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सेनानी हरिराम आर्य
Updated Wed, 07 Feb 2018 12:14 AM IST
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नहीं रहे जानेमाने स्वतंत्रता सेनानी हरिराम आर्य
अमर उजाला ब्यूरो
रेवाड़ी। हरियाणा स्वतंत्रता सेनानी सम्मान समिति के पूर्व चेयरमैन बाबू बालमुकुंद गुप्त पत्रकारिता एवं साहित्य संरक्षण परिषद् के संयोजक और जिले के गांव कारोली निवासी हरिराम आर्य का मंगलवार शाम को निधन हो गया। वह 94 वर्ष के थे और पिछले कुछ अरसे से पक्षाघात से पीड़ित थे। उनका अंतिम संस्कार बुधवार को उनके पैतृक गांव कारोली में 11 बजे किया जाएगा।
बाबू बालमुकुंद गुप्त पत्रकारिता एवं साहित्य संरक्षण परिषद् के महासचिव सत्यवीर नाहड़िया ने बताया कि एक ओर जहां प्रजामंडल आंदोलन व राष्ट्र भाषा आंदोलन में आर्य का उत्कृष्ट योगदान रहा, वहीं हिंदी पत्रकारिता के मसीहा एवं हिंदी गद्य के जनक बाबू बालमुकुंद गुप्त के भूले बिसरे व्यक्तित्व एवं कृतित्व को चिरस्थायी एवं प्रेरणापुंज बनाने में उनकी केंद्रीय भूमिका रही। इसके अलावा वे अनेक सामाजिक, साहित्यिक एवं सांस्कृतिक संगठनों से जुड़े रहे और अपने अंतिम दिनों तक लेखकीय दायित्व का निवर्हन करते रहे। उनकी आर्य समाज, राष्ट्रभाषा तथा सामाजिक विसंगतियों पर अनेक कृतियां चर्चित रही है।
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अमर उजाला ब्यूरो
रेवाड़ी। हरियाणा स्वतंत्रता सेनानी सम्मान समिति के पूर्व चेयरमैन बाबू बालमुकुंद गुप्त पत्रकारिता एवं साहित्य संरक्षण परिषद् के संयोजक और जिले के गांव कारोली निवासी हरिराम आर्य का मंगलवार शाम को निधन हो गया। वह 94 वर्ष के थे और पिछले कुछ अरसे से पक्षाघात से पीड़ित थे। उनका अंतिम संस्कार बुधवार को उनके पैतृक गांव कारोली में 11 बजे किया जाएगा।
बाबू बालमुकुंद गुप्त पत्रकारिता एवं साहित्य संरक्षण परिषद् के महासचिव सत्यवीर नाहड़िया ने बताया कि एक ओर जहां प्रजामंडल आंदोलन व राष्ट्र भाषा आंदोलन में आर्य का उत्कृष्ट योगदान रहा, वहीं हिंदी पत्रकारिता के मसीहा एवं हिंदी गद्य के जनक बाबू बालमुकुंद गुप्त के भूले बिसरे व्यक्तित्व एवं कृतित्व को चिरस्थायी एवं प्रेरणापुंज बनाने में उनकी केंद्रीय भूमिका रही। इसके अलावा वे अनेक सामाजिक, साहित्यिक एवं सांस्कृतिक संगठनों से जुड़े रहे और अपने अंतिम दिनों तक लेखकीय दायित्व का निवर्हन करते रहे। उनकी आर्य समाज, राष्ट्रभाषा तथा सामाजिक विसंगतियों पर अनेक कृतियां चर्चित रही है।
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