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Rewari News: जानलेवा हमले के आरोपियों को कोर्ट ने किया बरी

Tue, 10 Feb 2026 12:02 AM IST
रोहतक ब्यूरो संवाद न्यूज एजेंसी, रेवाड़ी
संवाद न्यूज एजेंसी, रेवाड़ी Updated Tue, 10 Feb 2026 12:02 AM IST
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Court acquits accused of murderous assault
रेवाड़ी। गांव डोहकी में 13 जनवरी 2024 को गोपाल कुमार और उनके पिता राम कुमार पर हैंडपंप के हैंडल से हमला करने के मामले में अतिरिक्त सत्र न्यायाधीश जतिन गर्ग की अदालत ने दो आरोपियों को बरी कर दिया है।
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अदालत ने सुप्रीम कोर्ट के निर्णयों का हवाला देते हुए कहा कि यह कानून का स्थापित सिद्धांत है कि जब भी मामले में पेश किए गए सबूतों पर दो विचार संभव हों, एक आरोपी को दोषी ठहराने की ओर इशारा करता हो और दूसरा उसकी निर्दोषता की ओर तो वह विचार जो आरोपी के पक्ष में हो, उसे अपनाया जाना चाहिए।
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अदालत ने अभियोजन पक्ष की साक्ष्यों को अपर्याप्त मानते हुए कहा कि आरोपियों के खिलाफ अपराध साबित नहीं हो सका। 13 जनवरी 2024 को डोहकी निवासी गोपाल कुमार और उनके पिता राम कुमार पर हुए हमले में गांव के ही परवीन और गादला निवासी विकास पर हत्या के प्रयास समेत कई धाराओं में एफआईआर दर्ज की गई थी।
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बताया गया कि परवीन ने हैंडपंप के हैंडल से सिर पर वार किया जबकि अन्य आरोपियों ने डंडों से मारपीट की। हमले में राम कुमार को गंभीर चोटें आईं। जांच के दौरान पुलिस ने डंडा और हैंडपंप का हैंडल बरामद किया।
पुलिस ने आरोपियों को गिरफ्तार कर कोर्ट में पेश किया। ट्रायल के दौरान अभियोजन पक्ष ने कुल सात गवाह पेश किए, जिनमें दोनों घायल भी शामिल थे।
अदालत में शिकायतकर्ता गोपाल कुमार और घायल राम कुमार अपने बयानों से मुकर गए। दोनों ने अदालत में कहा कि आरोपियों ने उन पर हमला नहीं किया और न ही उन्होंने किसी तरह की धमकी दी थी। ऐसे में आरोपियों के खिलाफ कोई ठोस साक्ष्य सामने नहीं आ सका।
अदालत ने फैसले में कहा कि जब प्रत्यक्षदर्शी ही आरोपियों की पहचान से इनकार कर रहे हैं तो केवल पुलिस द्वारा की गई बरामदगी के आधार पर दोष सिद्ध नहीं किया जा सकता।
अदालत ने कहा कि इसमें कोई संदेह नहीं है कि गलत बरी होना अवांछनीय है और न्यायिक प्रणाली में लोगों के विश्वास को हिला देता है। हालांकि, इससे भी बुरा एक निर्दोष व्यक्ति को गलत सजा देना है, एक निर्दोष व्यक्ति को सजा के परिणाम कहीं अधिक गंभीर होते हैं और इसके प्रभाव एक सभ्य समाज में महसूस किए बिना नहीं रह सकते।

इसलिए यह अदालत का कर्तव्य है कि वह किसी भी गलत सजा से बचे और जहां भी आवश्यकता हो, संदेह का लाभ दे। इन सभी तथ्यों को ध्यान में रखते हुए अतिरिक्त सत्र न्यायाधीश जतीन गर्ग ने परवीन और विकास को सभी आरोपों से बरी कर दिया।
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