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Rewari News: अनुलोम-विलोम प्राणायाम योग की सबसे सरल प्रक्रिया
Fri, 19 Jun 2026 11:46 PM IST
रोहतक ब्यूरो
संवाद न्यूज एजेंसी, रेवाड़ी
संवाद न्यूज एजेंसी, रेवाड़ी
Updated Fri, 19 Jun 2026 11:46 PM IST
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मुकेश कुमार
रेवाड़ी। भारत स्वाभिमान ट्रस्ट के जिला प्रभारी मुकेश कुमार ने बताया कि अनुलोम-विलोम प्राणायाम योग की सबसे सरल और प्रभावी श्वास प्रक्रियाओं में से एक है। इसे नाड़ी शोधन प्राणायाम भी कहा जाता है। नियमित अभ्यास से शरीर और मन के बीच संतुलन स्थापित होता है। मानसिक शांति प्राप्त होती है। यह तनाव, चिंता और थकान को दूर कर सकारात्मक ऊर्जा का संचार करता है।
सुखासन, पद्मासन या वज्रासन में बैठकर रीढ़ की हड्डी सीधी रखें। दाएं हाथ के अंगूठे से दायां नासाछिद्र बंद करें और बाएं नासाछिद्र से धीरे-धीरे श्वांस लें। इसके बाद अनामिका से बायां नासाछिद्र बंद कर दाएं नासाछिद्र से श्वांस छोड़ें। फिर दाएं नासाछिद्र से श्वांस लेकर बाएं से छोड़ें। यही एक चक्र कहलाता है। इसका अभ्यास 5 से 15 मिनट तक किया जा सकता है।
यह प्राणायाम फेफड़ों को मजबूत बनाता है और श्वसन तंत्र की कार्यक्षमता बढ़ाता है। नियमित अभ्यास से तनाव, चिंता और अवसाद में कमी आती है। स्मरण शक्ति, एकाग्रता और मानसिक क्षमता में सुधार होता है। यह रक्त संचार को बेहतर बनाकर हृदय स्वास्थ्य को भी लाभ पहुंचाता है और रोग प्रतिरोधक क्षमता बढ़ाने में सहायक माना जाता है।
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अनुलोम-विलोम हमेशा खाली पेट करें। श्वांस को जोर से न लें और न ही जबरदस्ती रोकें। उच्च रक्तचाप, हृदय रोग या गंभीर बीमारी से पीड़ित व्यक्ति विशेषज्ञ की सलाह से ही इसका अभ्यास करें। अभ्यास के दौरान श्वास की गति सहज और नियंत्रित रखें।
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सुखासन, पद्मासन या वज्रासन में बैठकर रीढ़ की हड्डी सीधी रखें। दाएं हाथ के अंगूठे से दायां नासाछिद्र बंद करें और बाएं नासाछिद्र से धीरे-धीरे श्वांस लें। इसके बाद अनामिका से बायां नासाछिद्र बंद कर दाएं नासाछिद्र से श्वांस छोड़ें। फिर दाएं नासाछिद्र से श्वांस लेकर बाएं से छोड़ें। यही एक चक्र कहलाता है। इसका अभ्यास 5 से 15 मिनट तक किया जा सकता है।
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यह प्राणायाम फेफड़ों को मजबूत बनाता है और श्वसन तंत्र की कार्यक्षमता बढ़ाता है। नियमित अभ्यास से तनाव, चिंता और अवसाद में कमी आती है। स्मरण शक्ति, एकाग्रता और मानसिक क्षमता में सुधार होता है। यह रक्त संचार को बेहतर बनाकर हृदय स्वास्थ्य को भी लाभ पहुंचाता है और रोग प्रतिरोधक क्षमता बढ़ाने में सहायक माना जाता है।
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अनुलोम-विलोम हमेशा खाली पेट करें। श्वांस को जोर से न लें और न ही जबरदस्ती रोकें। उच्च रक्तचाप, हृदय रोग या गंभीर बीमारी से पीड़ित व्यक्ति विशेषज्ञ की सलाह से ही इसका अभ्यास करें। अभ्यास के दौरान श्वास की गति सहज और नियंत्रित रखें।