{"_id":"60ec7a1b8ebc3e4df13dee45","slug":"a-batch-of-farmers-arrived-from-hanumangarh-and-sikar-rewari-news-rtk617362981","type":"story","status":"publish","title_hn":"हनुमानगढ़ और सीकर से पहुंचा किसानों का जत्था","category":{"title":"City & states","title_hn":"शहर और राज्य","slug":"city-and-states"}}
हनुमानगढ़ और सीकर से पहुंचा किसानों का जत्था
विज्ञापन
खबरें लगातार पढ़ने के लिए अमर उजाला एप डाउनलोड करें
या
वेबसाइट पर पढ़ना जारी रखने के लिए वीडियो विज्ञापन देखें
अगर आपके पास प्रीमियम मेंबरशिप है तो
रेवाड़ी। कृषि कानूनों के विरोध में दिल्ली-जयपुर हाईवे स्थित खेड़ा बॉर्डर पर किसानों का आंदोलन 210वें दिन भी जारी रहा। सोमवार को धरनास्थल पर हनुमानगढ़ व सीकर के करीब 50 किसानों का जत्था पहुंचा। धरनास्थल पर महिला किसानों की संख्या में भी बढ़ने लगी है। धरनास्थल पर किसानों की समूह चर्चाओं का दौर भी जारी है।
बता दें कि कृषि कानूनों के विरोध में दिल्ली कूच करते समय हरियाणा पुलिस ने राजस्थान के किसानों को दिल्ली-जयपुर स्थित खेड़ा बॉर्डर पर रोक दिया था। उसके बाद से राजस्थान सहित अन्य प्रदेशों के किसानों ने यहीं पर अपना पड़ाव डाल दिया था।
सोमवार को किसानों को संबोधित करते हुए अमराराम व रणजीत राजू ने कहा कि कृषि कानूनों को रद्द कराने के लिए देश का किसान पिछले कई माह से सड़कों पर डेरा डाले हुए हैं, लेकिन केंद्र सरकार किसानों से बात करने को तैयार नहीं है। केंद्र सरकार की हठधर्मिता के कारण ही सैकड़ों किसान अपनी जान से हाथ धो बैठे हैं। लेकिन केंद्र सरकार चंद औद्योगिक घरानों को लाभ पहुंचाने के लिए तीनों कृषि कानूनों को रद्द नहीं कर रही है। केंद्र सरकार को तीनों कृषि कानूनों को रद्द करना ही पड़ेगा। उन्होंने कहा कि आंदोलन एक बार फिर से तेजी पकड़ने लगा है। देश के कोने-कोने से किसान दिल्ली की सीमाओं पर पहुंचने लगे हैं। किसानों का संकल्प है कि तीनों कृषि कानून रद्द होने तक आंदोलन को जारी रखेंगे। इस अवसर पर रामकिशन महलावत, राजाराम मील, सुमेर जैलदार, पूर्व सरंपच सुमेर बनीपुर, ईश्वर महलावत व अतर सिंह नेहरा सहित अन्य किसान मौजूद रहे।
विज्ञापन
विज्ञापन
बता दें कि कृषि कानूनों के विरोध में दिल्ली कूच करते समय हरियाणा पुलिस ने राजस्थान के किसानों को दिल्ली-जयपुर स्थित खेड़ा बॉर्डर पर रोक दिया था। उसके बाद से राजस्थान सहित अन्य प्रदेशों के किसानों ने यहीं पर अपना पड़ाव डाल दिया था।
विज्ञापन
सोमवार को किसानों को संबोधित करते हुए अमराराम व रणजीत राजू ने कहा कि कृषि कानूनों को रद्द कराने के लिए देश का किसान पिछले कई माह से सड़कों पर डेरा डाले हुए हैं, लेकिन केंद्र सरकार किसानों से बात करने को तैयार नहीं है। केंद्र सरकार की हठधर्मिता के कारण ही सैकड़ों किसान अपनी जान से हाथ धो बैठे हैं। लेकिन केंद्र सरकार चंद औद्योगिक घरानों को लाभ पहुंचाने के लिए तीनों कृषि कानूनों को रद्द नहीं कर रही है। केंद्र सरकार को तीनों कृषि कानूनों को रद्द करना ही पड़ेगा। उन्होंने कहा कि आंदोलन एक बार फिर से तेजी पकड़ने लगा है। देश के कोने-कोने से किसान दिल्ली की सीमाओं पर पहुंचने लगे हैं। किसानों का संकल्प है कि तीनों कृषि कानून रद्द होने तक आंदोलन को जारी रखेंगे। इस अवसर पर रामकिशन महलावत, राजाराम मील, सुमेर जैलदार, पूर्व सरंपच सुमेर बनीपुर, ईश्वर महलावत व अतर सिंह नेहरा सहित अन्य किसान मौजूद रहे।
विज्ञापन