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नायब तहसीलदार समेत दस के खिलाफ अदालत के आदेश पर केस दर्ज
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रेवाड़ी। धारूहेड़ा उप तहसील के नायब तहसीलदार के खिलाफ एक सप्ताह के भीतर दूसरी बार धोखाधड़ी का मामला दर्ज होने के बाद राजस्व विभाग में हलचल है। इस बार नायब तहसीलदार के साथ रजिस्ट्री क्लर्क और एक बिल्डर समेत कुल 10 लोगों को नामजद किया गया है। यह मामला अदालत के आदेश पर धारूहेड़ा थाने में दर्ज किया गया है, जिसने धारूहेड़ा क्षेत्र को पुन: चर्चाओं में ला दिया है। इससे पहले नगर पालिका के चेयरमैन के चुनाव का मामला हाईकोर्ट तक पहुंचने के बाद धारूहेड़ा क्षेत्र समाचार पत्रों की सुर्खियों में छा गया था।
गुरुग्राम की न्यू कॉलोनी निवासी विनोद कुमार यादव ने धारूहेड़ा के गांव गढ़ी अलावलपुर स्थित अपनी 4 एकड़ से अधिक भूमि का कोलेब्रेशन एग्रीमेंट वर्ष 2012 में दिल्ली के एक बिल्डर मेसर्स गोपाल हाईटेक इंफ्रा डेवलपर प्राइवेट लिमिटेड के साथ किया था। उसे वर्ष 2016 तक प्रोजेक्ट पूरा करना था, मगर दस साल बीतने के बाद भी यह टाउनशिप विकसित नहीं हुई। ऐसी सूरत में दोनों पक्षों के बीच विवाद पनप गया। इस स्थिति में भूमि पक्ष से जुड़े विनोद कुमार ने अपनी जरनल पावर ऑफ अटॉर्नी (जीपीए) खारिज करा दी। इसके बाद बिल्डर करोड़ों रुपये की जमीन को जाता देखकर राजस्व विभाग में पैठ बनाने में जुट गया। आरोप है कि नायब तहसीलदार श्याम सुंदर, रजिस्ट्री क्लर्क रूपचंद के साथ मिलीभगत करके विनोद कुमार की ओर से खारिज कराई गई जीपीए को बहाल करा लिया। जब विनोद कुमार को इसकी जानकारी मिली तो वह अपनी शिकायत लेकर धारूहेड़ा उपतहसील से लेकर जिला लोक परिवाद समिति की बैठक में सामाजिक न्याय एवं अधिकारिता मंत्री ओमप्रकाश यादव के सामने गुहार लगाने पहुंचे। मामले में भ्रष्टाचार होने का आरोप लगाते हुए एक शिकायत भी दी और उन्होंने सीधे तौर पर मीडिया के सामने प्रशासनिक एवं राजस्व विभाग के अधिकारियों की कार्यशैली पर अंगुली उठाई। इसके बाद उन्होंने स्थानीय बाल भवन में मीडिया के सम्मुख यह घोषणा की थी कि वे इस मामले को अदालत में चुनौती देंगे।
इसके बाद विनोद कुमार यादव ने शहर में एसीजेएम पीयुष शर्मा की अदालत की शरण में गुहार लेकर पहुंचे। इस पर अदालत ने एक आदेश जारी किया, जिसके आधार पर धारूहेड़ा पुलिस ने मेसर्स हाईटेक गोपाल इंफ्रा डेवलपर प्राइवेट लिमिटेड, विकास बिश्नोई, अशोक गुप्ता, महेश शर्मा, धारूहेड़ा के नायब तहसीलदार श्याम सुंदर, धारूहेड़ा उप तहसील के तत्कालीन आरसी रूपचंद, लक्ष्मण कुमार, अशोक राय, केएल बिश्नोई, सुशील गुप्ता के खिलाफ केस दर्ज किया है।
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7 दिन पहले भी दर्ज हुई थी एफआईआर
गत 4 अगस्त को इन दस नामजद लोगों के खिलाफ गुरुग्राम के एडवोकेट भगत सिंह ने अदालत के माध्यम से धोखाधड़ी की एफआईआर दर्ज कराई थी। उनकी भी गढ़ी अलावलपुर स्थित करीब 26 एकड़ भूमि पर कोलेब्रेशन के बाद टाउनशिप विकसित नहीं की गई और जीपीए कैंसिल होने के बाद धोखे से उसका नवीकरण करा लिया गया था।
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गुरुग्राम की न्यू कॉलोनी निवासी विनोद कुमार यादव ने धारूहेड़ा के गांव गढ़ी अलावलपुर स्थित अपनी 4 एकड़ से अधिक भूमि का कोलेब्रेशन एग्रीमेंट वर्ष 2012 में दिल्ली के एक बिल्डर मेसर्स गोपाल हाईटेक इंफ्रा डेवलपर प्राइवेट लिमिटेड के साथ किया था। उसे वर्ष 2016 तक प्रोजेक्ट पूरा करना था, मगर दस साल बीतने के बाद भी यह टाउनशिप विकसित नहीं हुई। ऐसी सूरत में दोनों पक्षों के बीच विवाद पनप गया। इस स्थिति में भूमि पक्ष से जुड़े विनोद कुमार ने अपनी जरनल पावर ऑफ अटॉर्नी (जीपीए) खारिज करा दी। इसके बाद बिल्डर करोड़ों रुपये की जमीन को जाता देखकर राजस्व विभाग में पैठ बनाने में जुट गया। आरोप है कि नायब तहसीलदार श्याम सुंदर, रजिस्ट्री क्लर्क रूपचंद के साथ मिलीभगत करके विनोद कुमार की ओर से खारिज कराई गई जीपीए को बहाल करा लिया। जब विनोद कुमार को इसकी जानकारी मिली तो वह अपनी शिकायत लेकर धारूहेड़ा उपतहसील से लेकर जिला लोक परिवाद समिति की बैठक में सामाजिक न्याय एवं अधिकारिता मंत्री ओमप्रकाश यादव के सामने गुहार लगाने पहुंचे। मामले में भ्रष्टाचार होने का आरोप लगाते हुए एक शिकायत भी दी और उन्होंने सीधे तौर पर मीडिया के सामने प्रशासनिक एवं राजस्व विभाग के अधिकारियों की कार्यशैली पर अंगुली उठाई। इसके बाद उन्होंने स्थानीय बाल भवन में मीडिया के सम्मुख यह घोषणा की थी कि वे इस मामले को अदालत में चुनौती देंगे।
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इसके बाद विनोद कुमार यादव ने शहर में एसीजेएम पीयुष शर्मा की अदालत की शरण में गुहार लेकर पहुंचे। इस पर अदालत ने एक आदेश जारी किया, जिसके आधार पर धारूहेड़ा पुलिस ने मेसर्स हाईटेक गोपाल इंफ्रा डेवलपर प्राइवेट लिमिटेड, विकास बिश्नोई, अशोक गुप्ता, महेश शर्मा, धारूहेड़ा के नायब तहसीलदार श्याम सुंदर, धारूहेड़ा उप तहसील के तत्कालीन आरसी रूपचंद, लक्ष्मण कुमार, अशोक राय, केएल बिश्नोई, सुशील गुप्ता के खिलाफ केस दर्ज किया है।
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7 दिन पहले भी दर्ज हुई थी एफआईआर
गत 4 अगस्त को इन दस नामजद लोगों के खिलाफ गुरुग्राम के एडवोकेट भगत सिंह ने अदालत के माध्यम से धोखाधड़ी की एफआईआर दर्ज कराई थी। उनकी भी गढ़ी अलावलपुर स्थित करीब 26 एकड़ भूमि पर कोलेब्रेशन के बाद टाउनशिप विकसित नहीं की गई और जीपीए कैंसिल होने के बाद धोखे से उसका नवीकरण करा लिया गया था।