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Rewari News: पांच साल में टीबी से 614 लोगों की मौत, 15 से 45 वर्ष आयु वर्ग में 63 फीसदी मरीज
Wed, 26 Aug 2026 11:33 PM IST
रोहतक ब्यूरो
संवाद न्यूज एजेंसी, रेवाड़ी
संवाद न्यूज एजेंसी, रेवाड़ी
Updated Wed, 26 Aug 2026 11:33 PM IST
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रेवाड़ी। जिले में टीबी संक्रमण की स्थिति चिंता का विषय बन गई है। पांच वर्षों में जिले में टीबी के 12,574 मरीज सामने आए, जिनमें 614 मरीजों की मौत हुई। इस वर्ष जनवरी से जून के प्रथम सप्ताह तक 1,324 मरीज सामने आए हैं। इनमें 15 से 45 वर्ष आयु वर्ग के 837 मरीज हैं। इस आयु वर्ग के मरीजों की हिस्सेदारी करीब 63 प्रतिशत है।
स्वास्थ्य विभाग के आंकड़ों के अनुसार, वर्ष 2021 में जिले में टीबी के 2,087 मरीज मिले थे, जिनमें 110 की मौत हुई। वर्ष 2022 में 2,546 मरीज मिले और 110 मरीजों की मौत हुई।
वर्ष 2023 में 2,580 मरीज सामने आए, जबकि 130 मरीजों की मौत हुई। वर्ष 2024 में 2,785 मरीज मिले और 130 मरीजों की मौत दर्ज की गई। वर्ष 2025 में 2,576 मरीज सामने आए और 134 मरीजों की मौत हुई।
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नोडल अधिकारी डॉ. विक्रम ने बताया कि टीबी के प्रमुख लक्षणों में दो सप्ताह या उससे अधिक समय तक खांसी रहना, बलगम आना, बुखार, रात में पसीना आना, वजन कम होना, भूख कम लगना और लगातार कमजोरी महसूस होना शामिल हैं। कुछ मामलों में खांसी के साथ खून भी आ सकता है। ऐसे लक्षण दिखाई देने पर स्वयं दवा लेने के बजाय चिकित्सक से जांच करवाना जरूरी है।
संक्रमण से बचाव के लिए इन बातों का रखें ध्यान
टीबी से बचाव के लिए खांसते और छींकते समय मुंह और नाक को ढकना चाहिए। घर और कार्यस्थल पर पर्याप्त हवा और रोशनी का प्रबंध रखना चाहिए। लंबे समय तक खांसी या अन्य लक्षण होने पर जांच में देरी नहीं करनी चाहिए। टीबी मरीज को चिकित्सकीय सलाह के अनुसार नियमित दवा लेनी चाहिए और उपचार का पूरा कोर्स करना चाहिए। स्वास्थ्य विभाग के अनुसार टीबी का समय पर पता लगने और नियमित उपचार से मरीज पूरी तरह स्वस्थ हो सकता है। उपचार बीच में छोड़ने से बीमारी के दोबारा होने और दवा के प्रति प्रतिरोध विकसित होने का खतरा बढ़ सकता है। इसलिए मरीजों को बिना चिकित्सकीय सलाह के दवा बंद नहीं करनी चाहिए।
युवाओं में अधिक मामले
इस वर्ष सामने आए 1,324 मरीजों में 837 मरीज 15 से 45 वर्ष आयु वर्ग के हैं। स्वास्थ्य विभाग इस आयु वर्ग में टीबी की पहचान और उपचार को लेकर विशेष जागरूकता पर जोर दे रहा है। विभाग की ओर से संभावित मरीजों की जांच कराने के साथ उपचाराधीन मरीजों की नियमित निगरानी की जा रही है।
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स्वास्थ्य विभाग के आंकड़ों के अनुसार, वर्ष 2021 में जिले में टीबी के 2,087 मरीज मिले थे, जिनमें 110 की मौत हुई। वर्ष 2022 में 2,546 मरीज मिले और 110 मरीजों की मौत हुई।
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वर्ष 2023 में 2,580 मरीज सामने आए, जबकि 130 मरीजों की मौत हुई। वर्ष 2024 में 2,785 मरीज मिले और 130 मरीजों की मौत दर्ज की गई। वर्ष 2025 में 2,576 मरीज सामने आए और 134 मरीजों की मौत हुई।
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नोडल अधिकारी डॉ. विक्रम ने बताया कि टीबी के प्रमुख लक्षणों में दो सप्ताह या उससे अधिक समय तक खांसी रहना, बलगम आना, बुखार, रात में पसीना आना, वजन कम होना, भूख कम लगना और लगातार कमजोरी महसूस होना शामिल हैं। कुछ मामलों में खांसी के साथ खून भी आ सकता है। ऐसे लक्षण दिखाई देने पर स्वयं दवा लेने के बजाय चिकित्सक से जांच करवाना जरूरी है।
संक्रमण से बचाव के लिए इन बातों का रखें ध्यान
टीबी से बचाव के लिए खांसते और छींकते समय मुंह और नाक को ढकना चाहिए। घर और कार्यस्थल पर पर्याप्त हवा और रोशनी का प्रबंध रखना चाहिए। लंबे समय तक खांसी या अन्य लक्षण होने पर जांच में देरी नहीं करनी चाहिए। टीबी मरीज को चिकित्सकीय सलाह के अनुसार नियमित दवा लेनी चाहिए और उपचार का पूरा कोर्स करना चाहिए। स्वास्थ्य विभाग के अनुसार टीबी का समय पर पता लगने और नियमित उपचार से मरीज पूरी तरह स्वस्थ हो सकता है। उपचार बीच में छोड़ने से बीमारी के दोबारा होने और दवा के प्रति प्रतिरोध विकसित होने का खतरा बढ़ सकता है। इसलिए मरीजों को बिना चिकित्सकीय सलाह के दवा बंद नहीं करनी चाहिए।
युवाओं में अधिक मामले
इस वर्ष सामने आए 1,324 मरीजों में 837 मरीज 15 से 45 वर्ष आयु वर्ग के हैं। स्वास्थ्य विभाग इस आयु वर्ग में टीबी की पहचान और उपचार को लेकर विशेष जागरूकता पर जोर दे रहा है। विभाग की ओर से संभावित मरीजों की जांच कराने के साथ उपचाराधीन मरीजों की नियमित निगरानी की जा रही है।