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किसानों को फसलों के अवशेष जलाने के लिए किया जाएगा जागरूक....
Updated Fri, 20 Jul 2018 01:16 AM IST
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फसल अवशेष प्रबंधन के लिए किसानों को किया जाएगा जागरूक......
रेवाड़ी। फसल अवशेष प्रबंधन के लिए जिला प्रशासन की तरफ से किसानों को जागरूक करने के साथ ही उनको किराए पर अत्याधुनिक यंत्र उपलब्ध कराएगा ताकि फसलों के अवशेषों को किसान जलाएं नहीं। उपायुक्त अशोक कुमार शर्मा ने बताया कि केंद्र सरकार की इस योजना के तहत फसल अवशेष प्रबंधन के लिए इन-सीटू मशीनीकरण की योजना शुरू की है ताकि किसान फसल अवशेषों को न जलाएं। उन्होंने कहा कि कृषि एवं किसान कल्याण विभाग द्वारा जिला में किसानों को फसलों के अवशेष न जलाने के लिए जागरुक किया जाएगा। फसलों के अवशेष जलाने से न केवल पर्यावरण प्रदूषित हो रहा है बल्कि इसके कारण भूमि की उर्वरा शक्ति प्रभावित होने से किसानों का व्यक्तिगत नुकसान भी हो रहा है। उन्होंने कहा कि इन अवशेषों को जलाने की बजाए इनका वैज्ञानिक निपटान करके भूमि की उर्वरा शक्ति को बढाया जा सकता है। केंद्र सरकार के सहयोग से राज्य सरकार द्वारा किसानों को फसलों के अवशेष प्रबंधन द्वारा कई प्रकार के वैज्ञानिक कृषि यंत्र 50 से 80 प्रतिशत अनुदान पर उपलब्ध करवाए जा रहे हैं। फसल अवशेष प्रबंधन के लिए जिला में कस्टमर हायरिंग केंद्र स्थापित किए जाएंगे। इन केन्द्रों से किसान फसल अवशेष प्रबंधन के लिए आधुनिक कृषि यंत्रों की सेवाएं किराए पर प्राप्त कर सकेंगे। छोटे किसानों के लिए यह सुविधा अत्याधिक सहयोगी साबित होगी। उन्होंने बताया कि इस अवधि के दौरान कृषि विभाग के विशेषज्ञों द्वारा ब्लॉक स्तर पर शिविर आयोजित कर फसल अवशेष प्रबंधन के लिए जागरुक किया जाएगा कि वे किस प्रकार धान की फसल के अवशेषों को न जलाकर, कैसे निपटारा करेंगे।
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रेवाड़ी। फसल अवशेष प्रबंधन के लिए जिला प्रशासन की तरफ से किसानों को जागरूक करने के साथ ही उनको किराए पर अत्याधुनिक यंत्र उपलब्ध कराएगा ताकि फसलों के अवशेषों को किसान जलाएं नहीं। उपायुक्त अशोक कुमार शर्मा ने बताया कि केंद्र सरकार की इस योजना के तहत फसल अवशेष प्रबंधन के लिए इन-सीटू मशीनीकरण की योजना शुरू की है ताकि किसान फसल अवशेषों को न जलाएं। उन्होंने कहा कि कृषि एवं किसान कल्याण विभाग द्वारा जिला में किसानों को फसलों के अवशेष न जलाने के लिए जागरुक किया जाएगा। फसलों के अवशेष जलाने से न केवल पर्यावरण प्रदूषित हो रहा है बल्कि इसके कारण भूमि की उर्वरा शक्ति प्रभावित होने से किसानों का व्यक्तिगत नुकसान भी हो रहा है। उन्होंने कहा कि इन अवशेषों को जलाने की बजाए इनका वैज्ञानिक निपटान करके भूमि की उर्वरा शक्ति को बढाया जा सकता है। केंद्र सरकार के सहयोग से राज्य सरकार द्वारा किसानों को फसलों के अवशेष प्रबंधन द्वारा कई प्रकार के वैज्ञानिक कृषि यंत्र 50 से 80 प्रतिशत अनुदान पर उपलब्ध करवाए जा रहे हैं। फसल अवशेष प्रबंधन के लिए जिला में कस्टमर हायरिंग केंद्र स्थापित किए जाएंगे। इन केन्द्रों से किसान फसल अवशेष प्रबंधन के लिए आधुनिक कृषि यंत्रों की सेवाएं किराए पर प्राप्त कर सकेंगे। छोटे किसानों के लिए यह सुविधा अत्याधिक सहयोगी साबित होगी। उन्होंने बताया कि इस अवधि के दौरान कृषि विभाग के विशेषज्ञों द्वारा ब्लॉक स्तर पर शिविर आयोजित कर फसल अवशेष प्रबंधन के लिए जागरुक किया जाएगा कि वे किस प्रकार धान की फसल के अवशेषों को न जलाकर, कैसे निपटारा करेंगे।