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जिले में डेंगू का मामला मिलने के साथ वायरल फीवर की ओपीडी भी बढ़ी
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नागरिक अस्पताल में इलाज कराने आए मरीज।
- फोटो : Rewari
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रेवाड़ी। जिले में डेंगू का मरीज मिलने के बावजूद स्वास्थ्य विभाग व नगर परिषद ने अभी तक शहर में फॉगिंग शुरू नहीं कराई है। शहर के नागरिक अस्पताल में होने वाली ओपीडी में वायरल फीवर के मरीजों की संख्या 20 प्रतिशत तक बढ़ गई है। चिकित्सकों के अनुसार वायरल फीवर के चलते प्लेटलेट्स कम हो रही हैं, जो कि चिंता का विषय है। वहीं दूसरी ओर बारिश के बाद शहर के अधिकतर वार्ड व सेक्टरों में जलभराव के चलते मच्छर पनप रहे हैं। स्वास्थ्य विभाग की कार्रवाई लार्वा मिलने के बाद 200 लोगों को नोटिस देने तक सिमट कर रह गई है। ऐसे में सवाल है कि कोविड संकट के बीच मलेरिया, डेंगू व चिकनगुनिया की रोकथाम के लिए स्वास्थ्य विभाग कर क्या रहा है।
स्वास्थ्य विभाग के अनुसार ओपीडी में आए मरीज की जांच की गई तो 14 अगस्त को एक मरीज डेंगू पॉजिटिव पाया गया। इसके बाद वहां पर मास फीवर सर्वे करा दिया गया है। जल्द ही फॉगिंग भी कराई जाएगी। सरकारी अस्पताल में जहां एक डेंगू व एक मलेरिया के मरीज मिले हैं। वहीं निजी अस्पतालों में वायरल व डेंगू-मलेरिया के रोगियों भी हो सकते हैं। ऐसे मेें प्रशासन को बचाव के लिए फॉगिंग व अन्य पानी में टेमीफोस दवा आदि डालने का कार्य करना चाहिए।
तेज बुखार के साथ खांसी व जुकाम के मरीजों में बढ़ोतरी
चिकित्सकों के अनुसार पहले ओपीडी में वायरल फीवर के 2-4 मरीज आते थे। लेकिन अब यह आंकड़ा 20 के पार पहुंच गया है। अधिकतर मरीजों में प्लेटलेट्स गिरने की शिकायत आ रही है। देखने पर डेंगू या मलेरिया के लक्षण दिखाई देते हैं, लेकिन इक्का-दुक्का मरीज छोड़कर अधिकतर वायरल फीवर के ही मरीज आ रहे हैं। प्लेटलेट्स गिरना चिंता का विषय है। ऐसे में लोगों को साफ-सफाई व रुके हुए पानी को साफ कर देना चाहिए।
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स्वच्छ पानी में पनपता है लार्वा
जानकारी के अनुसार एक जगह पर पानी को इकट्ठा होने से लार्वा पनपने का डर रहता है। मच्छर ठहरे (एकत्रित) हुए पानी मे अंडे देते हैं। जिससे मलेरिया व डेंगू की बीमारी फैलाने वाले मच्छरों की बढ़ोतरी तेजी से होती है। इसलिए तुरंत प्रभाव से मलेरिया उन्मूलन की सभी टीम ठहरे हुए पानी में काला तेल व टेमिफोस की दवाई का छिड़काव करना जरूरी होता है। जिससे मच्छर का लार्वा खत्म हो सके और जानलेवा बीमारी फैलाने वाले मच्छरों की उत्पत्ति पर पूर्ण रूप से रोक लग सके। सभी कूलर व टंकियों को अच्छी तरह से कपड़े से रगड़कर साफ करने चाहिए। फ्रिज की ट्रे का पानी जो बिजली जाने के बाद फ्रिज की बर्फ के पिघलने से ट्रे में एकत्रित होता है, उसको जरूर साफ करें। घर में प्रयोग किए जा रहे एसी के पानी को एकत्रित न होने दें। क्योंकि एसी के साफ एकत्रित पानी में भी डेंगू फैलाने वाले मच्छर पैदा होते हैं। रात को सोते समय मच्छरदानी का प्रयोग करना चाहिए व दिन के समय पूरी बाजू के कपड़े पहनने चाहिए, जिससे मच्छर के काटने से बचा जा सके।
मलेरिया के लक्षण:
चिकित्सकों के अनुसार मलेरिया मलेरिया के शुरुआती लक्षणों में तेज ठंड के साथ बुखार आना, सरदर्द होना व उल्टियों का आना है। इसलिए कोई भी बुखार आने पर अपने नजदीकी स्वास्थ्य केन्द्र में जाकर मलेरिया की जांच करवाएं और अगर जांच में मलेरिया पाया जाता है तो उसका 14 दिन का इलाज स्वास्थ्यकर्मी की देख रेख में लें।
डेंगू के लक्षण ::
अचानक तेज बुखार का होना, अचानक तेज सिरदर्द होना, मांसपेशियों तथा जोड़ों में दर्द होना, आंखों के पीछे दर्द होना, जोकि आंखों को घुमाने से बढ़ता है।
चिकनगुनिया के लक्षण : बुखार के साथ जोड़ों में दर्द व सूजन होना, कंपकंपी व ठंड के साथ बुखार का अचानक बढऩा व सिरदर्द होना।
नागरिक अस्पताल के वरिष्ठ फिजीशियन डॉ. रणीवर सिंह ने कहा कि ओपीडी में वायरल फीवर के मरीजों की संख्या बढ़कर 20 प्रतिशत तक हो गई है। इससे पहले प्रत्येक दिन 2-4 मरीज ही आ रहे थे। जांच में सामने आ रहा है कि लोगों की प्लेटलेट्स गिर रही हैं। जबकि डेंगू व मलेेरिया के अभी इक्का-दुक्का केस ही सामने आ रहे हैं। लोगों को सावधानी बरतने की जरूरत है।
इधर, डेंगू-मलेरिया विभाग के नोडल अधिकारी डॉ. विजय प्रकाश ने बताया कि 14 अगस्त को एक डेंगू का मरीज मिला है। मास फीवर सर्वे से लेकर फॉगिंग कराई जा रही है। एक डेंगू के मच्छर से आसपास के 50 घर प्रभावित हो सकते हैं। ऐसे में स्वास्थ्य विभाग की ओर से पूरी निगरानी की जा रही है। शहर में फॉगिंग कराने का जिम्मा नगर परिषद का है, उनको यह कार्य प्राथमिकता से कराना चाहिए।
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स्वास्थ्य विभाग के अनुसार ओपीडी में आए मरीज की जांच की गई तो 14 अगस्त को एक मरीज डेंगू पॉजिटिव पाया गया। इसके बाद वहां पर मास फीवर सर्वे करा दिया गया है। जल्द ही फॉगिंग भी कराई जाएगी। सरकारी अस्पताल में जहां एक डेंगू व एक मलेरिया के मरीज मिले हैं। वहीं निजी अस्पतालों में वायरल व डेंगू-मलेरिया के रोगियों भी हो सकते हैं। ऐसे मेें प्रशासन को बचाव के लिए फॉगिंग व अन्य पानी में टेमीफोस दवा आदि डालने का कार्य करना चाहिए।
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तेज बुखार के साथ खांसी व जुकाम के मरीजों में बढ़ोतरी
चिकित्सकों के अनुसार पहले ओपीडी में वायरल फीवर के 2-4 मरीज आते थे। लेकिन अब यह आंकड़ा 20 के पार पहुंच गया है। अधिकतर मरीजों में प्लेटलेट्स गिरने की शिकायत आ रही है। देखने पर डेंगू या मलेरिया के लक्षण दिखाई देते हैं, लेकिन इक्का-दुक्का मरीज छोड़कर अधिकतर वायरल फीवर के ही मरीज आ रहे हैं। प्लेटलेट्स गिरना चिंता का विषय है। ऐसे में लोगों को साफ-सफाई व रुके हुए पानी को साफ कर देना चाहिए।
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स्वच्छ पानी में पनपता है लार्वा
जानकारी के अनुसार एक जगह पर पानी को इकट्ठा होने से लार्वा पनपने का डर रहता है। मच्छर ठहरे (एकत्रित) हुए पानी मे अंडे देते हैं। जिससे मलेरिया व डेंगू की बीमारी फैलाने वाले मच्छरों की बढ़ोतरी तेजी से होती है। इसलिए तुरंत प्रभाव से मलेरिया उन्मूलन की सभी टीम ठहरे हुए पानी में काला तेल व टेमिफोस की दवाई का छिड़काव करना जरूरी होता है। जिससे मच्छर का लार्वा खत्म हो सके और जानलेवा बीमारी फैलाने वाले मच्छरों की उत्पत्ति पर पूर्ण रूप से रोक लग सके। सभी कूलर व टंकियों को अच्छी तरह से कपड़े से रगड़कर साफ करने चाहिए। फ्रिज की ट्रे का पानी जो बिजली जाने के बाद फ्रिज की बर्फ के पिघलने से ट्रे में एकत्रित होता है, उसको जरूर साफ करें। घर में प्रयोग किए जा रहे एसी के पानी को एकत्रित न होने दें। क्योंकि एसी के साफ एकत्रित पानी में भी डेंगू फैलाने वाले मच्छर पैदा होते हैं। रात को सोते समय मच्छरदानी का प्रयोग करना चाहिए व दिन के समय पूरी बाजू के कपड़े पहनने चाहिए, जिससे मच्छर के काटने से बचा जा सके।
मलेरिया के लक्षण:
चिकित्सकों के अनुसार मलेरिया मलेरिया के शुरुआती लक्षणों में तेज ठंड के साथ बुखार आना, सरदर्द होना व उल्टियों का आना है। इसलिए कोई भी बुखार आने पर अपने नजदीकी स्वास्थ्य केन्द्र में जाकर मलेरिया की जांच करवाएं और अगर जांच में मलेरिया पाया जाता है तो उसका 14 दिन का इलाज स्वास्थ्यकर्मी की देख रेख में लें।
डेंगू के लक्षण ::
अचानक तेज बुखार का होना, अचानक तेज सिरदर्द होना, मांसपेशियों तथा जोड़ों में दर्द होना, आंखों के पीछे दर्द होना, जोकि आंखों को घुमाने से बढ़ता है।
चिकनगुनिया के लक्षण : बुखार के साथ जोड़ों में दर्द व सूजन होना, कंपकंपी व ठंड के साथ बुखार का अचानक बढऩा व सिरदर्द होना।
नागरिक अस्पताल के वरिष्ठ फिजीशियन डॉ. रणीवर सिंह ने कहा कि ओपीडी में वायरल फीवर के मरीजों की संख्या बढ़कर 20 प्रतिशत तक हो गई है। इससे पहले प्रत्येक दिन 2-4 मरीज ही आ रहे थे। जांच में सामने आ रहा है कि लोगों की प्लेटलेट्स गिर रही हैं। जबकि डेंगू व मलेेरिया के अभी इक्का-दुक्का केस ही सामने आ रहे हैं। लोगों को सावधानी बरतने की जरूरत है।
इधर, डेंगू-मलेरिया विभाग के नोडल अधिकारी डॉ. विजय प्रकाश ने बताया कि 14 अगस्त को एक डेंगू का मरीज मिला है। मास फीवर सर्वे से लेकर फॉगिंग कराई जा रही है। एक डेंगू के मच्छर से आसपास के 50 घर प्रभावित हो सकते हैं। ऐसे में स्वास्थ्य विभाग की ओर से पूरी निगरानी की जा रही है। शहर में फॉगिंग कराने का जिम्मा नगर परिषद का है, उनको यह कार्य प्राथमिकता से कराना चाहिए।