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आंगनबाड़ी वर्करों ने लगाई आवाज - हम सड़कों पर निकालेंगी जुलूस, करेंगी शक्ति प्रदर्शन
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सुभाष पार्क में आंगनबाड़ी कार्यकर्ताओं एवं सहायिकाओं का मांगों को लेकर चल रहा विरोध धरना 90 वें दिन भी जारी रहा। धरने की अध्यक्षता करते हुए जिला प्रधान तारा देवी ने कहा कि अंतरराष्ट्रीय महिला दिवस पर महिलाओं को अपनी ताकत समाज के सामने प्रदर्शित करनी चाहिए। समाज में आगे बढ़ने के लिए जरूरी है कि बालिकाओं को अच्छी शिक्षा दी जाए।
उन्होंने कहा कि यह आंदोलन 2018 में सरकार की ओर से मान ली गई दो मांगों को लागू कराने के लिए ही इसे आयोजित कराया जा रहा है। उन्होंने कहा कि 8 मार्च को अंतरराष्ट्रीय महिला दिवस पर आंगनबाड़ी कार्यकर्ता एवं सहायिकाएं विरोध जुलूस निकालते हुए सड़कों पर प्रदर्शन करेंगी। हमारा मकसद सरकार को अपनी एकता का एहसास कराना है। उन्होंने साफ कहा कि जब तक सरकार नहीं हमारी बात नहीं मानेगी, तब तक हम भी अपना आंदोलन वापस नहीं लेंगे। जिला प्रधान ने कहा कि 3 मार्च को आंगनबाड़ी की बहनों के साथ दुर्व्यवहार किया गया, जिसका खामियाजा सरकार को आने वाले चुनाव में उठाना पड़ेगा।
उन्होंने कहा कि हम उन पुलिस वालों को दिल से काफी माफ नहीं कर पाएंगे, जिन्होंने हमारी बहनों पर हाथ उठाया। क्या ये अपने घरों में भी अपनी मां और बहन पर ऐसे ही हाथ उठाते हैं? अगर ऐसा होता है तो ऐसे लोग समाज पर कलंक हैं। ऐसे लोगों को खाकी पहनने का कोई हक नहीं। इन्होंने अपनी मां की कोख को भी शर्मसार किया है और इनको भगवान भी माफ नहीं करेगा। उन्होंने कहा कि हम ईमानदारी के साथ सही राह पर हैं और 8 मार्च के हमारे जुलूस और विरोध प्रदर्शन में जिले के सामाजिक संगठन भी हमारे साथ खड़े दिखाई देंगे। इस धरने में आज आशा, कांता, सुमित्रा, गीता, संतोष, सुमन, निर्मला, पवित्रा, कविता, संध्या, प्रीति, रजनी और बिंदु आदि ने भी अपनी बात रखी।
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उन्होंने कहा कि यह आंदोलन 2018 में सरकार की ओर से मान ली गई दो मांगों को लागू कराने के लिए ही इसे आयोजित कराया जा रहा है। उन्होंने कहा कि 8 मार्च को अंतरराष्ट्रीय महिला दिवस पर आंगनबाड़ी कार्यकर्ता एवं सहायिकाएं विरोध जुलूस निकालते हुए सड़कों पर प्रदर्शन करेंगी। हमारा मकसद सरकार को अपनी एकता का एहसास कराना है। उन्होंने साफ कहा कि जब तक सरकार नहीं हमारी बात नहीं मानेगी, तब तक हम भी अपना आंदोलन वापस नहीं लेंगे। जिला प्रधान ने कहा कि 3 मार्च को आंगनबाड़ी की बहनों के साथ दुर्व्यवहार किया गया, जिसका खामियाजा सरकार को आने वाले चुनाव में उठाना पड़ेगा।
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उन्होंने कहा कि हम उन पुलिस वालों को दिल से काफी माफ नहीं कर पाएंगे, जिन्होंने हमारी बहनों पर हाथ उठाया। क्या ये अपने घरों में भी अपनी मां और बहन पर ऐसे ही हाथ उठाते हैं? अगर ऐसा होता है तो ऐसे लोग समाज पर कलंक हैं। ऐसे लोगों को खाकी पहनने का कोई हक नहीं। इन्होंने अपनी मां की कोख को भी शर्मसार किया है और इनको भगवान भी माफ नहीं करेगा। उन्होंने कहा कि हम ईमानदारी के साथ सही राह पर हैं और 8 मार्च के हमारे जुलूस और विरोध प्रदर्शन में जिले के सामाजिक संगठन भी हमारे साथ खड़े दिखाई देंगे। इस धरने में आज आशा, कांता, सुमित्रा, गीता, संतोष, सुमन, निर्मला, पवित्रा, कविता, संध्या, प्रीति, रजनी और बिंदु आदि ने भी अपनी बात रखी।
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