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Rewari News: 177 बसों की जरूरत, 135 से काम चला रहा रोडवेज
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रेवाड़ी। रोडवेज डिपो के बेड़े में 177 बसें होनी चाहिए लेकिन रिकॉर्ड में वर्तमान में 155 बसें दर्ज हैं जबकि इनमें से भी करीब 135 बसें ही सड़कों पर दौड़ रही हैं। ऐसे में जरूरत और उपलब्ध बसों के बीच बड़ा अंतर बना हुआ है। स्थानीय रूटों पर इसका असर साफ दिखाई दे रहा है। वहीं नए भवन के चक्कर में पांच दशक पहले बने डिपो के पुराने भवन में काम चलाया जा रहा है।
शहर में नए बस स्टैंड की योजना को लेकर लंबे समय से चल रही कवायद का असर अब रोडवेज की रोजमर्रा की व्यवस्था पर भी दिखाई देने लगा है। नए बस स्टैंड के निर्माण और स्थान को लेकर स्थिति स्पष्ट होने का इंतजार है, लेकिन इस बीच यात्रियों की मौजूदा जरूरतें पूरी करने के लिए जरूरी बसों का बेड़ा नहीं बढ़ पा रहा। नतीजा यह है कि शहर और ग्रामीण रूटों पर यात्रियों को कम बसों में ही सफर करना पड़ रहा है।
नए बस स्टैंड का इंतजार, बसों की जरूरत जस की तस शहर के प्रजापति चौक के पास चल रहे आधुनिक बस स्टैंड निर्माण का अभी तक महज प्रथम चरण का ही काम पूरा हो पाया है। अभी तक केवल ढांचा ही खड़ा हुआ है। 65 करोड़ रुपये की लागत से आधुनिक सुविधाओं वाला नया बस स्टैंड 20 एकड़ में बनाया जा रहा है।
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नए भवन का काम बढ़ने की उम्मीद के बीच परिवहन व्यवस्था को उसी अनुपात में मजबूत नहीं किया जा सका है। विभाग के स्तर पर बसों का बेड़ा बढ़ाने के लिए पत्राचार चल रहे हैं, लेकिन यात्रियों की जरूरत रोज की है। ऐसे में नया बस स्टैंड तैयार होने तक मौजूदा बस स्टैंड और डिपो की व्यवस्थाओं को बेहतर करने के साथ बसों की संख्या बढ़ाना भी जरूरी है।
वहीं अगस्त में डिपो को 10 साधारण बसें मिलने की उम्मीद थी, लेकिन यह मामला भी विभागीय पत्राचार में अटका हुआ है। नई बसें नहीं आने से उपलब्ध बसों पर ही रूटों का संचालन किया जा रहा है। किसी बस के खराब होने या मरम्मत के लिए जाने पर दबाव और बढ़ जाता है।
पुराने बस स्टैंड में भी सुविधाओं की कमी
एक तरफ नए बस स्टैंड के निर्माण का काम चल रहा है तो दूसरी तरफ पुराने बस स्टैंड की मरम्मत और सुविधाओं में सुधार का इंतजार बना हुआ है। यात्रियों के लिए बैठने, बूथों की संख्या बढ़ाने, प्रतीक्षालय और अन्य मूलभूत सुविधाओं को बेहतर करने की जरूरत है। ऐसे में सवाल यह है कि नया बस स्टैंड तैयार होने तक यात्रियों को मौजूदा व्यवस्था में कितनी राहत मिलेगी। कम जगह होने के कारण पर्याप्त बूथ नहीं हैं तथा यात्रियों से भी भरा रहता है।
लोगों का कहना है कि नया बस स्टैंड भविष्य की जरूरत हो सकता है, लेकिन वर्तमान में बसों की कमी और पुराने बस स्टैंड की समस्याओं का समाधान भी जरूरी है। खासकर ग्रामीण रूटों पर पर्याप्त बसें उपलब्ध नहीं होने से रोजाना आने-जाने वाले यात्रियों को परेशानी उठानी पड़ रही है। नए बस स्टैंड की योजना अपनी जगह है, लेकिन उसके इंतजार में मौजूदा परिवहन व्यवस्था की जरूरतें लंबित नहीं रहनी चाहिए।
वर्जन
प्रदेश के परिवहन बेड़े में 125 नई बसें जल्द ही शामिल की जाएंगी। रेवाड़ी डिपो को भी जल्द बसें मिलने की उम्मीद है। नए बस स्टैंड के निर्माण का कार्य भी युद्ध स्तर पर जारी है। बसों की संख्या बढ़ाने की दिशा में लगातार पत्राचार किया जा रहा है। उम्मीद है जल्द ही बसें मिल जाएंगी।
-- - निरंजन शर्मा, महाप्रबंधक रेवाड़ी डिपो
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शहर में नए बस स्टैंड की योजना को लेकर लंबे समय से चल रही कवायद का असर अब रोडवेज की रोजमर्रा की व्यवस्था पर भी दिखाई देने लगा है। नए बस स्टैंड के निर्माण और स्थान को लेकर स्थिति स्पष्ट होने का इंतजार है, लेकिन इस बीच यात्रियों की मौजूदा जरूरतें पूरी करने के लिए जरूरी बसों का बेड़ा नहीं बढ़ पा रहा। नतीजा यह है कि शहर और ग्रामीण रूटों पर यात्रियों को कम बसों में ही सफर करना पड़ रहा है।
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नए बस स्टैंड का इंतजार, बसों की जरूरत जस की तस शहर के प्रजापति चौक के पास चल रहे आधुनिक बस स्टैंड निर्माण का अभी तक महज प्रथम चरण का ही काम पूरा हो पाया है। अभी तक केवल ढांचा ही खड़ा हुआ है। 65 करोड़ रुपये की लागत से आधुनिक सुविधाओं वाला नया बस स्टैंड 20 एकड़ में बनाया जा रहा है।
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नए भवन का काम बढ़ने की उम्मीद के बीच परिवहन व्यवस्था को उसी अनुपात में मजबूत नहीं किया जा सका है। विभाग के स्तर पर बसों का बेड़ा बढ़ाने के लिए पत्राचार चल रहे हैं, लेकिन यात्रियों की जरूरत रोज की है। ऐसे में नया बस स्टैंड तैयार होने तक मौजूदा बस स्टैंड और डिपो की व्यवस्थाओं को बेहतर करने के साथ बसों की संख्या बढ़ाना भी जरूरी है।
वहीं अगस्त में डिपो को 10 साधारण बसें मिलने की उम्मीद थी, लेकिन यह मामला भी विभागीय पत्राचार में अटका हुआ है। नई बसें नहीं आने से उपलब्ध बसों पर ही रूटों का संचालन किया जा रहा है। किसी बस के खराब होने या मरम्मत के लिए जाने पर दबाव और बढ़ जाता है।
पुराने बस स्टैंड में भी सुविधाओं की कमी
एक तरफ नए बस स्टैंड के निर्माण का काम चल रहा है तो दूसरी तरफ पुराने बस स्टैंड की मरम्मत और सुविधाओं में सुधार का इंतजार बना हुआ है। यात्रियों के लिए बैठने, बूथों की संख्या बढ़ाने, प्रतीक्षालय और अन्य मूलभूत सुविधाओं को बेहतर करने की जरूरत है। ऐसे में सवाल यह है कि नया बस स्टैंड तैयार होने तक यात्रियों को मौजूदा व्यवस्था में कितनी राहत मिलेगी। कम जगह होने के कारण पर्याप्त बूथ नहीं हैं तथा यात्रियों से भी भरा रहता है।
लोगों का कहना है कि नया बस स्टैंड भविष्य की जरूरत हो सकता है, लेकिन वर्तमान में बसों की कमी और पुराने बस स्टैंड की समस्याओं का समाधान भी जरूरी है। खासकर ग्रामीण रूटों पर पर्याप्त बसें उपलब्ध नहीं होने से रोजाना आने-जाने वाले यात्रियों को परेशानी उठानी पड़ रही है। नए बस स्टैंड की योजना अपनी जगह है, लेकिन उसके इंतजार में मौजूदा परिवहन व्यवस्था की जरूरतें लंबित नहीं रहनी चाहिए।
वर्जन
प्रदेश के परिवहन बेड़े में 125 नई बसें जल्द ही शामिल की जाएंगी। रेवाड़ी डिपो को भी जल्द बसें मिलने की उम्मीद है। नए बस स्टैंड के निर्माण का कार्य भी युद्ध स्तर पर जारी है। बसों की संख्या बढ़ाने की दिशा में लगातार पत्राचार किया जा रहा है। उम्मीद है जल्द ही बसें मिल जाएंगी।