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Rewari News: 400 साल पहले बसाया गया था गांव भडंगीं

Tue, 05 Mar 2024 12:55 AM IST
रोहतक ब्यूरो संवाद न्यूज एजेंसी, रेवाड़ी
संवाद न्यूज एजेंसी, रेवाड़ी Updated Tue, 05 Mar 2024 12:55 AM IST
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Bhadangi village was settled 400 years ago
कोसली। उपमंडल मुख्यालय से दस किलोमीटर की दूरी पर बसा गांव भडंगीं लगभग 400 साल पहले गांव हुडिया से आकर दो सगे भाई तोखाराम, भोजाराम ने घने जंगलों के बीच आकर बसाया था। गांव में 550 घरों की बस्ती है। गांव में कई जातियां होने के बावजूद गांव के लोग भाईचारे से रहते हुए झगड़े गांव स्तर पर ही सुलझा लेते हैं।
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गांव के पूर्व पंच सुरेंद्र यादव, संदीप हिमालिया बताते हैं कि जिस समय गांव कि स्थापना तोखाराम और भोजाराम करने के लिए यहां आए तो यहां घना जंगल और रेतीले टिब्बे मौजूद थे। घने जंगल में जंगली जानवरों से बचने के लिए सबसे पहले सुरक्षित जगह शरण ली थी। जो आगे चलकर भोजाराम के नाम पर भडंगीं नाम से गांव बसा। आज गांव में भूमिगत जल खारा होने के बाद भी कड़ी मेहनत और लगन से कार्य करते हुए संपूर्ण गांव साधन संपन्न हो गया है।
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शिक्षा के लिए गांव में आठवीं तक स्कूल है। इसके बाद चार किलोमीटर यातायात के साधनों के अभाव में पैदल चलकर नाहड़ स्कूल में आगे की शिक्षा ग्रहण करनी पड़ती है। गांव में उच्च शिक्षा के अभाव व साधनों कि कमी के बावजूद गांव शत प्रतिशत साक्षर है। गांव का पहला शिक्षक 80 के दशक में बना। अब लक्षमण यादव सेवानिवृत हो चुके हैं। बाबा जोहड़ वाला में हर साल यहां मेला और भंडारे का आयोजन होता है।
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सेना को दी प्राथमिकता

गांव में भूमिगत जल खारा होने के कारण उच्च शिक्षा ग्रहण करने की बजाये दसवीं करके सेना में भर्ती होने का चस्का ऐसा लगा कि आज भी गांव के सैकड़ों युवक तीनों सेनाओं के साथ साथ सीआरपीएफ, बीएसएफ में भी सेवा दे रहे हैं। गांव का एक मात्र कमांडेंट अजय यादव बीएसएफ में रह कर देश की सेवा कर रहा है।



लोगों का मुख्य पेशा है खेती करना

गांव में लोगों का मुख्य पेशा खेती व पशुपालन का है। इसके साथ ही कुछ युवाओं ने अपना खुद का बिजनेस भी किया हुआ है। गांव भडंगीं में सबसे बड़ी समस्या यातायात के साधनों की है। यहां ना सरकारी परिवहन व्यवस्था है ना ही कोई अन्य साधन। गंतव्य जाने के लिए लोगों को निजी वाहनों का सहारा लेना पड़ता है। गांव का भूमिगत जल खारी होने के बाद भी गांव के चारों तरफ से नहर निकल रही है, लेकिन भडंगीं गांव की सीमा की सिंचाई के लिए नहरी पानी का लाभ नहीं मिल रहा है। गांव के लोगों की मांग है कि खेती योग्य जमीन को नहरी पानी से जोड़ा जाए।
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