इससे राहत मिलेगी लेकिन सीवरेज काम काम तो पूरा नहीं हुआ इसके लिए आया पैसा भी खर्च हो गया।
जयलाल शर्मा का कहना है कि सीवरेज लाइन का फायद नहीं मिला लेकिन रिपेयर के नाम पर पैसा आ रहा है। ऐसे में स्थानीय अधिकारियों के साथ वे अधिकारी भी दोषी हैं जो बिना जांच किए ही पैसे दे रहे हैं। बलबीर व बबलू आदि का कहना है कि सीवरेज लाइन का आज तक फायदा नहीं मिला। ऐसे में अधिकारियों के खिलाफ कार्रवाई होनी चाहिए।
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विजिलेंस के एसई पंकज कंबोज ने जांच रिपोर्ट चीफ इंजीनियर विजिलेंस सुजानाराम को सौंप दी है। अब महकमे ने सभी अधिकारियों को शो कॉज नोटिस देने के साथ चार्जशीट देने की तैयार शुरू कर दी है।
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जांच में तत्कालीन एक्सईएन जितेंद्र सिंह, उमेश भारद्वाज, दलीप सिंह श्योराण, राकेश कुमार, एसडीई अशोक कुमार, फूल सिंह तंवर व अनिल भारद्वाज और जेई नितिन कुमार को दोषी पाया गया है। यहां बता दें कि कोसली में 16 करोड़ रुपये खर्च कर सीवरेज लाइन डाली गई है लेकिन ज्यादातर इलाके में इसे शुरू तक नहीं किया गया है।
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खोला ने की शिकायत, मंत्री के आदेश पर हुई जांच
भाजपा के जिलाध्यक्ष सतीश खोला का कहना है कि कोसली के आदर्श नगर सोसायटी के लोग उनसे मिले थे। पूरे मामले की जानकारी लेने के बाद उन्होंने रेवाड़ी एसई से शिकायत की और इसके बाद मामला ग्रीवेंस कमेटी में पहुंचा। जहां प्रभारी मंत्री राव नरबीर सिंह ने इसकी विजिलेंस जांच कराने के आदेश दिए थे। जांच में अधिकारी दोषी पाए गए हैं। खोला का कहना है कि अब सभी के खिलाफ सख्त कार्रवाई होनी चाहिए। सरकार भ्रष्टाचारियों के खिलाफ काम कर रही है।
यह लगाए थे शिकायत पर आरोप
सतीश खोला ने अपनी शिकायत में कहा था कि सीवर रख रखाव के नाम अक्तूबर-2014 में 20 लाख रुपये का कार्य कुटेशन से किया गया, जबकि निविदा के जरिए होना था।
कुटेशन रेट एचएसआर रेट से दस गुणा ज्यादा थी। जो काम दिखाया गया, उसके अनुसार मेन हॉल से पानी निकालना, मिट्टी निकाला, जबकि सीवर लाइन चालू ही नहीं थी। इसके बावजूद सभी भुगतान एक ही ठेकेदार को कर दिया गया। मार्च, 2015 में दो-दो लाख की कुटेशन से एसटीपी के टैंक की खुदाई की है जोकि निविदा से होनी चाहिए थी।
एसटीपी की खुदाई कार्य के लिए 5-5 लाख के दो टेंडर लगाए गए जबकि दस लाख का टेंडर, ई-टेंडर से होना चाहिए। छह महीने में लगभग 50 लाख का काम कुटेशन द्वारा किया गया। मार्च, 2015 में पांच लाख रुपये का कार्य कुटेशन द्वारा किया गया।
सभी अधिकारी जांच में दोषी पाए गए हैं। इन्होंने सीवरेज लाइन का कार्य पूरा न होने पर ही ठेकेदार को 85 लाख रुपये की पेमेंट कर दी। सभी को शो कॅाज नोटिस के बाद चार्ज शीट दी जाएगी।
सुजानाराम, चीफ इंजीनियर
ऐसे हैं हालात
कोसली में सोलह करोड़ की लागत से डाली गई सीवर लाइन चार साल का लंबा समय बीत जाने के बाद ज्यादातर इलाके में शुरू नहीं हो पाई। हाल यह है कि कुछ जगह लाइन तक नहीं बिछाई गई है। जबकि सीवर रिपेयर के नाम पर लाखों खर्च कर दिए गए हैं।
कोसली के गांव भकली व कोसली कस्बे में वर्ष 2011 में सीवर डालने का काम चालू किया गया, जिसका आठ करोड़ रुपये का एस्टीमेट बनाया गया, लेकिन जनस्वास्थ्य विभाग ने सरकार से सोलह करोड रुपये इस सीवरेज लाइन के लिए लेने के बावजूद आज तक यह चालू नहीं हुई। बता दें कि 2006 में तत्कालीन मुख्यमंत्री भूपेंद्र सिंह हुड्डा ने यहां सीवरेज लाइन की घोषणा की थी और 2011 में काम शुरू हुआ था।
यहां चालू नहीं हो रही सीवर लाइन
कोसली की भोगल बस्ती, शिव कालोनी, शक्ति नगर, विकास नगर, नाहड़ रोड क्षेत्र,आस्था कालोनी, शहर का लगभग आधा हिस्सा बनता है, सीवरेज चालू ही नहीं हो पा रहा है। आदर्श नगर में लाइन तक नहीं डाली गई। इसके अलावा कोसली गांव में बाहह्मण वाड़ा मोहल्ला, माता वाली गली, नाहडिय़ा बाजार से रोलिया मोहल्ला लाखान मोहल्ला, कोसली मठ से हवेलिया तक, जाल वाला मोहल्ला साध मोहल्ला में सीवरेज लाइन ही नहीं डाली गई।
क्या कहना है लोगों का
कोसली निवासी पूर्ण सिंह का कहना है कि सीवरेज लाइन की जरूरत कस्बे के लोगों की थी जहां ना तो गंदे पानी की निकासी है और ना ही बारिश के पानी की निकासी का कोई प्रंबध हे जिसके कारण लोगों को नारकीय जीवन जीना पड़ रहा है, लोगों को आशा जगी थी कि सीवरेज का काम पूरा होते ही इससे राहत मिलेगी लेकिन सीवरेज काम काम तो पूरा नहीं हुआ इसके लिए आया पैसा भी खर्च हो गया।
जयलाल शर्मा का कहना है कि सीवरेज लाइन का फायद नहीं मिला लेकिन रिपेयर के नाम पर पैसा आ रहा है। ऐसे में स्थानीय अधिकारियों के साथ वे अधिकारी भी दोषी हैं जो बिना जांच किए ही पैसे दे रहे हैं। बलबीर व बबलू आदि का कहना है कि सीवरेज लाइन का आज तक फायदा नहीं मिला। ऐसे में अधिकारियों के खिलाफ कार्रवाई होनी चाहिए।