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Rewari News: गर्भ में बच्चे की मौत पर सिविल अस्पताल पर लगाया 15 लाख का जुर्माना

Sat, 06 Sep 2025 12:56 AM IST
रोहतक ब्यूरो संवाद न्यूज एजेंसी, रेवाड़ी
संवाद न्यूज एजेंसी, रेवाड़ी Updated Sat, 06 Sep 2025 12:56 AM IST
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Civil hospital fined Rs 15 lakh for death of child in womb
रेवाड़ी। महिला के प्रसव के दौरान लापरवाही बरतने के कारण बच्चे की मौत मामले में जिला उपभोक्ता आयोग के अध्यक्ष संजय कुमार खंडूजा और सदस्य राजेंद्र प्रसाद ने सिविल अस्पताल पर 15 लाख रुपये जुर्माना लगाया है। साथ ही उपभोक्ता आयोग ने पीड़िता को एक लाख रुपये मेडिकल खर्च देने का आदेश दिया है।
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आयोग ने कहा है कि जुर्माने की रकम डीसी, सीएमओ, एसएमओ गाइनेकोलॉजिस्ट, गाइनेकोलॉजिस्ट महिला चिकित्सक, एमओ, चीफ नर्सिंग ऑफिसर से वसूल की जाएगी। यह रकम मुख्यालय की तरफ से किस तरीके से वसूला जाएगी, यह विभाग को तय करना है।
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आयोग ने कहा कि शिकायतकर्ता को उपरोक्त राशि शिकायत दायर होने की तिथि से 30 दिन की अवधि समाप्त होने तक 9% प्रति वर्ष की दर से ब्याज सहित अदा किया जाएगा अन्यथा उक्त राशि पर शिकायत दर्ज होने की तिथि से वसूली तक 12% प्रति वर्ष की दर से ब्याज देय होगा।
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आयोग ने आदेश में स्वास्थ्य विभाग मुख्यालय को आदेश दिया है कि दोषी व्यक्तियों से जुर्माने की राशि वसूल करके सरकारी खजाने में जमा कराया जाए। इसके अलावा दोषी डॉक्टरों और नर्सिंग स्टाफ की वार्षिक गोपनीय रिपोर्ट (एसीआर) में प्रतिकूल प्रविष्टियां की जाएं।
आयोग के यह भी कहा है कि यदि आयोग के आदेश का पालन नहीं किया जाता है तो शिकायतकर्ता उपभोक्ता संरक्षण अधिनियम 2019 की धारा 71 के अंतर्गत निष्पादन याचिका दायर करने का हकदार होगा। ऐसी स्थिति में विपक्षीगण अधिनियम की धारा 72 के अंतर्गत अभियोजन के लिए भी उत्तरदायी हो सकते हैं, जिसमें तीन वर्ष तक के कारावास या एक लाख रुपये तक के जुर्माने या दोनों का प्रावधान है।



12 नवंबर 2021 को डिलीवरी के लिए गई थी महिला

आदर्श नगर निवासी शिकायतकर्ता फूल कुमारी (32) पत्नी सुनील कुमार 12 नवंबर 2021 की रात 11 बजे डिलीवरी के लिए सिविल अस्पताल में आशा वर्कर के साथ गई थी। शिकायतकर्ता के अनुसार उस समय कोई डॉक्टर मौजूद नहीं था। नर्स नेजांच की थी। उस समय शिकायतकर्ता और गर्भ में पल रहा बच्चा अच्छी स्थिति में थे लेकिन जांच रिपोर्ट में डॉक्टर की उपस्थिति गलत दर्ज की गई थी। डिलीवरी के समय नर्स ने उन्हें बताया था कि डिलीवरी का समय 8 से 10 घंटे तक का है। हालांकि सुबह लगभग 6 बजे नर्स ने फिर से उनकी जांच की।उस समय जच्चा-बच्चा स्वस्थ थे।


अतिरिक्त दबाव के कारण गर्भाशय फट गया

महिला ने आरोप लगाया था कि उस समय उनकी सास भी मौजूद थीं और जब वह शौचालय गईं तो उनकी अनुपस्थिति में स्टाफ उन्हें (शिकायतकर्ता) डिलीवरी के लिए ले गया। जबरन बच्चे को जन्म देने की कोशिश की। उसके पेट को जानबूझकर और जबरदस्ती दबाया गया और इसी वजह से भ्रूण की धड़कन रुक गई। इसी वजह से गर्भ में ही भ्रूण की मौत हो गई और अतिरिक्त दबाव के कारण गर्भाशय भी फट गया।
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