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किराये के भवनों में चल रहे 131 आंगनबाड़ी केंद्र
ब्यूरो /अमर उजाला
Updated Thu, 16 Feb 2017 12:49 AM IST
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किराये के भवनों में चल रहे 131 आंगनबाड़ी भ्ावन
- फोटो : अमर उजाला ब्यूरो
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स्थान अभाव और सरकार की हीला हवाली के चलते जिले के 131 आंगनबाड़ी केंद्र किराये के भवनों में चल रहे हैं। इसके अलावा 618 केंद्र पंचायत भवनों या फिर आंगनबाड़ी कार्यकर्ताओं के घरों से ही संचालित किए जा रहे हैं। मात्र 350 केंद्र ही ऐसे हैं जिनके पास स्वयं का भवन हैं।
ऐसे में सवाल यह है कि कैसे बच्चों एवं गर्भवती महिलाओं को पौष्टिक आहार उपलब्ध कराया जा सकता है। उधर, महिला विकास एवं बाल कल्याण विभाग का कहना है कि पंचायतों की तरफ से जमीन नहीं दिए जाने के कारण भवन नहीं बनाए जा रहे हैं। गांवों में आंगनबाड़ी केंद्रों के निर्माण के लिए सरकार की तरफ से एक भवन के लिए करीब 250 फीट जमीन की आवश्यकता होती है। यह भूमि ग्राम पंचायत की तरफ से उपलब्ध कराई जाती है। इसके निर्माण के लिए सरकार की ओर से दस लाख रुपये की राशि उपलब्ध कराई जाती है।
जिले में मात्र 350 आंगनबाड़ी केंद्रों के पास है स्वयं का भवन
जिले में 1099 आंगनबाड़ी केंद्र संचालित है। जिनमें बच्चों को प्री स्कूल एजूकेशन, न्यूट्रिशन हेल्थ एवं पौष्टिक आहार दिया जाता है। केवल 350 केंद्र ही ऐसे हैं जिनके पास स्वयं का भवन हैं। इसके अलावा किसी के पास भी स्वयं का भवन नहीं हैं। हालांकि आंगनबाड़ी कार्यकर्ताओं की तरफ से कई बार स्वयं के भवन निर्माण की मांग की जा चुकी है। इसके बावजूद भी इस ओर ध्यान नहीं दिया जा रहा है। आंगनबाड़ी कार्यकर्ताओं की ओर से कई बार ग्राम सभाओं में भवन निर्माण के लिए ग्राम पंचायत की ओर से नि:शुल्क जमीन मुहैया कराने की मांग की जाती है। लेकिन ग्राम पंचायतों की ओर से जमीन उपलब्ध कराने में कोई दिलचस्पी नहीं ली जा रही हैं। जिले के जिन गांवों में आंगनबाड़ी केंद्रों का अपना भवन नहीं है उनमें डवाना, शहबाजपुर, पदैयावास, लालपुर, गढ़ी, बोलनी, रालियावास, राजीव नगर व खरखड़ी आदि शामिल हैं।
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कोट
जिले में कई केंद्रों के पास स्वयं का भवन नहीं है। इसीलिए इन्हें पंचायत भवनों, संजीवनी केंद्रों या घरों से ही संचालित किया जा रहा हैं। हालांकि सभी कार्यकर्ता एवं सहायिकाएं बेहतर कार्य कर रहे हैं। सरकार की ओर से दी जा रही सुविधाओं से बच्चों एवं महिलाओं के पोषण का विशेष ध्यान रखा जाता है। कार्यकताओं की ओर से ग्राम सभाओं की बैठकों में जाकर केंद्र के लिए जमीन की भी मांग की जाती है। - राजबाला, जिला अध्यक्ष आंगनबाड़ी वर्कर्स एवं हेल्पर यूनियन रेवाड़ी।
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विभाग की ओर से सभी आंगनबाड़ी केंद्रों को सुचारु रूप से चलाने का पर्यास किया जाता है। जमीन नहीं मिलने के कारण अधिकांश केंद्रों का अपना भवन नहीं है। आंगनबाड़ी कार्यकर्ताओं की ओर से ग्राम सभाओं में केंद्र के लिए भूमि उपलब्ध कराने की मांग की जाती रही है। लेकिन सहयोग नहीं मिलने से ऐसा हो रहा है। इसके बावजूद भी सरकार सभी केंद्रों में सभी सुविधाएं उपलब्ध करा रही हैं। विभाग द्वारा बेहतर करने का प्रयास किया जा रहा है। महिलाओं एवं बच्चों का विशेष ध्यान रखा जाता है। - लता शर्मा, जिला कार्यक्रम अधिकारी, महिला एवं बाल विकास विभाग रेवाड़ी।
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ऐसे में सवाल यह है कि कैसे बच्चों एवं गर्भवती महिलाओं को पौष्टिक आहार उपलब्ध कराया जा सकता है। उधर, महिला विकास एवं बाल कल्याण विभाग का कहना है कि पंचायतों की तरफ से जमीन नहीं दिए जाने के कारण भवन नहीं बनाए जा रहे हैं। गांवों में आंगनबाड़ी केंद्रों के निर्माण के लिए सरकार की तरफ से एक भवन के लिए करीब 250 फीट जमीन की आवश्यकता होती है। यह भूमि ग्राम पंचायत की तरफ से उपलब्ध कराई जाती है। इसके निर्माण के लिए सरकार की ओर से दस लाख रुपये की राशि उपलब्ध कराई जाती है।
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जिले में मात्र 350 आंगनबाड़ी केंद्रों के पास है स्वयं का भवन
जिले में 1099 आंगनबाड़ी केंद्र संचालित है। जिनमें बच्चों को प्री स्कूल एजूकेशन, न्यूट्रिशन हेल्थ एवं पौष्टिक आहार दिया जाता है। केवल 350 केंद्र ही ऐसे हैं जिनके पास स्वयं का भवन हैं। इसके अलावा किसी के पास भी स्वयं का भवन नहीं हैं। हालांकि आंगनबाड़ी कार्यकर्ताओं की तरफ से कई बार स्वयं के भवन निर्माण की मांग की जा चुकी है। इसके बावजूद भी इस ओर ध्यान नहीं दिया जा रहा है। आंगनबाड़ी कार्यकर्ताओं की ओर से कई बार ग्राम सभाओं में भवन निर्माण के लिए ग्राम पंचायत की ओर से नि:शुल्क जमीन मुहैया कराने की मांग की जाती है। लेकिन ग्राम पंचायतों की ओर से जमीन उपलब्ध कराने में कोई दिलचस्पी नहीं ली जा रही हैं। जिले के जिन गांवों में आंगनबाड़ी केंद्रों का अपना भवन नहीं है उनमें डवाना, शहबाजपुर, पदैयावास, लालपुर, गढ़ी, बोलनी, रालियावास, राजीव नगर व खरखड़ी आदि शामिल हैं।
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जिले में कई केंद्रों के पास स्वयं का भवन नहीं है। इसीलिए इन्हें पंचायत भवनों, संजीवनी केंद्रों या घरों से ही संचालित किया जा रहा हैं। हालांकि सभी कार्यकर्ता एवं सहायिकाएं बेहतर कार्य कर रहे हैं। सरकार की ओर से दी जा रही सुविधाओं से बच्चों एवं महिलाओं के पोषण का विशेष ध्यान रखा जाता है। कार्यकताओं की ओर से ग्राम सभाओं की बैठकों में जाकर केंद्र के लिए जमीन की भी मांग की जाती है। - राजबाला, जिला अध्यक्ष आंगनबाड़ी वर्कर्स एवं हेल्पर यूनियन रेवाड़ी।
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विभाग की ओर से सभी आंगनबाड़ी केंद्रों को सुचारु रूप से चलाने का पर्यास किया जाता है। जमीन नहीं मिलने के कारण अधिकांश केंद्रों का अपना भवन नहीं है। आंगनबाड़ी कार्यकर्ताओं की ओर से ग्राम सभाओं में केंद्र के लिए भूमि उपलब्ध कराने की मांग की जाती रही है। लेकिन सहयोग नहीं मिलने से ऐसा हो रहा है। इसके बावजूद भी सरकार सभी केंद्रों में सभी सुविधाएं उपलब्ध करा रही हैं। विभाग द्वारा बेहतर करने का प्रयास किया जा रहा है। महिलाओं एवं बच्चों का विशेष ध्यान रखा जाता है। - लता शर्मा, जिला कार्यक्रम अधिकारी, महिला एवं बाल विकास विभाग रेवाड़ी।