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आंगनबाड़ी केंद्र में 8 माह बाद आई मूंगफली खाने से बच्चे हुए बीमार
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कोसली क्षेत्र के गांव टहना में आंगनबाड़ी में आठ माह बाद आई कीड़ा युक्त मूंगफली खाने से बच्चों को उल्टी होने की बात सामने आई है। वहीं आंगनबाड़ी अधिकारियों ने अपना पल्ला झाड़ लिया।
जानकारी अनुसार टहना गांव स्थित एक आंगनबाड़ी में कीड़ा युक्त व घटिया किस्म की मूंगफली खाने से बच्चों को उल्टी दस्त की शिकायत के बाद विभाग की नींद खुली। आगे से कीड़ा युक्त मूंगफली व अन्य सामग्री वितरण न करने की हिदायत देकर अधिकारियों ने अपना पल्ला झाड़ लिया। वहीं ग्रामीण पूनम देवी, अंजली, सुनीता, पूजा, अंगूरी देवी और मंजू देवी ने बताया कि उनके यहां आंगनबाड़ी में आठ माह के बाद राशन आया है और यह राशन खाने लायक नहीं है। उनका कहना है कि आंगनबाड़ी में आई मूंगफली इतनी घटिया किस्म कि थी की उनके खाने से बच्चे बीमार पड़ रहे हैं। उनका कहना है कि उनके गांव की आंगनबाड़ी में आए राशन व अन्य सामग्री की जांच करवाई जाए और जिस राशन व मूंगफली खाने से उनके बच्चे बीमार पड़े हैं उन जिम्मेदारों के खिलाफ कार्रवाई की जाए।
उन्होंने यह भी बताया कि उनके यहां वर्ष 2020 में मिक्सचर, सोयाबीन, लालकी सप्लाई आई थी। इसके बाद में अभी मूंगफली सप्लाई आई है जो निम्न स्तर की है। वहीं आंगनबाड़ी वर्कर छिंदर देवी का कहना है कि उनकी आंगनबाड़ी में आठ माह में राशन आया था और उसके पास जो राशन आया था उसमें मूंगफली बच्चों को वितरण की गई थी। वहीं चावल बना कर दिया जा रहा है। चावलों में भी कीड़े होने के सवाल पर कहा कि हम इन्हें साफ करके बनाते हैं।
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केंद्र में है 35 बच्चे
कोसली में आंगनबाड़ी केंद्र में 35 बच्चे थे। इनमें से दो बालिकायें बीमार हो गई। इनमें हिमांशी 4 वर्ष और हिताशा 3 वर्ष की है। बीमार होने पर दोनों का इलाज निजी अस्पताल में कराया गया। बाद में उन्हें घर भेज दिया गया। बताया जाता है कि सभी बच्चों को मूंगफली बांटी गई लेकिन लेते ही इन दोनों ने सबसे पहले मूंगफली खा ली और खाते ही दोनों को उल्टी होने लगी इसलिए बाकी बच्चों को उसे खाने नहीं दिया गया।
पिछले चार माह से हड़ताल पर जाने के कारण आंगनबाड़ी वर्कर्स ने आंगनबाड़ी नहीं खोली अब उनके संज्ञान में नहीं है कि कीड़ा युक्त मूंगफली खाने से बच्चों को उल्टियां लगी है। उन्होंने कहा कि अगर ऐसा है तो इसकी जांच करवाई जाएगी और घटिया किस्म का खाना व अन्य सामग्री की सप्लाई आई है तो उसे वितरण नहीं किया जाएगा। वहीं आठ माह से आंगनबाड़ी में राशन न आने के सवाल पर उन्होंने कहा कि जो आगे से आता है वही आंगनबाड़ी में भेजा जाता है।
-मंजू यादव, सुपरवाइजर।
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जानकारी अनुसार टहना गांव स्थित एक आंगनबाड़ी में कीड़ा युक्त व घटिया किस्म की मूंगफली खाने से बच्चों को उल्टी दस्त की शिकायत के बाद विभाग की नींद खुली। आगे से कीड़ा युक्त मूंगफली व अन्य सामग्री वितरण न करने की हिदायत देकर अधिकारियों ने अपना पल्ला झाड़ लिया। वहीं ग्रामीण पूनम देवी, अंजली, सुनीता, पूजा, अंगूरी देवी और मंजू देवी ने बताया कि उनके यहां आंगनबाड़ी में आठ माह के बाद राशन आया है और यह राशन खाने लायक नहीं है। उनका कहना है कि आंगनबाड़ी में आई मूंगफली इतनी घटिया किस्म कि थी की उनके खाने से बच्चे बीमार पड़ रहे हैं। उनका कहना है कि उनके गांव की आंगनबाड़ी में आए राशन व अन्य सामग्री की जांच करवाई जाए और जिस राशन व मूंगफली खाने से उनके बच्चे बीमार पड़े हैं उन जिम्मेदारों के खिलाफ कार्रवाई की जाए।
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उन्होंने यह भी बताया कि उनके यहां वर्ष 2020 में मिक्सचर, सोयाबीन, लालकी सप्लाई आई थी। इसके बाद में अभी मूंगफली सप्लाई आई है जो निम्न स्तर की है। वहीं आंगनबाड़ी वर्कर छिंदर देवी का कहना है कि उनकी आंगनबाड़ी में आठ माह में राशन आया था और उसके पास जो राशन आया था उसमें मूंगफली बच्चों को वितरण की गई थी। वहीं चावल बना कर दिया जा रहा है। चावलों में भी कीड़े होने के सवाल पर कहा कि हम इन्हें साफ करके बनाते हैं।
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केंद्र में है 35 बच्चे
कोसली में आंगनबाड़ी केंद्र में 35 बच्चे थे। इनमें से दो बालिकायें बीमार हो गई। इनमें हिमांशी 4 वर्ष और हिताशा 3 वर्ष की है। बीमार होने पर दोनों का इलाज निजी अस्पताल में कराया गया। बाद में उन्हें घर भेज दिया गया। बताया जाता है कि सभी बच्चों को मूंगफली बांटी गई लेकिन लेते ही इन दोनों ने सबसे पहले मूंगफली खा ली और खाते ही दोनों को उल्टी होने लगी इसलिए बाकी बच्चों को उसे खाने नहीं दिया गया।
पिछले चार माह से हड़ताल पर जाने के कारण आंगनबाड़ी वर्कर्स ने आंगनबाड़ी नहीं खोली अब उनके संज्ञान में नहीं है कि कीड़ा युक्त मूंगफली खाने से बच्चों को उल्टियां लगी है। उन्होंने कहा कि अगर ऐसा है तो इसकी जांच करवाई जाएगी और घटिया किस्म का खाना व अन्य सामग्री की सप्लाई आई है तो उसे वितरण नहीं किया जाएगा। वहीं आठ माह से आंगनबाड़ी में राशन न आने के सवाल पर उन्होंने कहा कि जो आगे से आता है वही आंगनबाड़ी में भेजा जाता है।
-मंजू यादव, सुपरवाइजर।