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Rewari News: उपभोक्ता आयोग ने बैंक पर लगाया 25 हजार का जुर्माना
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रेवाड़ी। एक बैंक ने साइबर ठगी की आशंका को देखते हुए अकाउंट को इसलिए होल्ड कर दिया कि उस अकाउंट से दो बार 80 हजार रुपये निकाले गए थे। अकाउंट में रुपये आने और निकलने की जानकारी असली खाताधारक को भी नहीं थी, लेकिन बैंक ने उनका खाता छह साल से ज्यादा समय तक होल्ड पर रखा।
मामला जब जिला उपभोक्ता आयोग में गया तब सच्चाई सामने आई और उपभोक्ता आयोग ने कहा कि बेवजह शिकायतकर्ता को परेशान करने पर 25 हजार रुपये का मुआवजा बैंक को शिकायतकर्ता को अदा करना होगा। इसके साथ ही 11 हजार शिकायतकर्ता को वाद खर्च के लिए अलग से दिए जाएंगे। इतना ही नहीं आयोग ने इस आदेश में स्पष्ट किया है कि 45 दिन के अंदर खाते का होल्ड हटाकर उपभोक्ता को बैंक की सभी सुविधाएं दी जाएं। दरअसल शहर के मोहल्ला बल्लूवाड़ा निवासी योगेश कुमार का एक सेविंग खाता शहर के ही धारूहेड़ा चुंगी स्थित एक बैंक में खुला हुआ है। इस अकाउंट को एसबीआई ब्रांच ने इसलिए होल्ड कर दिया कि उसके खाते से कुछ धोखेबाजों ने 40-40 हजार रुपये की दो बार निकासी कर दी। इतना ही नहीं पहले यह रकम खाते में आई है और उसके कुछ समय बाद ही खाते से निकाल भी ली गई। इस मामले में योगेश कुमार को कोई भी जानकारी नहीं थी, लेकिन बैंक ने 6 मई 2017 को उसका अकाउंट होल्ड कर दिया। उसके अकाउंट की सभी प्रकार की ट्रांजेक्शन पर रोक लगा दी गई।इसके बाद योगेश कुमार ने बैंक के उच्च अधिकारियों को शिकायत की, लेकिन कहीं से कोई समाधान नहीं हुआ। परेशान होकर पीड़ित ने अधिवक्ता प्रवेश हरित के माध्यम से जिला उपभोक्ता आयोग में 8 मार्च 2019 को शिकायत दर्ज कर अपना खाता खुलवाने तथा ट्रांजेक्शन करने की मांग की।
जिला उपभोक्ता आयोग के पास मामले की सुनवाई के दौरान बैंक की ओर से पेश हुए अधिवक्ता ने अपनी दलील देते हुए कहा कि उनकी बैंक की एक शाखा जो कि तिरुवंतपुरम केरला में मौजूद है, वहां पर एक उपभोक्ता सारथ मुरली के खाते से 40-40 हजार की राशि 18 अप्रैल 2017 को शिकायतकर्ता योगेश कुमार के खाते में क्रेडिट की गई और कुछ समय बाद ही एटीएम के द्वारा निकाली गई। इतना ही नहीं तिरुवंतपुरम थाना में खाता में राशि निकालने की बाबत अज्ञात धोखा करने वालों के खिलाफ एफआईआर भी दर्ज की गई थी। आरोप है कि एफआईआर दर्ज करने के बाद भी पुलिस ने कभी भी शिकायतकर्ता योगेश के कोई बयान दर्ज नहीं किया।
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योगेश कुमार पर नहीं साबित हुए कोई आरोप
जिला उपभोक्ता आयोग के अध्यक्ष संजय कुमार खंडूजा व सदस्य राजेंद्र प्रसाद ने अपने संयुक्त निर्णय में स्पष्ट किया है कि बैंक और पुलिस की ओर से कोई कार्रवाई योगेश के खिलाफ नहीं की गई और न ही इस पूरे मामले में योगेश कुमार का किसी भी प्रकार से कोई आरोप साबित हुए हैं। आयोग ने अपने निर्णय में स्पष्ट किया कि यदि बैंक व पुलिस चाहता तो जहां भी दिल्ली की ब्रांच से एटीएम द्वारा निकासी की गई है उस सीसीटीवी फुटेज से देखा जा सकता था।
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मामला जब जिला उपभोक्ता आयोग में गया तब सच्चाई सामने आई और उपभोक्ता आयोग ने कहा कि बेवजह शिकायतकर्ता को परेशान करने पर 25 हजार रुपये का मुआवजा बैंक को शिकायतकर्ता को अदा करना होगा। इसके साथ ही 11 हजार शिकायतकर्ता को वाद खर्च के लिए अलग से दिए जाएंगे। इतना ही नहीं आयोग ने इस आदेश में स्पष्ट किया है कि 45 दिन के अंदर खाते का होल्ड हटाकर उपभोक्ता को बैंक की सभी सुविधाएं दी जाएं। दरअसल शहर के मोहल्ला बल्लूवाड़ा निवासी योगेश कुमार का एक सेविंग खाता शहर के ही धारूहेड़ा चुंगी स्थित एक बैंक में खुला हुआ है। इस अकाउंट को एसबीआई ब्रांच ने इसलिए होल्ड कर दिया कि उसके खाते से कुछ धोखेबाजों ने 40-40 हजार रुपये की दो बार निकासी कर दी। इतना ही नहीं पहले यह रकम खाते में आई है और उसके कुछ समय बाद ही खाते से निकाल भी ली गई। इस मामले में योगेश कुमार को कोई भी जानकारी नहीं थी, लेकिन बैंक ने 6 मई 2017 को उसका अकाउंट होल्ड कर दिया। उसके अकाउंट की सभी प्रकार की ट्रांजेक्शन पर रोक लगा दी गई।इसके बाद योगेश कुमार ने बैंक के उच्च अधिकारियों को शिकायत की, लेकिन कहीं से कोई समाधान नहीं हुआ। परेशान होकर पीड़ित ने अधिवक्ता प्रवेश हरित के माध्यम से जिला उपभोक्ता आयोग में 8 मार्च 2019 को शिकायत दर्ज कर अपना खाता खुलवाने तथा ट्रांजेक्शन करने की मांग की।
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जिला उपभोक्ता आयोग के पास मामले की सुनवाई के दौरान बैंक की ओर से पेश हुए अधिवक्ता ने अपनी दलील देते हुए कहा कि उनकी बैंक की एक शाखा जो कि तिरुवंतपुरम केरला में मौजूद है, वहां पर एक उपभोक्ता सारथ मुरली के खाते से 40-40 हजार की राशि 18 अप्रैल 2017 को शिकायतकर्ता योगेश कुमार के खाते में क्रेडिट की गई और कुछ समय बाद ही एटीएम के द्वारा निकाली गई। इतना ही नहीं तिरुवंतपुरम थाना में खाता में राशि निकालने की बाबत अज्ञात धोखा करने वालों के खिलाफ एफआईआर भी दर्ज की गई थी। आरोप है कि एफआईआर दर्ज करने के बाद भी पुलिस ने कभी भी शिकायतकर्ता योगेश के कोई बयान दर्ज नहीं किया।
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योगेश कुमार पर नहीं साबित हुए कोई आरोप
जिला उपभोक्ता आयोग के अध्यक्ष संजय कुमार खंडूजा व सदस्य राजेंद्र प्रसाद ने अपने संयुक्त निर्णय में स्पष्ट किया है कि बैंक और पुलिस की ओर से कोई कार्रवाई योगेश के खिलाफ नहीं की गई और न ही इस पूरे मामले में योगेश कुमार का किसी भी प्रकार से कोई आरोप साबित हुए हैं। आयोग ने अपने निर्णय में स्पष्ट किया कि यदि बैंक व पुलिस चाहता तो जहां भी दिल्ली की ब्रांच से एटीएम द्वारा निकासी की गई है उस सीसीटीवी फुटेज से देखा जा सकता था।