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कहीं आप भी मिलावटी दूध तो नहीं पी रहे
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जिले में मिलावटी दूूध का कारोबार चल रहा है जिसकी वजह से लोगों के स्वास्थ्य पर प्रतिकूल असर पड़ रहा है। खाद्य सुरक्षा विभाग की जिलेभर में हाल ही में की गई छापे मारी में दूध और दूध से बनने वाले खाद्य पदार्थ के कई नमूने जांच में फेल पाए गए हैं।
गांव से आने वाले दूधवाले दूध में पानी मिलाने तक तो थे ही परंतु अब ज्यादा मुनाफे के चक्कर में कुछ विक्रेता दूध में रसायन या यूरिया का इस्तेमाल भी करने लगे हैं। यह दूध अधिकतर दुकानों पर न जाकर घरों में आता है। कुछ दूध वाले रसायन या यूरिया का प्रयोग कर दूध को गाढ़ा करके बेच रहे है। इस दूध के गाढ़ा होने के चलते आमजन भी सही मानते है लेकिन यह दूध स्वास्थ्य को हानि पहुंचाता है।
वहीं शहरों में बाहरी राज्यों से आए प्रवासी मजदूर और मध्यम वर्ग पॉलीपैक दूध खरीद रहे हैं। इनके अलावा अकेले जिला मुख्यालय पर तीनों के करीब चाय की दुकानें चल रही हैं जिनमें पॉलीपैक दूध अधिक मात्रा में इस्तेमाल हो रहा है। जिले में पॉलीपैक दूध के नमूने भी फेल पाए गए हैं जो कि स्वास्थ्य के चिंता का विषय है।
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दूध वाले भी मिला रहे पैकेट वाला दूध
उधर गांव से आने वाले दूधवाले भी दूध से फेट यानी दूध की क्रीम वसा निकलवाकर शहरों में बेचने आते हैं, जिसकी वजह से दूध पर बार बार गर्म करने पर मलाई नहीं आती। उपभोक्ता शिकायत नहीं करे इसलिए इस दूध में पैकेट बंद दूध भी मिलाया जा रहा है। हलवाई भी इस दूध में पैकेट बंद दूध मिलाकर दही जमा रहे हैं जिसकी वजह दूध पर मलाई की परत मोटी आती है। कुछ गर्मी के दिनों में दूध अधिक समय तक खराब नहीं हो, इसके लिए दूधवाले ड्रम में यूरिया या कुछ अन्य तरह के रसायन भी डालते हैं इनकी वजह से दूध के स्वाद में तो कोई अधिक अंतर महसूस नहीं होता मगर यह दूध धीरे - धीरे मानव शरीर पर असर डालना शुरू कर देता है। चूंकि गर्मी में लोहे अथवा एल्युमिनियम के ड्रम जल्द गर्म हो जाते हैं और दूध गर्म होकर फट जाता है और संबंधित व्यक्ति को इसका नुकसान होता है इसे रोकने के लिए दूधवाले किसी रसायन और पानी का इस्तेमाल करते हैं।
खाद्य सुरक्षा विभाग लेता है समय - समय पर नमूने
जिले में खाद्य सुरक्षा एवं औषध प्रशासन विभाग की टीम समय समय पर खाद्य एवं पेय पदार्थों में मिलावट की जांच के लिए नमूने ले रहती है। इनमें दूध के नमूने भी शामिल हैं। दूध से बने मावा, दूध से बनी ठंडाई, पनीर, रबड़ी, कलाकंद, बर्फी और पैकेट बंद दूध के नमूने भी लिए गए हैं। इनमें काफी नमूने जांच में फेल साबित हुए। इनमें एक बड़ी कंपनी के मार्का दूध का भी एक नमूना भी शामिल है।
जनता हो जागरूक
खाद्य या पेय पदार्थों में मिलावट की रोकथाम के लिए हमारा विभाग लगातार छह माह से छापा मारने की कार्रवाई कर रहा है। 127 से अधिक नमूने भी लिए गए हैं। दूध के नमूने भी जांच के लिए प्रयोगशाला में भिजवाए गए। एक बड़ी कंपनी के मार्का पैकेट बंद दूध का नमूना भी जांच के लिए भेजा गया जो फेल निकला। मिलावट से संबंधित दर्जन भर मामलों पर अदालत में सुनवाई चल रही है। अभी तक किसी भी शहरवासी ने दूध में मिलावट को लेकर विभाग के पास शिकायत नहीं की है मगर दूध से बनी मिठाइयों के नमूने जांच में फेल होने से मिलावट का संदेह जताया जा सकता है। खाद्य सुरक्षा विभाग की मिलावटी नमूनों की जांच के लिए मोबाइल वैन भी प्रत्येक माह जिले में आती है। विभाग ने जिलावासियों ने कई बार यह अपील की है कि वे मिलावट होने पर संबंधित दुकानदार की शिकायत करें। सामान खरीदते समय सामान की खरीद रसीद जरूर लें तथा खराब गुणवत्ता का शक होने पर संबंधित के खिलाफ शिकायत करें। विभाग शिकायत करने वाले का नाम गोपनीय रखते हुए कानूनी कार्रवाई करेगा।
- डॉ. दीपक चौधरी।
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गांव से आने वाले दूधवाले दूध में पानी मिलाने तक तो थे ही परंतु अब ज्यादा मुनाफे के चक्कर में कुछ विक्रेता दूध में रसायन या यूरिया का इस्तेमाल भी करने लगे हैं। यह दूध अधिकतर दुकानों पर न जाकर घरों में आता है। कुछ दूध वाले रसायन या यूरिया का प्रयोग कर दूध को गाढ़ा करके बेच रहे है। इस दूध के गाढ़ा होने के चलते आमजन भी सही मानते है लेकिन यह दूध स्वास्थ्य को हानि पहुंचाता है।
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वहीं शहरों में बाहरी राज्यों से आए प्रवासी मजदूर और मध्यम वर्ग पॉलीपैक दूध खरीद रहे हैं। इनके अलावा अकेले जिला मुख्यालय पर तीनों के करीब चाय की दुकानें चल रही हैं जिनमें पॉलीपैक दूध अधिक मात्रा में इस्तेमाल हो रहा है। जिले में पॉलीपैक दूध के नमूने भी फेल पाए गए हैं जो कि स्वास्थ्य के चिंता का विषय है।
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दूध वाले भी मिला रहे पैकेट वाला दूध
उधर गांव से आने वाले दूधवाले भी दूध से फेट यानी दूध की क्रीम वसा निकलवाकर शहरों में बेचने आते हैं, जिसकी वजह से दूध पर बार बार गर्म करने पर मलाई नहीं आती। उपभोक्ता शिकायत नहीं करे इसलिए इस दूध में पैकेट बंद दूध भी मिलाया जा रहा है। हलवाई भी इस दूध में पैकेट बंद दूध मिलाकर दही जमा रहे हैं जिसकी वजह दूध पर मलाई की परत मोटी आती है। कुछ गर्मी के दिनों में दूध अधिक समय तक खराब नहीं हो, इसके लिए दूधवाले ड्रम में यूरिया या कुछ अन्य तरह के रसायन भी डालते हैं इनकी वजह से दूध के स्वाद में तो कोई अधिक अंतर महसूस नहीं होता मगर यह दूध धीरे - धीरे मानव शरीर पर असर डालना शुरू कर देता है। चूंकि गर्मी में लोहे अथवा एल्युमिनियम के ड्रम जल्द गर्म हो जाते हैं और दूध गर्म होकर फट जाता है और संबंधित व्यक्ति को इसका नुकसान होता है इसे रोकने के लिए दूधवाले किसी रसायन और पानी का इस्तेमाल करते हैं।
खाद्य सुरक्षा विभाग लेता है समय - समय पर नमूने
जिले में खाद्य सुरक्षा एवं औषध प्रशासन विभाग की टीम समय समय पर खाद्य एवं पेय पदार्थों में मिलावट की जांच के लिए नमूने ले रहती है। इनमें दूध के नमूने भी शामिल हैं। दूध से बने मावा, दूध से बनी ठंडाई, पनीर, रबड़ी, कलाकंद, बर्फी और पैकेट बंद दूध के नमूने भी लिए गए हैं। इनमें काफी नमूने जांच में फेल साबित हुए। इनमें एक बड़ी कंपनी के मार्का दूध का भी एक नमूना भी शामिल है।
जनता हो जागरूक
खाद्य या पेय पदार्थों में मिलावट की रोकथाम के लिए हमारा विभाग लगातार छह माह से छापा मारने की कार्रवाई कर रहा है। 127 से अधिक नमूने भी लिए गए हैं। दूध के नमूने भी जांच के लिए प्रयोगशाला में भिजवाए गए। एक बड़ी कंपनी के मार्का पैकेट बंद दूध का नमूना भी जांच के लिए भेजा गया जो फेल निकला। मिलावट से संबंधित दर्जन भर मामलों पर अदालत में सुनवाई चल रही है। अभी तक किसी भी शहरवासी ने दूध में मिलावट को लेकर विभाग के पास शिकायत नहीं की है मगर दूध से बनी मिठाइयों के नमूने जांच में फेल होने से मिलावट का संदेह जताया जा सकता है। खाद्य सुरक्षा विभाग की मिलावटी नमूनों की जांच के लिए मोबाइल वैन भी प्रत्येक माह जिले में आती है। विभाग ने जिलावासियों ने कई बार यह अपील की है कि वे मिलावट होने पर संबंधित दुकानदार की शिकायत करें। सामान खरीदते समय सामान की खरीद रसीद जरूर लें तथा खराब गुणवत्ता का शक होने पर संबंधित के खिलाफ शिकायत करें। विभाग शिकायत करने वाले का नाम गोपनीय रखते हुए कानूनी कार्रवाई करेगा।
- डॉ. दीपक चौधरी।