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Rewari News: नाबालिग से दुष्कर्म और अपहरण के मामले में आरोपी बरी
Sat, 09 May 2026 12:43 AM IST
रोहतक ब्यूरो
संवाद न्यूज एजेंसी, रेवाड़ी
संवाद न्यूज एजेंसी, रेवाड़ी
Updated Sat, 09 May 2026 12:43 AM IST
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रेवाड़ी। फास्ट ट्रैक स्पेशल पॉक्सो अदालत के न्यायाधीश डॉ. मान पाल ने नाबालिग से दुष्कर्म और अपहरण के मामले में बिहार के मुजफ्फरपुर निवासी आरोपी ललिंदर को सभी आरोपों से बरी कर दिया। अदालत ने कहा कि अभियोजन पक्ष आरोपों को संदेह से परे साबित करने में पूरी तरह विफल रहा।
शिकायतकर्ता ने आरोप लगाया था कि 9 जनवरी 2025 को उनकी नाबालिग बेटी घर से लापता हो गई थी। उसे बहला-फुसलाकर ले जाया गया था।
सुनवाई के दौरान पीड़िता ने अदालत में कहा कि उसके साथ कभी कोई गलत काम नहीं किया गया। अदालत में पीड़िता के माता-पिता ने अभियोजन पक्ष का साथ नहीं दिया। पिता और मां दोनों ने बयान दिया कि उनकी बेटी घर से बिना बताए चली गई थी और लौटने पर उसने बताया कि उसके साथ कुछ गलत नहीं हुआ।
अभियोजन पक्ष उनके पुराने बयानों की पुष्टि नहीं करवा सका। अदालत ने 7 मई को सुनाए अपने फैसले में कहा कि केवल पुलिस रिकॉर्ड और औपचारिक गवाहों के आधार पर दोषी नहीं ठहराया जा सकता।
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अदालत को बताया गया कि पीड़िता ने आंतरिक मेडिकल जांच कराने से इनकार कर दिया था। अदालत ने माना कि अपहरण और यौन शोषण के आरोपों को साबित करने के लिए पर्याप्त, ठोस और विश्वसनीय साक्ष्य मौजूद नहीं हैं। इसी आधार पर ललिंदर को पॉक्सो एक्ट और बीएनएस की सभी धाराओं से बरी कर दिया गया।
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शिकायतकर्ता ने आरोप लगाया था कि 9 जनवरी 2025 को उनकी नाबालिग बेटी घर से लापता हो गई थी। उसे बहला-फुसलाकर ले जाया गया था।
सुनवाई के दौरान पीड़िता ने अदालत में कहा कि उसके साथ कभी कोई गलत काम नहीं किया गया। अदालत में पीड़िता के माता-पिता ने अभियोजन पक्ष का साथ नहीं दिया। पिता और मां दोनों ने बयान दिया कि उनकी बेटी घर से बिना बताए चली गई थी और लौटने पर उसने बताया कि उसके साथ कुछ गलत नहीं हुआ।
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अभियोजन पक्ष उनके पुराने बयानों की पुष्टि नहीं करवा सका। अदालत ने 7 मई को सुनाए अपने फैसले में कहा कि केवल पुलिस रिकॉर्ड और औपचारिक गवाहों के आधार पर दोषी नहीं ठहराया जा सकता।
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अदालत को बताया गया कि पीड़िता ने आंतरिक मेडिकल जांच कराने से इनकार कर दिया था। अदालत ने माना कि अपहरण और यौन शोषण के आरोपों को साबित करने के लिए पर्याप्त, ठोस और विश्वसनीय साक्ष्य मौजूद नहीं हैं। इसी आधार पर ललिंदर को पॉक्सो एक्ट और बीएनएस की सभी धाराओं से बरी कर दिया गया।