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Rewari News: 390 आंगनबाड़ी केंद्रों में बिजली कनेक्शन के लिए 27.30 लाख रुपये का बजट जारी
Thu, 19 Dec 2024 03:22 AM IST
रोहतक ब्यूरो
संवाद न्यूज एजेंसी, रेवाड़ी
संवाद न्यूज एजेंसी, रेवाड़ी
Updated Thu, 19 Dec 2024 03:22 AM IST
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फोटो : 01जिले में संचालित आंगनबाड़ी केंद्र। स्रोत : ग्रामीण
रेवाड़ी। महिला एवं बाल विकास विभाग की ओर से आंगनबाड़ियों में बिजली के कनेक्शन की व्यवस्था की जाएगी। इसके लिए अभी कुल 390 आंगनबाड़ियों को चयनित किया गया है। विभाग की ओर से प्रत्येक आंगनबाड़ी को लगभग 7 हजार रुपये की राशि बिजली कनेक्शन के लिए उपलब्ध करवाई जाएगी।
विभाग के अनुसार यह राशि सीडीपीओ को जारी कर दी गई है, जल्द ही आंगनबाड़ियों के पास राशि पहुंच जाएगी। करीब 27 लाख 30 हजार रुपये की राशि खर्च की जा रही है। साथ ही जिले की 53 आंगनबाड़ियों को सक्षम करने के लिए अपग्रेड किया जाएगा। इसके तहत इन आंगनबाड़ियों की सुविधाओं में इजाफा किया जाएगा। अभी विभाग की ओर से जिले की कुल 1099 में से 53 आंगनबाड़ियों का चयन किया गया है। आंगनबाड़ियों को बेहतर बनाकर महिलाओं व बच्चों को अच्छी सेवाएं देने वाला संस्थान बनाया जाएगा। इसके तहत आंगनबाड़ियों में कई तरह के बदलाव किए जाएंगे। आंगनबाड़ी में बिजली, पानी आदि की उचित व्यवस्था की जाएगी।
स्वच्छ पानी के लिए आरओ की भी मिलेगी सुविधा
आंगनबाड़ियों में वर्षा जल संचयन प्रणाली भी लगाई जाएगी, ताकि बारिश के पानी का भी उचित उपयोग किया जा सके। स्वच्छ पानी के लिए आरओ की सुविधा भी दी जाएगी। इसके अलावा जरूरत अनुसार अन्य कार्य भी किए जाएंगे। विभाग के अधिकारियों का दावा है कि यह कार्य जल्द करा लिया जाएगा। इसके लिए प्रक्रिया अंतिम चरण में है।
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बच्चों के कुपोषण दूर करने में आंगनबाड़ी केंद्रों की अहम भूमिका
जिले के शहरी व ग्रामीण क्षेत्रों में आंगनबाड़ी केंद्रों का संचालन किया जाता है। आंगनबाड़ी केंद्रों पर 6 वर्ष के बच्चों के स्वास्थ्य की देखभाल के साथ-साथ स्कूल पूर्व शिक्षा भी दी जाती है। बच्चों के कुपोषण दूर करने में आंगनबाड़ी केंद्रों की अहम भूमिका रहती है। भारत सरकार द्वारा महिला एवं बाल विकास सेवा विभाग की शुरुआत की गई थी। इस विभाग को सभी जिलों में लागू किया गया था। इस विभाग में आंगनबाड़ी केंद्रों को सुचारू रूप से जिला स्तर से संचालन के लिए जिला कार्यक्रम अधिकारी (डीपीओ) जिले की सभी परियोजनाओं को चलाने के लिए हर परियोजना में बाल विकास परियोजना अधिकारी (सीडीपीओ) की नियुक्ति की गई है। डीपीओ और सीडीपीओ एक प्रशासनिक पद होते हैं। आंगनबाड़ी कार्यकर्ताओं व सहायिका के कार्य की निगरानी व आंगनबाड़ी कार्यों की जांच की रिपोर्ट के लिए सुपरवाइजर (मुख्य सेविका) की नियुक्ति की गई है। जिले के शहरी या ग्रामीण क्षेत्रों में आंगनबाड़ी केन्द्रों का संचालन किया जाता है।
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390 आंगनबाड़ी में बिजली के कनेक्शन करवाया जाएगा। इसके लिए विभाग की ओर से 7 हजार की राशि सीडीपीओ को जारी कर दी गई है। जिले की 53 आंगनबाड़ियों को भी अपग्रेड किया जाएगा।
शालू यादव, जिला कार्यक्रम अधिकारी, महिला एवं बाल विकास विभाग, रेवाड़ी
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विभाग के अनुसार यह राशि सीडीपीओ को जारी कर दी गई है, जल्द ही आंगनबाड़ियों के पास राशि पहुंच जाएगी। करीब 27 लाख 30 हजार रुपये की राशि खर्च की जा रही है। साथ ही जिले की 53 आंगनबाड़ियों को सक्षम करने के लिए अपग्रेड किया जाएगा। इसके तहत इन आंगनबाड़ियों की सुविधाओं में इजाफा किया जाएगा। अभी विभाग की ओर से जिले की कुल 1099 में से 53 आंगनबाड़ियों का चयन किया गया है। आंगनबाड़ियों को बेहतर बनाकर महिलाओं व बच्चों को अच्छी सेवाएं देने वाला संस्थान बनाया जाएगा। इसके तहत आंगनबाड़ियों में कई तरह के बदलाव किए जाएंगे। आंगनबाड़ी में बिजली, पानी आदि की उचित व्यवस्था की जाएगी।
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स्वच्छ पानी के लिए आरओ की भी मिलेगी सुविधा
आंगनबाड़ियों में वर्षा जल संचयन प्रणाली भी लगाई जाएगी, ताकि बारिश के पानी का भी उचित उपयोग किया जा सके। स्वच्छ पानी के लिए आरओ की सुविधा भी दी जाएगी। इसके अलावा जरूरत अनुसार अन्य कार्य भी किए जाएंगे। विभाग के अधिकारियों का दावा है कि यह कार्य जल्द करा लिया जाएगा। इसके लिए प्रक्रिया अंतिम चरण में है।
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बच्चों के कुपोषण दूर करने में आंगनबाड़ी केंद्रों की अहम भूमिका
जिले के शहरी व ग्रामीण क्षेत्रों में आंगनबाड़ी केंद्रों का संचालन किया जाता है। आंगनबाड़ी केंद्रों पर 6 वर्ष के बच्चों के स्वास्थ्य की देखभाल के साथ-साथ स्कूल पूर्व शिक्षा भी दी जाती है। बच्चों के कुपोषण दूर करने में आंगनबाड़ी केंद्रों की अहम भूमिका रहती है। भारत सरकार द्वारा महिला एवं बाल विकास सेवा विभाग की शुरुआत की गई थी। इस विभाग को सभी जिलों में लागू किया गया था। इस विभाग में आंगनबाड़ी केंद्रों को सुचारू रूप से जिला स्तर से संचालन के लिए जिला कार्यक्रम अधिकारी (डीपीओ) जिले की सभी परियोजनाओं को चलाने के लिए हर परियोजना में बाल विकास परियोजना अधिकारी (सीडीपीओ) की नियुक्ति की गई है। डीपीओ और सीडीपीओ एक प्रशासनिक पद होते हैं। आंगनबाड़ी कार्यकर्ताओं व सहायिका के कार्य की निगरानी व आंगनबाड़ी कार्यों की जांच की रिपोर्ट के लिए सुपरवाइजर (मुख्य सेविका) की नियुक्ति की गई है। जिले के शहरी या ग्रामीण क्षेत्रों में आंगनबाड़ी केन्द्रों का संचालन किया जाता है।
390 आंगनबाड़ी में बिजली के कनेक्शन करवाया जाएगा। इसके लिए विभाग की ओर से 7 हजार की राशि सीडीपीओ को जारी कर दी गई है। जिले की 53 आंगनबाड़ियों को भी अपग्रेड किया जाएगा।
शालू यादव, जिला कार्यक्रम अधिकारी, महिला एवं बाल विकास विभाग, रेवाड़ी