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Rewari News: बिजली चोरी आकलन के खिलाफ सिविल अपील खारिज, ट्रायल कोर्ट का फैसला बरकरार
Thu, 05 Feb 2026 11:30 PM IST
रोहतक ब्यूरो
संवाद न्यूज एजेंसी, रेवाड़ी
संवाद न्यूज एजेंसी, रेवाड़ी
Updated Thu, 05 Feb 2026 11:30 PM IST
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रेवाड़ी। जिला न्यायिक परिसर। संवाद
रेवाड़ी। अतिरिक्त जिला एवं सत्र न्यायाधीश सौरभ कुमार की अदालत ने दक्षिण हरियाणा बिजली वितरण निगम (डीएचबीवीएन) की तरफ से जारी बिजली चोरी आकलन को चुनौती देने वाली सिविल अपील को खारिज कर दिया है। अदालत ने फैसला सुनाते हुए ट्रायल कोर्ट के 20 जनवरी 2023 के निर्णय को सही ठहराया।
मामले के अनुसार गांव पहलवास निवासी सत्यवान ने अपने पिता के नाम घरेलू बिजली कनेक्शन होने का दावा करते हुए कहा था कि वह नियमित रूप से बिजली बिलों का भुगतान करते आ रहे हैं।
अगस्त 2019 में विभाग की ओर से उसके खिलाफ बिजली चोरी व अनियमित उपयोग का आरोप लगाते हुए 75,873 रुपये का आकलन बिल और 10 हजार रुपये कंपाउंडिंग शुल्क का मेमो जारी किया गया था।
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सत्यवान ने इन मेमो को गलत, मनगढ़ंत और नियमों के विपरीत बताते हुए सिविल कोर्ट में चुनौती दी थी। ट्रायल कोर्ट ने साक्ष्यों और कानून का अवलोकन करने के बाद सत्यवान का दावा खारिज कर दिया था।
इसके खिलाफ दायर अपील पर सुनवाई करते हुए अपीलीय अदालत ने मुख्य रूप से अधिकार क्षेत्र के प्रश्न पर विचार किया। अदालत ने स्पष्ट किया कि विद्युत अधिनियम 2003 की धारा 145 के तहत बिजली चोरी, आकलन और कंपाउंडिंग जैसे मामलों में सिविल कोर्ट का अधिकार क्षेत्र पूरी तरह से वर्जित है।
ऐसे मामलों में उपभोक्ता के पास वैकल्पिक वैधानिक उपाय या संवैधानिक उपचार का रास्ता खुला रहता है, लेकिन सिविल मुकदमा स्वीकार्य नहीं है। इन तथ्यों के आधार पर अदालत ने अपील को खारिज करते हुए ट्रायल कोर्ट के फैसले को बरकरार रखा।
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मामले के अनुसार गांव पहलवास निवासी सत्यवान ने अपने पिता के नाम घरेलू बिजली कनेक्शन होने का दावा करते हुए कहा था कि वह नियमित रूप से बिजली बिलों का भुगतान करते आ रहे हैं।
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अगस्त 2019 में विभाग की ओर से उसके खिलाफ बिजली चोरी व अनियमित उपयोग का आरोप लगाते हुए 75,873 रुपये का आकलन बिल और 10 हजार रुपये कंपाउंडिंग शुल्क का मेमो जारी किया गया था।
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सत्यवान ने इन मेमो को गलत, मनगढ़ंत और नियमों के विपरीत बताते हुए सिविल कोर्ट में चुनौती दी थी। ट्रायल कोर्ट ने साक्ष्यों और कानून का अवलोकन करने के बाद सत्यवान का दावा खारिज कर दिया था।
इसके खिलाफ दायर अपील पर सुनवाई करते हुए अपीलीय अदालत ने मुख्य रूप से अधिकार क्षेत्र के प्रश्न पर विचार किया। अदालत ने स्पष्ट किया कि विद्युत अधिनियम 2003 की धारा 145 के तहत बिजली चोरी, आकलन और कंपाउंडिंग जैसे मामलों में सिविल कोर्ट का अधिकार क्षेत्र पूरी तरह से वर्जित है।
ऐसे मामलों में उपभोक्ता के पास वैकल्पिक वैधानिक उपाय या संवैधानिक उपचार का रास्ता खुला रहता है, लेकिन सिविल मुकदमा स्वीकार्य नहीं है। इन तथ्यों के आधार पर अदालत ने अपील को खारिज करते हुए ट्रायल कोर्ट के फैसले को बरकरार रखा।