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12 बैंक की 60 से अधिक शाखाओं में दो दिन की हड़ताल में 600 करोड़ का लेनदेन प्रभावित
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बैंकों के निजीकरण के विरोध में यूनाइटेड फोरम ऑफ बैंक यूनियन के आह्वान पर राष्ट्रव्यापी हड़ताल के दूसरे दिन बैंक कर्मचारियों ने मंगलवार को शहर में रोष मार्च निकाला। इसके साथ ही सरकार के खिलाफ जमकर नारेबाजी करते हुए निजीकरण को बंद करने की मांग की। दो दिन की हड़ताल के कारण बैंक ग्राहकों को भारी परेशानी झेलनी पड़ी है। दोनों दिनों को मिलाकर करीब 600 करोड़ों रुपये का लेनदेन प्रभावित होने का अनुमान है। 12 बैंकों की 60 से अधिक शाखाओं में चेक रुकने के चलते व्यापारियों को परेशानी का सामना करना पड़ा है। शनिवार और रविवार की छुट्टी के बाद सोमवार व मंगलवार की हड़ताल का शादी समारोह से लेकर आम लोगों पर भी व्यापक प्रभाव पड़ा। एटीएम मशीनों में नकदी नहीं होने से भी लोगों को परेशानी का सामना करना पड़ा है।
महाराणा प्रताप चौक पर एसबीआई ब्रांच के सामने दिया धरना
मंगलवार की सुबह सभी सरकारी बैंकों के कर्मचारी महाराणा प्रताप चौक स्थित स्टेट बैंक ऑफ इंडिया की ब्रांच के सामने एकत्रित हुए। यहां धरना देकर केंद्र सरकार के खिलाफ निजीकरण को लेकर नारेबाजी की गई। इसके बाद बैंक कर्मचारी हाथों में बैनर लिए हुए महाराणा प्रताप चौक से मॉडल टाउन और फिर सरकुलर रोड पर रोष मार्च निकालते हुए पहुंचे। रोष मार्च में महिला कर्मचारियों ने भी हिस्सा लिया। बैंक कर्मचारियों ने कहा कि बैंकों का निजीकरण किसी भी सूरत में ठीक नहीं है। इससे देश के गरीबों को और ज्यादा परेशानी झेलनी पड़ेगी। प्राइवेट हाथों में बैंकों की कमान आने से आम लोगों पर इसका सीधा असर पड़ेगा। इतना ही नहीं लाखों बैंक कर्मचारियों के परिवार पर भी संकट खड़ा होगा। बैंक कर्मचारियों ने कहा कि केंद्र सरकार हर संस्था को प्राइवेट हाथों में बेचने की तैयारी में है। सरकार की मंशा बिल्कुल भी ठीक नहीं है।
निजीकरण की बजाय सुधार की जरूरत
बैंक यूनियन के पदाधिकारियों ने कहा कि निजीकरण की बजाय सरकारी संस्थाओं में सुधार करने की जरूरत है, लेकिन सरकार सुधार की बजाए मनमर्जी से सब प्राइवेट हाथों में सौंपने पर तुली हुई है। उन्होंने कहा कि सरकार बैंकों का निजीकरण करके लोगों की परेशानी बढ़ाने और अपने चहेते पूंजीपतियों के घर भरने का कार्य कर रही है जो किसी भी कीमत पर उचित नहीं है। प्रदर्शन के दौरान यूनाइटेड फोरम ऑफ बैंक यूनियन से एसबीआई के क्षेत्रीय व जोनल सचिव अविनाश यादव तथा बबरू भान शर्मा, अश्वनी शर्मा, महेश यादव, सतबीर चौहान, बैंक ऑफ इंडिया से अशोक, ईश्वर व दिनकर, बैंक ऑफ बड़ौदा से लोकेश, इंडियन बैंक से सुनील दत्त, पीएनबी से अमित व सुनील, इंडियन ओवरसिज बैंक से अजीत सहित अन्य मौजूद रहे।
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महाराणा प्रताप चौक पर एसबीआई ब्रांच के सामने दिया धरना
मंगलवार की सुबह सभी सरकारी बैंकों के कर्मचारी महाराणा प्रताप चौक स्थित स्टेट बैंक ऑफ इंडिया की ब्रांच के सामने एकत्रित हुए। यहां धरना देकर केंद्र सरकार के खिलाफ निजीकरण को लेकर नारेबाजी की गई। इसके बाद बैंक कर्मचारी हाथों में बैनर लिए हुए महाराणा प्रताप चौक से मॉडल टाउन और फिर सरकुलर रोड पर रोष मार्च निकालते हुए पहुंचे। रोष मार्च में महिला कर्मचारियों ने भी हिस्सा लिया। बैंक कर्मचारियों ने कहा कि बैंकों का निजीकरण किसी भी सूरत में ठीक नहीं है। इससे देश के गरीबों को और ज्यादा परेशानी झेलनी पड़ेगी। प्राइवेट हाथों में बैंकों की कमान आने से आम लोगों पर इसका सीधा असर पड़ेगा। इतना ही नहीं लाखों बैंक कर्मचारियों के परिवार पर भी संकट खड़ा होगा। बैंक कर्मचारियों ने कहा कि केंद्र सरकार हर संस्था को प्राइवेट हाथों में बेचने की तैयारी में है। सरकार की मंशा बिल्कुल भी ठीक नहीं है।
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निजीकरण की बजाय सुधार की जरूरत
बैंक यूनियन के पदाधिकारियों ने कहा कि निजीकरण की बजाय सरकारी संस्थाओं में सुधार करने की जरूरत है, लेकिन सरकार सुधार की बजाए मनमर्जी से सब प्राइवेट हाथों में सौंपने पर तुली हुई है। उन्होंने कहा कि सरकार बैंकों का निजीकरण करके लोगों की परेशानी बढ़ाने और अपने चहेते पूंजीपतियों के घर भरने का कार्य कर रही है जो किसी भी कीमत पर उचित नहीं है। प्रदर्शन के दौरान यूनाइटेड फोरम ऑफ बैंक यूनियन से एसबीआई के क्षेत्रीय व जोनल सचिव अविनाश यादव तथा बबरू भान शर्मा, अश्वनी शर्मा, महेश यादव, सतबीर चौहान, बैंक ऑफ इंडिया से अशोक, ईश्वर व दिनकर, बैंक ऑफ बड़ौदा से लोकेश, इंडियन बैंक से सुनील दत्त, पीएनबी से अमित व सुनील, इंडियन ओवरसिज बैंक से अजीत सहित अन्य मौजूद रहे।
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